संघर्ष की सुखद अनुभूति

आशा और निराशा के बीच
झूलते-डूबते-उतराते
घोर निराशा के क्षण में भी
अविरल भाव से लक्ष्य प्राप्ति हेतु
आशावान बने रहना
बहुत मुश्किल पर नामुमकिन नही
होता है इसका अहसास
सफलता की सीढ़ी-दर-सीढ़ी
चढ़ने के उपरांत
चिर प्रतीक्षा चिर संघर्ष के बाद
मिलने वाली हर ख़ुशी
बेजोड़ व अनमोल है
क्योंकि इसकी सुखद अनुभूति
वही महसूस कर सकता है
जिसने हर हाल में रहकर
अपना सघर्ष जारी रखकर
कोशिश की सबको साथ लेकर
निरंतर बने रहने की
कभी भाग्य के भरोसे नहीं बैठे
लगे रहे कर्म अपना मानकर
और सफलता के मुकाम पर पहुचे
सगर्व, सम्मान
तभी तो कहा जाता है
आदमी अपने भाग्य से नहीं
अपने कर्म से महान होता है
छोटी-छोटी लड़ाईयां जीतने के बाद ही
कोई बड़ी जंग जीतता है

               .....कविता रावत


SHARE THIS

Author:

Previous Post
Next Post
October 4, 2010 at 11:49 AM

आदमी अपने भाग्य से नहीं
अपने कर्म से महान होता है
छोटी-छोटी लड़ाईयां जीतने के बाद ही
कोई बड़ी जंग जीतता है

बहुत सटीक बात ...सुन्दर अभिव्यक्ति

Reply
avatar
October 4, 2010 at 11:54 AM

चढ़ने के उपरांत
चिर प्रतीक्षा चिर संघर्ष के बाद
मिलने वाली हर ख़ुशी
बेजोड़ व अनमोल है...

An absolute truth !

.

Reply
avatar
October 4, 2010 at 12:04 PM

bahut hi khubsurat kavita...
aisi hi kuch kavita maine aaj se kareeb 8 saal pehle likhi thi jaldi hi dubara post karunga.. lekin filhaal...
मेरे ब्लॉग पर इस बार ....
क्या बांटना चाहेंगे हमसे आपकी रचनायें...
अपनी टिप्पणी ज़रूर दें...
http://i555.blogspot.com/2010/10/blog-post_04.html

Reply
avatar
October 4, 2010 at 12:05 PM

कभी भाग्य के भरोसे नहीं बैठे
लगे रहे कर्म अपना मानकर
और सफलता के मुकाम पर पहुचे
सगर्व, सम्मान
तभी तो कहा जाता है
आदमी अपने भाग्य से नहीं
अपने कर्म से महान होता है

bahut sahee baat.......

kahavat hai na maihnat ka ful meetha........
sarthak post.

Reply
avatar
October 4, 2010 at 12:10 PM

aasha hi to jiwan hai , nirasha maut ka dusara nam hai jiwan aur maut ka khel hr jiwan me hr pal chal raha hai
arganikbhagyoday.blogspot.com

Reply
avatar
October 4, 2010 at 3:21 PM

आशाओं के पहलु में है नई सुबह की रोशनी

Reply
avatar
October 4, 2010 at 5:51 PM

चिर प्रतीक्षा चिर संघर्ष के बाद
मिलने वाली हर ख़ुशी
बेजोड़ व अनमोल है
क्योंकि इसकी सुखद अनुभूति
वही महसूस कर सकता है
जिसने हर हाल में रहकर
अपना सघर्ष जारी रखकर
कोशिश की सबको साथ लेकर
......सकारात्मक भाव से रची सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए आभार

Reply
avatar
October 4, 2010 at 6:23 PM

बहुत सुन्दर आशावादी रचना है ...
इंसान जबतक लढाई के मैदान मैं नहीं उतरेगा, जीतेगा कैसे ...

Reply
avatar
October 4, 2010 at 7:09 PM

चिर प्रतीक्षा चिर संघर्ष के बाद
मिलने वाली हर ख़ुशी
बेजोड़ व अनमोल है
.....लम्बे संघर्ष की बाद मिलने वाली ख़ुशी का सच में कोई जवाब नहीं ...
...मन को छू गयी आपकी कविता ..
आपकी इस सुन्दर भावों से सजी कविता के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

Reply
avatar
October 4, 2010 at 7:21 PM

आदमी अपने भाग्य से नहीं
अपने कर्म से महान होता है

रचना के माध्यम से सटीक बात कहीं ..उम्दा प्रस्तुति...

Reply
avatar
October 4, 2010 at 7:26 PM

बहुत सुन्दर प्रस्तुति। धन्यवाद

Reply
avatar
October 4, 2010 at 7:53 PM

छोटी-छोटी लड़ाईयां जीतने के बाद ही
कोई बड़ी जंग जीतता है

बहुत ही गूढ़ बात कही है...एक सार्थक कविता

Reply
avatar
October 4, 2010 at 8:11 PM

तभी तो कहा जाता है
आदमी अपने भाग्य से नहीं
अपने कर्म से महान होता है
छोटी-छोटी लड़ाईयां जीतने के बाद ही
कोई बड़ी जंग जीतता है

Bahut sahi kaha aapne! Kabhi,kabhi aisabhi hota hai,ki,himmat toot jatee hai!

Reply
avatar
October 4, 2010 at 10:47 PM

अविरल भाव से लक्ष्य प्राप्ति हेतु
आशावान बने रहना
बहुत मुश्किल पर नामुमकिन नही
Kavita ji
puri ki puri kavita jindgi main aasha ka sanchaar karti hai
Sunder abhivyakti

Reply
avatar
October 4, 2010 at 11:22 PM

कविता जी, यह तो अद्भुत दर्शन है...एक प्रेरणा देती कविता!!

Reply
avatar
October 5, 2010 at 7:48 AM

प्रेरक, अशावादी दृष्टिकोण।

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
योगदान!, सत्येन्द्र झा की लघुकथा, “मनोज” पर, पढिए!

Reply
avatar
October 5, 2010 at 1:57 PM

आदमी अपने भाग्य से नहीं
अपने कर्म से महान होता है।
छोटी-छोटी लड़ाइयां जीतने के बाद ही
कोई बड़ा जंग जीतता है।

आपने अपने विचारों को सुंदर शब्दों में पिरोकर कविता का रूप दिया है।

प्रेरक पंक्तियां...बधाई

Reply
avatar
October 5, 2010 at 4:55 PM

......चिर प्रतीक्षा चिर संघर्ष के बाद
मिलने वाली हर ख़ुशी
बेजोड़ व अनमोल है........
सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए आभार.

Reply
avatar
October 5, 2010 at 6:31 PM

सकारात्मक भाव से रची सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए आभार

Reply
avatar
October 5, 2010 at 8:38 PM

बहुत अच्छी कविता है।
पढकर बहुत अच्छा लगा
हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

मालीगांव
साया
लक्ष्य

Reply
avatar
October 5, 2010 at 9:35 PM

यह बात तो बिल्कुल सत्य है कि कर्म से ही आदमी को सफलता मिलती है ’’दैव दैव आलसी पुकारा ’’ यह भी बहुत अच्छा लिखा है कि सफलता के मुकाम पर पहुंचने वाले भाग्य के भरोसे बैठ कर नहीं रहे । डेलकारनेगी ने भी सफलता के तीन सूत्र तीन शव्दो में बतलाये हैं 1.हार्ड वर्क 2.हार्ड वर्क और 3 हार्ड वर्क । बहुत ही अच्छा लिखा है आपने ।

Reply
avatar
October 5, 2010 at 11:39 PM

संघर्ष

मैंने कहा था ना इस संघर्ष को lekar मैं भी आऊंगा मैं आ गया .. हाँ यह कविता बहुत पुरानी है....

Reply
avatar
October 6, 2010 at 2:05 AM

jeevan ki sachhi aur vyvharik raah sujhati rachana........

Reply
avatar
October 6, 2010 at 10:33 AM

निराशा के महासागर में दुबकी लगा कर आशा रुपी मोती निकाल लेना ... ये ही सही मायने में जीवन है ...

बहुत खूबसूरत पोस्ट ... शुभकामनाएं

Reply
avatar
October 6, 2010 at 11:09 AM

सटीक बात ..........
कर्म से ही मिलती है आदमी को सफलता !!!

Reply
avatar
October 6, 2010 at 11:34 AM

आदमी अपने भाग्य से नहीं
अपने कर्म से महान होता है
छोटी-छोटी लड़ाईयां जीतने के बाद ही
कोई बड़ी जंग जीतता है
... बहुत अच्छी रचना है.

Reply
avatar
October 6, 2010 at 1:56 PM

bhut hi aashavadi drishtikon .dte rhiyega .aisi rchnao se urja milti hai .
thanks .

Reply
avatar
October 6, 2010 at 2:39 PM

अभिव्‍यक्ति अच्‍छी लगी। सधी हुई।

Reply
avatar
October 6, 2010 at 2:59 PM

बड़ी अच्छी और सच्ची बात आप ने अपनी इस रचना में कही है.
उन बातों से मैं पूरी तरह सहमत हूँ. कर्म ही सफलता की कुंजी है.
इस सार्थक प्रस्तुति के लिए आभार .....

Reply
avatar
October 6, 2010 at 7:26 PM

चढ़ने के उपरांत
चिर प्रतीक्षा चिर संघर्ष के बाद
मिलने वाली हर ख़ुशी
बेजोड़ व अनमोल है...
.......सधी हुई सार्थक अभिव्‍यक्ति आभार .....

Reply
avatar
October 6, 2010 at 10:07 PM

आपकी कविता की धार बढ़ती जा रही है । यह अच्छी रचना है । कहीं कहीं कुछ पंक्तियाँ सपाट गद्य सी लगती हैं उन पर थोड़ा काम कीजिये ।

Reply
avatar
October 7, 2010 at 5:44 AM

संघर्ष के बाद सफलता की खुशी कुछ ज्यादा ही मीठी होती है ।

Reply
avatar
October 7, 2010 at 7:02 AM

नहीं सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः -अच्छी रचना !

Reply
avatar
October 7, 2010 at 7:47 AM

बहुत सटीक रचना....बेहतरीन.

Reply
avatar
October 7, 2010 at 9:02 AM

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

Reply
avatar
October 7, 2010 at 11:31 AM

आदमी अपने भाग्य से नहीं
अपने कर्म से महान होता है
छोटी-छोटी लड़ाईयां जीतने के बाद ही
कोई बड़ी जंग जीतता है

....बहुत कुछ कह जाती हैं. सुन्दर सन्देश भी ..बधाई.


__________________________
"शब्द-शिखर' पर जयंती पर दुर्गा भाभी का पुनीत स्मरण...

Reply
avatar
October 10, 2010 at 2:30 PM

सटीक बात!!!
"हर शाम एक उम्मीद जगती है
हर रत एक सपना देखा जाता है
यूँ ही एक नउम्मीद साँझ रात के बाद
महफूज़ सी सुबह निकलती है "

Reply
avatar