देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी



देश में एक ओर जहाँ शांतिप्रिय श्रीरामजी ने राज किया
वहीँ दूसरी ओर अत्याचारी घमंडी रावण ने भी राज किया
दोनों ओर ही थे धुरंधर यौद्धा और थे निपुण धनुषधारी
देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी

देश में राज्य पहले भी थे जिनके राजा आपस में लड़ते-रहते थे
स्व राज्य विस्तार के महालोभ में ये आपस में मार-काट करते थे
चाटुकारी स्वामिभक्तों के बीच छुटपुट हुआ करते थे परोपकारी
देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी

अंग्रेज आये थे व्यापार करने पर शोषण कर नाक में कर गए दम
तब देश में देशप्रेमी मौजूद थे जो दरिंदों को भागने में हुए सक्षम
वे दुष्ट गए तो गए टुकड़े कर देश में रोष व्याप्त कर गए भारी
देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी

आज भी देश में जगह-जगह अशांति के बादल छाते जा रहे हैं
कोई रावण तो कोई द्रुयोधन बनकर देश को अशांत कर रहे हैं
शांतिदूत मूक बन बैठते जब अशांति का तांडव मचता है भारी
देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी

राजनेता देशप्रेम का मुखौटा ओढ़कर अपने लिए जोड़-तोड़ कर रहे हैं
कोई पहन रहा घोटालों का ताज तो कोई भ्रष्टाचार की चादर ओढ़ रहे हैं
जात-पात, ऊँच-नीच, अमीर- गरीब का भेदभाव अब तक है जारी
देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी

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December 16, 2009 at 11:43 AM

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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December 16, 2009 at 7:03 PM

bilkul sach manav pravarte me koi chage nahee aaya.aur jab tak swarth kee rah nahee chodate aane wala bhee nahee.sunder rachana
badhai1

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December 17, 2009 at 8:12 PM

आज भी देश में जगह-जगह अशांति के बादल छाते जा रहे हैं
कोई रावण तो कोई द्रुयोधन बनकर देश को अशांत कर रहे हैं
शांतिदूत मूक बन बैठते जब अशांति का तांडव मचता है भारी
देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी
कविता बहुत सही कहा है लाजवाब कविता है और
जात-पात, ऊँच-नीच, अमीर- गरीब का भेदभाव अब तक है जारी
देश की जो रीति पहले थी वह समझो अब तक है जारी
बिलकुल सही बात है जब तक भेद भाव जारी रहेंगे तब तक देश मे शान्ति नहीं हो सकती मगर दुख की बात यही है कि ये घटने की बजाये बढ रहा है। धन्यवाद और शुभकामनायें

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March 11, 2012 at 5:31 PM

कल 12/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

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March 12, 2012 at 8:17 AM

बहुत अच्छी और सार्थक पोस्ट...
सादर.

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March 12, 2012 at 3:47 PM

सुन्दर सामयिक प्रस्तुति...
सादर

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June 11, 2013 at 9:04 PM

सटीक अभिव्यक्ति.

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