दाम करे सब काम



दाम करे सब काम
पैसा मिलता घोड़ी चलती
पार लगावे नैया
बाप बड़ा न भैया
सबको प्यारा है रुपैया!
मेला लगता उदास
जब पैसा न होता पास
ठन-ठन गोपाल का
कौन करता विश्वास!
वह भला मानस कैसा!
जिसकी जेब में न हो पैसा
कौन बैठता उसके पास
मुखड़ा जिसका दिखता उदास
बिन कर, पग, पर उड़ता-फिरता
अजब- गजब रंग दिखाता है पैसा
कब किस को, कितना उठावे-गिरावे
बिन बोल, सर्वत्र बोल रहा है पैसा!

Kavita Rawat

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October 27, 2009 at 11:25 AM

बहुत अच्छे।
मानने वाली बात है।

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October 27, 2009 at 3:47 PM

जो सच है, सो है। अब आज की हक़ीक़त तो यही है।

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October 27, 2009 at 5:00 PM

bilkul kharee baat . kya aap Bhagvat Rawat se parichit hai ? yoo hee pooch liya agar janatee hai to bataiyega jaroor .

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October 27, 2009 at 7:07 PM

दाम करे सब काम
पैसा मिलता घोड़ी चलती
पार लगावे नैया
बाप बड़ा न भैया
सबको प्यारा है रुपैया!

बहुत खूब ....!!

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September 15, 2010 at 9:14 AM

jeewan kee hakikat ko kish tarh shbdo me dhala hai...

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