फिर वही बात हर किसी ने छेड़ी हैं



अक्सर एकाकीपन ही मुझे अच्छा लगता
अपनेपन से भरा साथ मिले किसी का
जैसे यह दिखता कोई सुन्दर सपना है
अपने पास तो आंसू ही शेष ऐसे दिखते
जो वक्त-बेवक्त साथ देते अपना है
न होंठों पर खिलकर हंसीं आ पाई कभी
न शायद मुस्कान कभी लौट सकती है
हँस-हँस कर ही जीना जिंदगी है
ये अक्सर मुझसे मेरी वेदना कहती है
ये जिंदगी नहीं उदास रहने की
तू हरदम क्यों उदास हो जाती है
दुःख में भी मुस्कराना सीख ले
ये दुखभरी घड़ियाँ अक्सर कहती है
पर खुशियाँ तू अबतक नसीब न हुई
सिर्फ देखती आयी हूँ सुनहरे सपने
होता गम अगर सीने में कुछ कम
तो छुपा लेती उसे सीने में अपने
दर्द छुपाना चाहा मैंने हरदम
पर पीड़ा कुछ कम होती नहीं
हँसना चाहती हूँ मैं भी जीभर कर
पर होंठों तक मुस्कान आती नहीं
ख़ुशी तो मिलती है जिंदगी में मगर
हर राह मिलती मुझे टेढ़ी है
बातें जो जख्मी कर जाते दिल को
फिर वही बात हर किसी ने छेड़ी हैं

copyright@Kavita Rawat

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December 11, 2009 at 12:11 PM

अपने मनोभावों को बहुर सुन्दर शब्द दिए हैं बधाई।

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December 11, 2009 at 1:09 PM

ख़ुशी तो मिलती है जिंदगी में मगर
हर राह मिलती मुझे टेढ़ी है
रचना अच्छी लगी। बधाई।

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December 11, 2009 at 6:26 PM

दुनिया की यही रही रीत है, पुराने जख्मों को हवा देना।
वैसे भाव बहुत सुंदर हैं, मन को छू गये।
------------------
सलीम खान का हृदय परिवर्तन हो चुका है।
नारी मुक्ति, अंध विश्वास, धर्म और विज्ञान।

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December 11, 2009 at 8:18 PM

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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December 11, 2009 at 8:19 PM

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

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December 11, 2009 at 8:43 PM

jai ho !

achhi rachna
rochak post !

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December 11, 2009 at 11:13 PM

pratikool paristhitiyo se joojhata chitran . samvedana paida kar gai aapakee rachana .

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December 11, 2009 at 11:38 PM

मन को छूने वाले भावों को बहुत ही सुन्दर शब्दों में अभिव्यक्त किया है आपने ।सुन्दर रचना।
हेमन्त कुमार

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December 12, 2009 at 6:14 PM

बहुत सुंदर रचना

pls visit...
www.dweepanter.blogspot.com

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December 12, 2009 at 7:06 PM

सुन्दर रचना है बधाई

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January 22, 2010 at 7:08 PM

सुन्दर रचना है बधाई

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