भाग्य कुछ भी दान नहीं; उधार देता है


गम का एक दिन हँसी-ख़ुशी के एक महीने से भी लम्बा होता है
दुःखी आदमी का समय हमेशा बहुत धीरे-धीरे बीतता है !

जो दर्द के मारे जागता रहे उसकी रात बहुत लम्बी होती है
हल्की व्यथा बताना सरल है पर गहरी व्यथा मूक रहती है!

बड़े-बड़े दुःख के आने पर आदमी छोटे-छोटे दुखों को भूल जाता है
पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है!

हँसी-ख़ुशी कभी टिक कर नहीं वह तो पंख लगाकर उड़ जाती है
सुखभरी मधुर घड़ियाँ बड़ी जल्दी-जल्दी बीत जाया करती है!

ऐसा कोई आदमी नहीं जो दुःख व रोग से अछूता रह पाता है
भाग्य हमें कुछ भी दान नहीं देता वह तो केवल उधार देता है!

.....कविता रावत


SHARE THIS

Author:

Previous Post
Next Post
September 18, 2010 at 9:19 AM

"पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है!"

बहुत सटीक बात कही कविता जी !

Reply
avatar
September 18, 2010 at 9:21 AM

जो दर्द के मारे जागता रहे उसकी रात बहुत लम्बी होती है
हल्की व्यथा बताना सरल है पर गहरी व्यथा मूक रहती है!
बिलकुल सही कहा।
भाग्य हमें कुछ भी दान नहीं देता वह तो केवल उधार देता है!

हाँ क्यों कि मनुष्य अपने कर्मों का फल ही भोगता है। जो बीजोगे वही तो काटोगे! सुन्दर रचना बधाई।

Reply
avatar
September 18, 2010 at 10:08 AM

kavita ji bahut door tak aap ki soch hai.
rachana sunder hai,

Reply
avatar
September 18, 2010 at 10:20 AM

bahut hi sundar rachna.....
2-3 lines to bahut hi behtareen hain....
पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है!
waah.....
aabhaar...
http://i555.blogspot.com/

Reply
avatar
September 18, 2010 at 10:35 AM

पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है!
सुन्दर रचना बधाई।

Reply
avatar
September 18, 2010 at 11:11 AM

जो दर्द के मारे जागता रहे उसकी रात बहुत लम्बी होती है
हल्की व्यथा बताना सरल है पर गहरी व्यथा मूक रहती है!

Bilkul manki baat kah dee..dard kee ghadiyan bitaye nahi beetteen..

Reply
avatar
September 18, 2010 at 11:35 AM

सच कविता जीं!
ज्योतिष के नज़रिये से भी देखा जाये तो भाग्य कुछ अप्रत्याशित नहीं है वरन हमारे संचित कर्म ही इस जन्म का भाग्य हैं!

प्रबन्धन की दृष्टि से देखें तो "ज़ीरो सम थ्योरी" है या डबल एंट्री सिस्टम, डेबिट और क्रेडिट !


जीवन क्या है? चलता फिरता एक खिलोना है।
दो आंखों में एक से हसंना, एक से रोना है।

Reply
avatar
September 18, 2010 at 1:59 PM

pahle se bhinga aadmi barish ko mahsoos nahi karta.......:)

pyari aur prabhavshali rachna.!!

Reply
avatar
September 18, 2010 at 2:28 PM

bahut achhi kavita .... hirday ko chhu de ne wali aur jindagi ka pratibimb dekhane wali hai.

Reply
avatar
September 18, 2010 at 3:25 PM

सच तो यह है कि यह हमारा जीवन ही उधार का है।

Reply
avatar
September 18, 2010 at 6:07 PM

कितनी ग़ज़ब की कविता लिखी है आपने....कमाल कर दिया...

Reply
avatar
September 19, 2010 at 12:37 AM

ऐसा कोई आदमी नहीं जो दुःख व रोग से अछूता रह पाता है
भाग्य हमें कुछ भी दान नहीं देता वह तो केवल उधार देता है!
----कविता जी, आपकी रचना का हर शब्द आज के यथार्थ को बयान कर रहा है।सुन्दर रचना।

Reply
avatar
September 19, 2010 at 6:31 AM

बड़े-बड़े दुःख के आने पर आदमी छोटे-छोटे दुखों को भूल जाता है
पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है!


-वाह! बहुत उम्दा!

Reply
avatar
September 19, 2010 at 6:48 AM

जो दर्द के मारे जागता रहे उसकी रात बहुत लम्बी होती है...
एक एक पंक्ति सच कह रही है ...
दर्द का दर्द ना महसूस करने की बात करना सरल है , दर्द वही जानता है जो दर्द में जीता है ...!

Reply
avatar
September 19, 2010 at 9:33 AM

कमाल की रचना पेश की है...
हर पंक्ति कितना बड़ा संदेश दे रही है...वाह

Reply
avatar
September 19, 2010 at 11:50 AM

बड़े-बड़े दुःख के आने पर आदमी छोटे-छोटे दुखों को भूल जाता है
पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है! ..

बहुत खूब ... लाजवाब अंदाज़ है बात कहने का .... बहुत उम्दा ...

Reply
avatar
September 19, 2010 at 3:03 PM

पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है!
क्या बात है!

Reply
avatar
September 19, 2010 at 3:18 PM

---------------------------------
मेरे ब्लॉग पर इस मौसम में भी पतझड़ ..
जरूर आएँ...

Reply
avatar
September 19, 2010 at 9:09 PM

दुःखी आदमी का समय हमेशा बहुत धीरे-धीरे बीतता है !
..धीरे-धीरे, दुःखी-दुःखी।

Reply
avatar
September 19, 2010 at 10:20 PM

क्या कहूँ इस पर इतनी गहरी और गूढ़ बात है जितना डूबो और अन्दर खींचती है बस एक शब्द है लाजवाब

Reply
avatar
September 20, 2010 at 12:22 AM

बड़े-बड़े दुःख के आने पर आदमी छोटे-छोटे दुखों को भूल जाता है
पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है!

सच कहा..सभी अनुभव सच हैं.सुंदर अभिव्यक्ति.

Reply
avatar
September 20, 2010 at 1:30 AM

सैधांतिक रूप से तो मैं यह कहूंगा कि भाग्य होता नही है इसलिये वह कुछ देता भी नही है .लेकिन उससे यह शिकायत तो की ही जा सकती है ।

Reply
avatar
September 21, 2010 at 12:56 PM

हँसी-ख़ुशी कभी टिक कर नहीं वह तो पंख लगाकर उड़ जाती है
सुखभरी मधुर घड़ियाँ बड़ी जल्दी-जल्दी बीत जाया करती है!
.....लाजवाब अभिव्यक्ति.

Reply
avatar
September 21, 2010 at 1:23 PM

ऐसा कोई आदमी नहीं जो दुःख व रोग से अछूता रह पाता है
भाग्य हमें कुछ भी दान नहीं देता वह तो केवल उधार देता है!
.... ..गूढ़ अभिव्यक्ति....लाजवाब रचना बधाई।

Reply
avatar
September 22, 2010 at 12:26 AM

सच कहा आपने कविताजी. ऐसा शायद कोई भी नहीं होगा. हा किसी को कम तो किसी को जादा दुःख झेलने पड़ते है. बहुत ही भावपूर्व कविता है.

Reply
avatar
September 22, 2010 at 9:04 AM

bahut aacha kavita ji. gam se koi achuta nahi rahta isley ye bhavatmac rachna bahut achche lage.

Reply
avatar
September 22, 2010 at 11:45 AM

bahut achhi rachna hai kavita ji.... bhavpooran baaten ukeri hain aaapne.... sachmuch zindgi kabhi kabhi udhar ki hi lagati hai....

Reply
avatar
September 22, 2010 at 6:13 PM

जो दर्द के मारे जागता रहे उसकी रात बहुत लम्बी होती है
हल्की व्यथा बताना सरल है पर गहरी व्यथा मूक रहती है!
...बिलकुल सही कहा

Reply
avatar
September 22, 2010 at 6:23 PM

ये दिन काटने बहुत कठिन होते हैं... हम साथ रहें तो सुकून जरुर मिलेगा | किसी ने लिखा है ; "ये दिन भी चला जाएगा |"

Reply
avatar
September 23, 2010 at 4:14 AM

gahre ahsaas liye dukh kee vytha ko shavd detee bahut hee jeevan ko kareeb se dekhatee pyaree rachana.

Reply
avatar
September 24, 2010 at 2:35 PM

जो दर्द के मारे जागता रहे उसकी रात बहुत लम्बी होती है
हल्की व्यथा बताना सरल है पर गहरी व्यथा मूक रहती है!
बड़े-बड़े दुःख के आने पर आदमी छोटे-छोटे दुखों को भूल जाता है
पहले से भीगा हुआ आदमी वारिश को महसूस नहीं करता है!
...कमाल की रचना

Reply
avatar
September 24, 2010 at 6:41 PM

ओह अंतर्मन से गहरे जुड़ते उदगार .....

Reply
avatar
September 24, 2010 at 6:51 PM

ऐसा कोई आदमी नहीं जो दुःख व रोग से अछूता रह पाता है
भाग्य हमें कुछ भी दान नहीं देता वह तो केवल उधार देता है!

Sach main is puri prastuti ka ek ek alfaj bahut napa tula hai, har shabad main puri gunjayash hai ehsaas ki.
Sundar prastuti ke liye hardik Badhai......!

Reply
avatar
September 25, 2010 at 2:01 PM

गम का एक दिन हँसी-ख़ुशी के एक महीने से भी लम्बा होता है
दुःखी आदमी का समय हमेशा बहुत धीरे-धीरे बीतता है !
वाह आप ने तो पुरा जीवन ही इस रचना मै पिरो दिया, धन्यवाद

Reply
avatar
September 25, 2010 at 9:37 PM

जिंदगी के यथार्थ से रूबरू कराती सुन्दर पंक्तियाँ। शायद इसीलिए कहा गया है-- " ये जीवन , इस जीवन का, यही है रंग रूप ..."

Reply
avatar
November 15, 2010 at 4:11 AM

It was Really Nice I m Also from UTTRANCHAL But from Childhood im in USA ..........plz Add me as your Friend at hrm.mahiairtel@gmail.com

Reply
avatar