तनिक सी आहट











तनिक सी आहट होती
चौंक उठता आतुर मन
जैसे आ गए वे
जिसका रहता है
दिल को अक्सर
इन्तजार
हर बार
बार-बार
बार-बार.

वे दिल के करीब रहकर भी
कभी-कभी जाने क्यों?
दूर दूर नज़र आते हैं
अपनों के बीच रहकर
कभी-कभी जाने क्यों?
अजनबी से दिखते हैं
यह देख उठती दिल में
गहरी टीस
अति धारदार
हर बार
बार-बार
बार-बार.

गुजरे करीब से जब भी वे
तन-मन में सिहरन सी उठती है
थोड़ी सी निगाह पड़ी जब भी
सीधे दिल पर वार करती है
पागल मन बुनता सप्तरंगी सपने
भागता पीछे-पीछे
और फिर बहती प्रेमनद
बन अति तीव्रधार
हर बार
बार-बार
बार-बार.

-कविता रावत

SHARE THIS

Author:

Previous Post
Next Post
April 9, 2010 at 9:32 AM

naya rang liye ye rachana pyaree lagee............meethe se ahsaas kee chubhan jiye.........

Reply
avatar
April 9, 2010 at 9:48 AM

दिल के करीब रहकर भी
कभी-कभी जाने क्यों?
दूर दूर नज़र आते हैं
अपनों के बीच रहकर
कभी-कभी जाने क्यों?
अजनबी से दिखते हैं
....bahut sundar rachna.

Reply
avatar
April 9, 2010 at 10:33 AM

पागल मन बुनता सप्तरंगी सपने
भागता पीछे-पीछे
और फिर बहती प्रेमनद
बन अति तीव्रधार...
दिल के करीब रहकर दूर रहने वाले ....
अपनों के करीब रहकर अजनबी रहने वाले
यही तो है रिश्तों की मायानगरी ...
अच्छी कविता ...!!

Reply
avatar
April 9, 2010 at 10:48 AM

कविता सिर्फ महसूस की जा सकती है । इस कविता को मस्तिस्क से न पढ़कर बोध के स्तर पर पढ़ना जरूरी है।

Reply
avatar
April 9, 2010 at 11:04 AM

मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है....बहुत खूबसूरत रचना...बधाई

Reply
avatar
April 9, 2010 at 11:24 AM

गुजरे करीब से जब भी वे
तन-मन में सिहरन सी उठती है
थोड़ी सी निगाह पड़ी जब भी
सीधे दिल पर वार करती है
पागल मन बुनता सप्तरंगी सपने
अनछुए अहसास लिए हुए सुन्दर कविता

Reply
avatar
April 9, 2010 at 12:33 PM

तनिक सी आहट होती
चौंक उठता आतुर मन
जैसे आ गए वे
जिसका रहता है
दिल को अक्सर

,,,,,,,,अच्छी कविता ...!!

Reply
avatar
April 9, 2010 at 12:34 PM

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

Reply
avatar
April 9, 2010 at 1:27 PM

बहुत बढ़िया,
बड़ी खूबसूरती से कही अपनी बात आपने.....

कुंवर जी,

Reply
avatar
April 9, 2010 at 2:34 PM

सुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।

Reply
avatar
April 9, 2010 at 2:45 PM

अपनों के बीच रहकर
कभी-कभी जाने क्यों?
अजनबी से दिखते हैं
ye hui shaandaar rachna, shaandaar abhivyakti

Reply
avatar
April 9, 2010 at 2:51 PM

अच्छी रचना...बधाई

Reply
avatar
April 9, 2010 at 6:03 PM

मनोभावो को बखुबी बाँधा है।

Reply
avatar
April 10, 2010 at 2:01 PM

रिस्तों की उधेड़बुन ऐसी ही होती है ... कभी कुछ तो कभी कुछ ...
बहुत अच्छी अभिव्यक्ति है ...

Reply
avatar
April 10, 2010 at 6:15 PM

सुन्दर ,सरल शब्दों के माध्यम से गहन बात कह दी है ..ऐसी उलझन अक्सर सभी को होती होगी.

Reply
avatar
April 11, 2010 at 2:21 PM

...बहुत सुन्दर, प्रसंशनीय रचना!!!

Reply
avatar
April 12, 2010 at 1:04 PM

गुजरे करीब से जब भी वे
तन-मन में सिहरन सी उठती है
थोड़ी सी निगाह पड़ी जब भी
सीधे दिल पर वार करती है
पागल मन बुनता सप्तरंगी सपने
भागता पीछे-पीछे
और फिर बहती प्रेमनद
बन अति तीव्रधार
हर बार
बार-बार
बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

Reply
avatar
April 12, 2010 at 3:31 PM

kavita ji ,

bahut hi sanvedansheel rachna . man ke bheetar kahin chooti hui ... aur na jaane kitne saare shabdo ke ahsaas ko gunjan deti hui ....
aabhar aapka

vijay

Reply
avatar
April 12, 2010 at 7:31 PM

आपकी दोनों नई रचनाओं और ४-५ महीने पहले की रचनाओं में मुझे तो हर द्रष्टिकोण से बहुत ज्यादा फर्क नजर आ रहा है - हार्दिक शुभकामनाएं - keep it up.

Reply
avatar
April 12, 2010 at 8:22 PM

Komal bhavanaon kee bahut sundar aur sahaj prastuti---badhiya kavita----.

Reply
avatar
April 13, 2010 at 10:21 AM

कुछ अलग हठ कर है यह रचना, शुभकामनायें !

Reply
avatar
April 13, 2010 at 11:15 PM

वे दिल के करीब रहकर भी
कभी-कभी जाने क्यों?
दूर दूर नज़र आते हैं
अपनों के बीच रहकर
कभी-कभी जाने क्यों?
अजनबी से दिखते हैं
यह देख उठती दिल में
गहरी टीस
अति धारदार
हर बार
बार-बार
बार-बार.
ati uttam ,behad khoobsurat

Reply
avatar
April 14, 2010 at 3:50 PM

अलग सी शैली की रचना. कुछ कुछ ध्वन्यात्मक भी

Reply
avatar
April 15, 2010 at 9:19 AM

तनिक सी आहट होती
चौंक उठता आतुर मन
जैसे आ गए वे
जिसका रहता है
दिल को अक्सर
इन्तजार
हर बार
बार-बार
बार-बार.
Wo aaye?
Sadhuwad!

Reply
avatar