संगति का प्रभाव




















उच्च विचार जिनके साथ रहते हैं वे कभी अकेले नहीं रहते हैं
एक जैसे पंखों वाले पंछी एक साथ उड़ा करते हैं

हंस-हंस के साथ और बाज को बाज के साथ देखा जाता है
अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है

तीन से भीड़ और दो के मिलने से साथ बनता है
आदमी को उसकी संगति से पहचाना जाता है

बिगडैल साथ भली गाय चली को बराबर मार पड़ती है
साझे की हंडिया अक्सर चौराहे पर फूटती है

सूखी लकड़ी के साथ-साथ गीली भी जल जाती है
और गुलाबों के साथ-साथ काँटों की भी सिंचाई हो जाती है

हँसमुख साथ मिल जाय तो सुनसान रास्ता भी आराम से कट जाता है
अच्छा साथ मिल जाने पर कोई रास्ता लम्बा नहीं रह जाता है

शिकारी पक्षी कभी एक साथ मिलकर नहीं उड़ा करते हैं
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुर्राना सीख जाते हैं

 ..........कविता रावत

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May 15, 2010 at 8:00 AM

...सुन्दर रचना !!

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May 15, 2010 at 8:02 AM

अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है
क्या बात कही आपने एकदम सही
बहुत सुन्दर

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May 15, 2010 at 8:02 AM

sahi kaha kavita ji...sangat hi gun hot hai...sangat hi gun jaat...

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May 15, 2010 at 8:44 AM

बेहतरीन रचना ......

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May 15, 2010 at 9:18 AM

संसार रूपी कटु-वृक्ष के केवल दो फल ही अमृत के समान हैं ; पहला, सुभाषितों का रसास्वाद और दूसरा, अच्छे लोगों की संगति ।

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May 15, 2010 at 10:07 AM

सामयिक और सटीक रचना । आजकल ब्लागिंग में कुछ गड़बड़ हो रहा है ।

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May 15, 2010 at 12:13 PM

Kavita jee...........ye to updesh jaisa lag raha hai...:)

waise aap achchha likhte ho......no doubts...!

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May 15, 2010 at 12:51 PM

"अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है
गुलाबों के साथ-साथ काँटों की भी सिंचाई हो जाती है
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुराना सीख जाते हैं"

बहुत पसंद आये !

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May 15, 2010 at 2:36 PM

शायर,सि‍न्‍ह और सपूत एकले ही चलते हैं, झुण्‍ड में नहीं। उनकी संगति‍ वि‍रली ही होती है, वि‍रले के साथ।

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May 15, 2010 at 4:46 PM

बिगडैल साथ भली गाय चली को बराबर मार पड़ती है
साझे की हंडिया अक्सर चौराहे पर फूटती है
सूखी लकड़ी के साथ-साथ गीली भी जल जाती है
और गुलाबों के साथ-साथ काँटों की भी सिंचाई हो जाती है

sundar aur sarthak lekhan.

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May 15, 2010 at 6:02 PM

जाड्यं धियो हरति सिञ्चति वाचि सत्यं.......,
आपकी रचना प्रेरक एवँ उत्तम समाज की निधि है ।

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May 15, 2010 at 6:06 PM

अच्छी सीख देती रचना...बढ़िया है!

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May 15, 2010 at 6:21 PM

कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन
पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है- समीरलाल समीर। चुनाव अधिकारी थे ज्ञानदत्त पांडे। श्री पांडे पर काफी गंभीर आरोप लगे फलस्वरूप वे समीरलाल समीर को प्रमाण पत्र दिए बगैर अज्ञातवाश में चले गए हैं। अब श्रेष्ठ ब्लागरिन का चुनाव होना है। आपको पांच विकल्प दिए जा रहे हैं। कृपया अपनी पसन्द के हिसाब से इनका चयन करें। महिला वोटरों को सबसे पहले वोट डालने का अवसर मिलेगा। पुरूष वोटर भी अपने कीमती मत का उपयोग कर सकेंगे.
1-फिरदौस
2- रचना
3 वंदना
4. संगीता पुरी
5.अल्पना वर्मा
6 शैल मंजूषा

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May 15, 2010 at 6:22 PM

कौन है श्रेष्ठ ब्लागरिन
पुरूषों की कैटेगिरी में श्रेष्ठ ब्लागर का चयन हो चुका है। हालांकि अनूप शुक्ला पैनल यह मानने को तैयार ही नहीं था कि उनका सुपड़ा साफ हो चुका है लेकिन फिर भी देशभर के ब्लागरों ने एकमत से जिसे श्रेष्ठ ब्लागर घोषित किया है वह है- समीरलाल समीर। चुनाव अधिकारी थे ज्ञानदत्त पांडे। श्री पांडे पर काफी गंभीर आरोप लगे फलस्वरूप वे समीरलाल समीर को प्रमाण पत्र दिए बगैर अज्ञातवाश में चले गए हैं। अब श्रेष्ठ ब्लागरिन का चुनाव होना है। आपको पांच विकल्प दिए जा रहे हैं। कृपया अपनी पसन्द के हिसाब से इनका चयन करें। महिला वोटरों को सबसे पहले वोट डालने का अवसर मिलेगा। पुरूष वोटर भी अपने कीमती मत का उपयोग कर सकेंगे.
1-फिरदौस
2- रचना
3 वंदना
4. संगीता पुरी
5.अल्पना वर्मा
6 शैल मंजूषा

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May 15, 2010 at 6:44 PM

ग़ज़ल


आदमी आदमी को क्या देगा


जो भी देगा ख़ुदा देगा ।


मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है


क्या मेरे हक़ में फ़ैसला देगा ।


ज़िन्दगी को क़रीब से देखो


इसका चेहरा तुम्हें रूला देगा ।


हमसे पूछो दोस्त क्या सिला देगा


दुश्मनों का भी दिल हिला देगा ।


इश्क़ का ज़हर पी लिया ‘फ़ाक़िर‘


अब मसीहा भी क्या दवा देगा ।

http://vedquran.blogspot.com/2010/05/hell-n-heaven-in-holy-scriptures.html

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May 15, 2010 at 7:32 PM

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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May 16, 2010 at 1:53 AM

अच्छी प्रस्तुति है।

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May 16, 2010 at 7:25 AM

बहुत ही सुन्दर व लाजवाब प्रस्तुति ।

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May 16, 2010 at 9:43 AM

शिक्षाप्रद और बेहतरीन ....भाव .......बहुत खूब

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May 16, 2010 at 10:20 AM

बहुत ज्ञानवर्धक बातें ।
शुक्रिया कविता जी ।

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May 16, 2010 at 11:07 AM

साझे की हंडिया अक्सर चौराहे पर फूटती है
सूखी लकड़ी के साथ-साथ गीली भी जल जाती है
और गुलाबों के साथ-साथ काँटों की भी सिंचाई हो जाती है


संदेशात्मक रचना...सटीक

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May 16, 2010 at 10:45 PM

अच्छा उपयोगी संकलन, लयबद्ध बुद्धिमत्ता वचन।

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May 17, 2010 at 12:20 AM

वाह ! बहुत ही अच्छी लगी कविता खासकर ये लाइनें -
-अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है
-शिकारी पक्षी कभी एक साथ मिलकर नहीं उड़ा करते हैं
जो भेड़ियों की संगति में रहते हैं, वे गुराना सीख जाते हैं

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May 17, 2010 at 9:49 AM

अकेला आदमी या तो दरिंदा या फिर फ़रिश्ता होता है ....
achchi prastuti...ghyan vardhak post...

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May 17, 2010 at 10:55 PM

इसी लिए कहा है-
कबीरा संगत साधु की हरै और की ब्याधि.
संगत बुरी असाधु की आठों पहर उपाध

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May 18, 2010 at 3:28 AM

जो भेड़ियों की संगत में रहते हैं गुर्राना सीख जाते हैं.. पर ये भी है कि 'चन्दन विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग..' अच्छे भाव..

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May 18, 2010 at 6:19 PM

kavita ji bahut achchi prastuti haiaapki. kabile tareef

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May 19, 2010 at 12:01 PM

कोई अकेला कभी नही होता जो साथ मे है उसे देखने की फुर्सत किसको ?

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May 19, 2010 at 12:50 PM

कोई अकेला कभी नही होता जो साथ मे है उसे देखने की फुर्सत किसको ?

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May 19, 2010 at 2:41 PM

Uncha vichaar hi to insaan ki pahchaan hai ... achhe vichaar rakhne waon ka saath har koi chahta hai ....

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May 19, 2010 at 3:09 PM

bahut khub...atisundar

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May 19, 2010 at 11:31 PM

kavita ji mere blog 'gaurtalab'par aane ka bahut bahut shukriya!

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May 20, 2010 at 1:23 PM

आज तो बहुत कुछ कह डाला एक ही पोस्ट में, एक साफ़ सुथरा आईना दिखा गयी ये पोस्ट बधाई

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May 20, 2010 at 10:05 PM

-----------------------------------
mere blog par meri nayi kavita,
हाँ मुसलमान हूँ मैं.....
jaroor aayein...
aapki pratikriya ka intzaar rahega...
regards..
http://i555.blogspot.com/

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May 21, 2010 at 7:51 AM

bhty khoob.........kya khoob likhte ho...bda achha likhte ho...

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May 21, 2010 at 11:33 AM

बहुत सुन्दर सन्देश..सार्थक रचना..बधाई.

____________________________
'शब्द-शिखर' पर- ब्लागिंग का 'जलजला'..जरा सोचिये !!

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May 22, 2010 at 1:13 AM

बहुत ही सुन्दर और लाजवाब रचना! बधाई!

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May 28, 2010 at 5:39 AM

sone see kharee baate .....

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February 14, 2015 at 1:45 PM

Please aap is topic par muje ek निबंध likhkar bjejo skate ho.

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May 7, 2017 at 7:58 AM

जीवन की विसंगतियाँ और प्रेरक सूक्तियों को सहेजती प्रभावोत्पादक रचना जो कहती है संख्या का भी महत्त्व होता है।

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May 7, 2017 at 7:58 AM

जीवन की विसंगतियाँ और प्रेरक सूक्तियों को सहेजती प्रभावोत्पादक रचना जो कहती है संख्या का भी महत्त्व होता है।

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May 7, 2017 at 8:28 AM

अंतिम पंक्ति में एक शब्द "गुराना" प्रकाशित हुआ है। शायद यह प्रचलित शब्द "गुर्राना " का रूप है। यदि उचित हो तो संशोधन कीजियेगा।

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May 7, 2017 at 8:28 AM

अंतिम पंक्ति में एक शब्द "गुराना" प्रकाशित हुआ है। शायद यह प्रचलित शब्द "गुर्राना " का रूप है। यदि उचित हो तो संशोधन कीजियेगा।

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May 7, 2017 at 1:30 PM

जी सही कहा आपने प्रचलित शब्द गुर्राना ही है
धन्यवाद!

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