शाम ढले तेरी याद का आना

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जिंदगी में प्यार खुशनसीब वालों को ही नसीब होता है,
जो ज्यादा रुलाता है, वही दिल से सबसे करीब होता है.
जहाँ प्यार मिले वही जगह सुहानी है,
जहाँ प्यार बसता है, वहीँ जिंदगानी है.

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वेलेंटाइन डे के अवसर पर आज से लगभग १०-१२ वर्ष पूर्व लिखी अपनी  एक प्यारभरी प्रस्तुति प्रस्तुत कर रही हूँ. प्यार के बारे में सिर्फ इतना ही कहूँगी कि जिसे भी जिंदगी में सच्चा प्यार मिल जाता है, उसकी जिंदगी आसान हो जाती है.  प्रस्तुत है...............



शाम ढले तेरी याद का आना
आकर फिर दूर न जाना.

अक्सर याद आती है तेरी प्यारभरी बातें
वे छुपते-छुपाते प्यारभरी मुलाकातें
जब प्यार में एक-दूजे में खो जाते
खोकर प्यार भरी दुनिया की सैर करते
अच्छा लगता है प्यार में डूब जाना
डूबकर तेरे करीब आना
शाम ढले तेरी याद का आना
आकर फिर दूर न जाना

पागल मन का डूबकर प्यार में
न जाने क्या-क्या सपने देख लेना
तेरा कुछ भी न कहकर प्यार में
कभी आँखों से ही बहुत कुछ कह देना
अच्छा लगता प्रेमभरी मूक भाषा को
प्यार-भरे दिल का पढ़ लेना
शाम ढले तेरी याद का आना
आकर फिर दूर न जाना

दिल करता है मैं हरपल ही
तेरे करीब रह तुझे ही देखा करूँ
भूलकर दुनिया के हर बंधन
यूँ ही खोकर प्यार में डूबी रहूँ
अच्छा लगता है इस कदर
अक्सर तेरे प्यार में डूब जाना
डूबकर प्यार महसूस करना
शाम ढले तेरी याद का आना
आकर फिर दूर न जाना

न परखना कभी प्यारभरे दिल  को
हर कदम पर साथ मेरा  देना
अपना भी होगा खुशियों भरा आशियाना
बस सदा प्यार जगाये रखना
जब भी उमड़े प्यार दिल में
प्यारभरी इबारत लिख भेजना
शाम ढले तेरी याद का आना
आकर फिर दूर न जाना

-Kavita Rawat
 

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February 14, 2010 at 11:53 AM

प्यार खुशनसीब वालों को ही नसीब होता है,
जो ज्यादा रुलाता है, वही दिल से सबसे करीब होता है.
जहाँ प्यार मिले वही जगह सुहानी है,
जहाँ प्यार बसता है, वहीँ जिंदगानी है.


बहुत सुंदर पंक्तियाँ..... और बिलकुल सही कहा आपने....

पूरी कविता अपने आप में सम्पूर्ण है....


बधाई....

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February 14, 2010 at 1:41 PM

pooree kavita bahut sunder hai aur uparyukt samay par post huee hai
badee acchee lagee.
sadaa khush raho aur aisee hee bhav vibhor rachanae likho...........

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February 14, 2010 at 1:54 PM

बस सदा प्यार जगाये रखना
जब भी उमड़े प्यार दिल में
प्यारभरी इबारत लिख भेजना
शाम ढले तेरी याद का आना
आकर फिर दूर न जाना

आज के दिन इससे बेहतर और क्या हो सकता है की उसका प्यार उसके करीब हो ... गहरे एहसास हैं ... वेलेंटाइन डे पर .... प्यार की नाज़ुक कृति ...

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February 14, 2010 at 2:20 PM

ji hatado.
aksharo ko bachao .......:)

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February 14, 2010 at 2:37 PM

वाह!! पूरा प्यार का सफर व्यक्त करती ये प्यारी रचना .......बहुत खूब

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February 14, 2010 at 2:57 PM

सचमुच प्यार भरी प्रस्तुति है ये ।
बस उम्र के पड़ाव के साथ प्यार की परिभाषा बदलती रहती है।
अच्छी रचना।

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February 14, 2010 at 3:24 PM

जहाँ प्यार मिले वही जगह सुहानी है,
जहाँ प्यार बसता है, वहीँ जिंदगानी है.


बहुत सुंदर पंक्तियाँ..... और बिलकुल सही कहा आपने....

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February 14, 2010 at 3:29 PM

न परखना कभी प्यारभरे दिल को
हर कदम पर साथ मेरा देना
अपना भी होगा खुशियों भरा आशियाना
बस सदा प्यार जगाये रखना
जब भी उमड़े प्यार दिल में
प्यारभरी इबारत लिख भेजना
शाम ढले तेरी याद का आना
आकर फिर दूर न जाना
............waah

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February 14, 2010 at 5:26 PM

शाम ढले तेरी याद का आना
आकर फिर दूर न जाना
बहुत खूब यही तो प्यार है अच्छी रचना के लिये बधाई

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February 14, 2010 at 6:38 PM

बहुत ही भावपूर्ण रचना है. एकदम दिल की गहराइयों से महसूस की हुई बातें, भावनाएँ उतर आयी हैं इस कविता में.

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February 14, 2010 at 6:49 PM

सीधे-सरल शब्दों में निश्छल अभिव्यक्ति पढ़कर मन प्रसन्न हुआ.

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February 14, 2010 at 7:38 PM

बहुत बढिया ..
हर तरन्नुम में मिली है तेरी आवाज मुझे,
इक ही नग़्मा सुनाता है हर इक साज मुझे
जो किसी को भी न चाहे उसे चाहना
उम्र भर अपनी मुहब्बत पे रहा नाज मुझे

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February 14, 2010 at 7:52 PM

जिंदगी में प्यार खुशनसीब वालों को ही नसीब होता है,
जो ज्यादा रुलाता है, वही दिल से सबसे करीब होता है.
Bilkul sahi kaha!

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February 15, 2010 at 12:38 PM

बहुत सुन्दर तरीके से आपने लिखा है प्रेम की मीठी भाषा को ...शुक्रिया

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February 15, 2010 at 6:18 PM

पूरी तरह प्यार को समर्पित रचना है।

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February 15, 2010 at 11:10 PM

बहुत ख़ूबसूरत और शानदार रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

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February 17, 2010 at 12:51 PM

बहुत सुन्दर प्रेमाभिव्यक्ति और हाँ उसका वर्णन व नज़ारा क्या बात है !!!!!!!!!!!!!!

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February 17, 2010 at 3:56 PM

Kavira jee...aap likhtin bahut pyarin hain....aapki profile padha kar aapke blog tak aaphuncha..bahdai..

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February 17, 2010 at 8:05 PM

DOBARA PADHNE PAR BHI UTNA HI ACHA LAGA JITNA PEHLI BAAR ME..
पूरी तरह प्यार को समर्पित रचना है।

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February 17, 2010 at 10:52 PM

kavita aapne apni yaad ko ,pyar ke anubhav ko kavyatmak banaya hai sahaj v saral sabdo se satvik prem ko jagaya hai ..apna bhi hoga aashiyana ,bus tum prem ko jagaye rekhna ...bahut hi gehri anubhuti se chanker hi aise sabd kehe jaa sakte hai ....aapka prem anokha v viral hai ..badhai ...

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March 3, 2010 at 3:45 PM

अनुभूतियाँ तो अच्छी हैं लेकिन इसे कविता का रूप देने के लिये कुछ प्रयास तो करना होगा ।

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