ख़ुशी लेकर होली आयी


है साथ रंगभरी सौगात ख़ुशी की लेकर होली आयी
देखो! गाँव-शहर मची धूम सबके मन रंग कितना भायी
आओ सद्भाव, एकता, प्रेम, समरसता के रंग घोलें
बना स्नेह कुण्ड भर पिचकारी बरस फुहार होली खेलें

.... कविता रावत

रंगों के पर्व होली की हार्दिक शुभकामनाएं


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February 27, 2010 at 2:04 PM

बहुत सुन्दर
होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ

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February 27, 2010 at 2:34 PM

होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ

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February 27, 2010 at 3:23 PM

"आओ सद्भाव, एकता, प्रेम, समरसता के रंग घोलें
बना स्नेह कुण्ड भर पिचकारी बरस फुहार होली खेलें"
होली "मंगल-मिलन" की हार्दिक शुभकामनाएं

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February 27, 2010 at 4:55 PM

आपको व आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनायें

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February 27, 2010 at 5:55 PM

....होली की हार्दिक शुभकामनाएं !!!

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February 27, 2010 at 6:06 PM

होली कि ढेर सारी सुबह शुभकामनाएं

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February 27, 2010 at 8:22 PM

बहुत सुन्दर
होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ

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February 28, 2010 at 6:40 PM

होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

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February 28, 2010 at 7:15 PM

होली के गीत गाओ री .... बहुत सुंदर रचना है होली के दिन .... रंगों की बहार छा रहो है .....
आपको और समस्त परिवार को होली की शुभ-कामनाएँ .....

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February 28, 2010 at 7:30 PM

कविता जी आपको व परिवार को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। कविता बहुत अच्छी लगी धन्यवाद

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February 28, 2010 at 9:43 PM

है साथ रंगभरी सौगात ख़ुशी की लेकर होली आयी
देखो! गाँव-शहर मची धूम सबके मन रंग कितना भायी
होली की शुभकानाएं!
आपके और आपके परिवार के लिए होली मंगलमय हो!

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February 28, 2010 at 11:54 PM

रंगों का त्योहार मुबारक हो।
खुशियों की फुहार मुबारक हो।

Rajiv Ojha

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March 1, 2010 at 12:29 AM

आपको और आपके परिवार को होली पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें!

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March 1, 2010 at 2:26 AM

आपको भी रंगपर्व की शुभकामनायें ।

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March 1, 2010 at 9:16 AM

रंगारंग उत्सव पर आपको हार्दिक शुभकामनायें !

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March 1, 2010 at 10:57 AM

होली का हर रंग दे, खुशियाँ कीर्ति समृद्धि.
मनोकामना पूर्ण हों, सद्भावों की वृद्धि..

स्वजनों-परिजन को मिले, हम सब का शुभ-स्नेह.
ज्यों की त्यों चादर रखें, हम हो सकें विदेह..

प्रकृति का मिलकर करें, हम मानव श्रृंगार.
दस दिश नवल बहार हो, कहीं न हो अंगार..

स्नेह-सौख्य-सद्भाव के, खूब लगायें रंग.
'सलिल' नहीं नफरत करे, जीवन को बदरंग..

जला होलिका को करें, पूजें हम इस रात.
रंग-गुलाल से खेलते, खुश हो देख प्रभात..

भाषा बोलें स्नेह की, जोड़ें मन के तार.
यही विरासत सनातन, सबको बाटें प्यार..

शब्दों का क्या? भाव ही, होते 'सलिल' प्रधान.
जो होली पर प्यार दे, सचमुच बहुत महान.

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sm
March 1, 2010 at 11:32 PM

happy holi
lets burn the bad customs of India with this holi

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