इससे पहले कि कोई

इससे पहले कि कोई
आप, तुम से तू पर आता हुआ
दिल बहलाने की चीज़ समझ बैठे
संभल जाना
इससे पहले कि कोई
मीठी बातों में उलझा कर
गलत राह पर मजबूर करने लगे
समझ जाना
इससे पहले कि कोई
घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना
इससे पहले कि कोई
अपमानित होने के क्षण आएं
सबका मान रखना
इससे पहले कि हर कोई
कतरा के चलने लगे
इतरा के न चलना
इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना
इससे पहले कि दुनिया में
कहीं बदनाम हो जाएं
अपने नाम का मान रखना
इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना

               ..कविता रावत

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November 23, 2010 at 10:22 AM

इससे पहले कि दुनिया में
कहीं बदनाम हो जाएं
अपने नाम का मान रखना
इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना

बेहतरीन...... इतनी सटीक और प्रासंगिक प्रस्तुति ..... बहुत खूब रचना बहुत अच्छी लगी कविता जी ...

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November 23, 2010 at 10:22 AM

कविता जी
नमस्कार !
आपकी कविता पढ़कर मन अभिभूत हो गया ,
शब्द नहीं हैं इनकी तारीफ के लिए मेरे पास.........बहुत सुन्दर

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November 23, 2010 at 10:24 AM

घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना
इससे पहले कि कोई
अपमानित होने के क्षण आएं
सबका मान रखना
इससे पहले कि हर कोई
....प्रासंगिक प्रस्तुति गहरी बात कह दी आपने।

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November 23, 2010 at 10:50 AM

इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना
कविता जी
बेहद प्रभावशाली रचना है जीवन से जुडी हुई...हर एक लफ्ज सन्देश से भरा है ..उस पर प्रस्तुतीकरण ..क्या गजब है ...शुक्रिया

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Anonymous
November 23, 2010 at 11:39 AM

hr kadam pr upyogi sandesh deti uprokt rachna hetu abhaar.......bloging ka ek alag hi andaaz hai aapka isey banaye rakhiyega.
shubhkaamnayen........

(P.S.Bhakuni)

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November 23, 2010 at 12:53 PM

इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना...

बहुत खूब .. सजग प्रहरी की तरह है आज की रचना ... हर कदम पर सतर्क रहना ही जीवन है ...
कुछ गहरे एहसास भी हैं इस रचना में ...

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November 23, 2010 at 3:55 PM

सुन्दर ! समय रहते संभलना चाहिए ! बाद में पछताने से क्या होगा !

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November 23, 2010 at 4:53 PM

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना

बेहद प्रभावशाली और प्रासंगिक रचना।

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November 23, 2010 at 4:54 PM

कविता जी!
इससे पहले कि हर कोई
कतरा के चलने लगे
इतरा के न चलना
इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना
...................हिन्दी काव्य क्षेत्र में आपकी यह क्रांतिकारी प्रयोगवादी बेजोड़ रचना प्रचलित दुरूहवाद से उभरकर आपकी एक अलग पहचान बनाने में सक्षम है ....
कुछ हटकर सर्व हितार्थ अनूठी रचनाएँ आपके ब्लॉग पर पढने को मिलती है, जो मन में एक गहरी पैठ बनाती चली जाती है..... आपकी हर रचना का इंतज़ार रहता है......
इस अनुपम प्रयोगवादी रचना के लिए बहुत बहुत आभार ....शुभकामना .........

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November 23, 2010 at 5:57 PM

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना
...सटीक,प्रभावशाली प्रासंगिक प्रस्तुति

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November 23, 2010 at 6:30 PM

इससे पहले कि कोई
आप, तुम से तू पर आता हुआ
दिल बहलाने की चीज़ समझ बैठे
संभल जाना
इससे पहले कि कोई
मीठी बातों में उलझा कर
गलत राह पर मजबूर करने लगे
समझ जाना...
जीवन से जुडी बेहद प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण .... इस रचना में कुछ गहरे एहसास भी हैं ....शुक्रिया

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November 23, 2010 at 6:30 PM

बहुत ही सही कहा आपने....

कल्याणकारी बातें अति सुन्दर ढंग से समझा दी आपने...

बहुत ही सुन्दर रचना..

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November 23, 2010 at 6:46 PM

Kavita ji
kya kahu main,itni sundar prerana daayak rachna,hame apni zindagi main in sabhi baato ka dhyaan rakhna hain.
itni khubsurat prastuti hum tak pahuchane ke liye aapka shukriya.

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November 23, 2010 at 7:37 PM

कविता जी! सावधान करने का शुक्रिया!!जीवन का लगभग सारा ज्ञान समेट दिया आपने!!

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November 23, 2010 at 8:05 PM

वाह!!कविता जी,
सावधानियों का कव्यमय लक्षण-शास्त्र!!

क्या…खूब्।

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November 23, 2010 at 8:51 PM

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
कविता बहुत सुन्दर सार्थक सन्देश देती रचना है। बधाई।

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November 23, 2010 at 11:20 PM

कविता जी, इस सुन्दर और प्रेरणादायक प्रस्तुति के लिए आभार.

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November 24, 2010 at 5:09 AM

कविता, विचार, सलाह जो भी नाम दीजिये, है सार्थक!

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November 24, 2010 at 7:01 AM

बहुत ख़ूबसूरत और लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बेहतरीन प्रस्तुती !

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November 24, 2010 at 5:28 PM

इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
..कुछ हटकर अनूठी प्रेरणादायक प्रस्तुति के लिए आभार.

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November 24, 2010 at 5:33 PM This comment has been removed by the author.
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November 24, 2010 at 5:36 PM

घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना
....हर एक लफ्ज सन्देश से भरा है ..उस पर प्रस्तुतीकरण ..क्या गजब है

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November 24, 2010 at 6:30 PM

mere pas shbad nhi hai kahne ko
bahut sunder
or blog m aane ko aabhar aapse anurodh h k yuhi margdarsan karte rahiye
dhanyvad

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November 24, 2010 at 10:41 PM

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना


kavita ji bahoot hi sunder sheekh ke sath sunder kavita.....

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November 25, 2010 at 12:09 AM

बहुत खूब कविता जी ... वक़्त रहते संभल जाना बेहद ज़रूरी है ...

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November 25, 2010 at 3:15 PM

इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना

लाजवाब अनुपम कविता के लिए धन्यवाद .... आपका ब्लॉग पढ़ना एक नया अनुभव है.... विविधता से भरा आपके ब्लॉग की रचनाएँ, आलेख ब्लॉग्गिंग के उद्देश्य को साकार करती है .....बहुत बहुत आभार आपका...

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November 25, 2010 at 5:57 PM

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना
Kavita ji! behatreen abhivyakti laajawab andaanj mein... kya kahne!!
yun hi sundar rachnayen post karna...

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November 25, 2010 at 6:09 PM

आपकी सीख याद रखूँगा|

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November 26, 2010 at 4:21 PM

इससे पहले कि कोई
घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना

जीवन सीख की नायाब प्रस्तुति ....
बेहतरीन रचना

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November 26, 2010 at 5:42 PM

घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे

यथार्थ को प्रस्तुत करती कविता.

किसी तकनीकी कारण से आप का ब्लॉग मेरे कम्प्यूटर पर नहीं खुल रहा था.देर से आने के लिए क्षमा कीजियेगा और साथ ही शुक्रिया भी फेसबुक पर जुड़ने के लिए.

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November 26, 2010 at 7:25 PM

इससे पहले कि हर कोई
कतरा के चलने लगे
इतरा के न चलना
इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना
इससे पहले कि कोई
नफरत भरी निगाहों से देखे
प्यार में संभल कर चलना

फेसबुक में आपका ब्लॉग लिंक देखा तो सोचा चलो ब्लॉग की सैर कर ली जाये .. यहाँ आकर स्तब्ध हूँ ... ..सच में आप अपने नाम की साकार प्रतिमूर्ति हो... बहुत अच्छी सीख वाली कविता पढ़ी ...हमेशा याद रखूँगा और ब्लॉग पर नयी रचना जरुर पढूंगा ......

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November 26, 2010 at 7:50 PM

...कुछ गहरे एहसास भी हैं इस रचना में ...
मेरी मंजिल.......संजय भास्कर
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है..........कविता जी
धन्यवाद

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November 26, 2010 at 8:21 PM

I really lack words to appreciate and express myself truly. really wonderful and very inspiring and ethically awesome.
May you be blessed in all your missions!

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November 27, 2010 at 9:24 AM

खलील जिब्रान पर आपकी टिप्पणी का तहे दिल से शुक्रिया....उम्मीद है आगे भी आप ऐसे ही हौसलाफजाई करते रहेंगे|

बहुत सुन्दर कविता है आपकी इससे पहल की जिंदगी की शाम हो जाये की तर्ज़ पर...... बहुत खूब....... एक नसीहत देती पोस्ट ....शुभकामनाये|

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November 27, 2010 at 11:29 AM

बिल्कुल सही कहा आपने...
बहुत सी बातें मुझे कटाक्ष लगी, न जाने थी या नहीं... जैसे कतरा कर चलना इतराने की जगह... यूँही और ही हैं... आजकल हम दर कर हर काम करते हैं कि कहीं गलत न हो जाए..

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November 27, 2010 at 4:31 PM

इससे पहले कि हर कोई
कतरा के चलने लगे
इतरा के न चलना
इससे पहले कि भीड़ में बनो
अपनी कोई अलग
पहचान बनाए रखना

excellent creation....

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November 27, 2010 at 5:04 PM

मौलिक कविता है। हमारा वश स्वयं पर ही है। अपनी मर्यादा न भूलें और यथासंभव दूसरों की मर्यादा का भी ध्यान रखें,इससे अधिक न कुछ हो सकता है,न अपेक्षित है। बाक़ी बात प्रारब्ध पर।

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November 27, 2010 at 6:02 PM

.

सावधान करती हुई प्रेरणादायक प्रस्तुति के लिए आभार ।

.

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November 27, 2010 at 9:50 PM

बेहतरीन। शिक्षाप्रद बातें । खासतौर पर बच्चे बच्चियों के लिये । उन्हे भी जो सीधे साधे है

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November 28, 2010 at 9:41 AM

इससे पहले कि अपनी ही
नज़रों में गिर जाएं
कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना...

behtreen...

facebook mein friends request accept karne ke liya dhanyavaad...
bahut hi sundar hai aapka blog... bahut see kavityen padhi... man mein gahree utarti hain... yun hi likhti rahen yahi shubhkamna hai..

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November 28, 2010 at 4:44 PM

"कदम संभाल कर रखना
इससे पहले कि कोई
मंजिल की राह से भटका दे
आंखे खुली रखना"

जीवन में संभलकर चलते हुए रहने का काव्यात्मक सुन्दर संकेत

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November 28, 2010 at 11:24 PM

हर एक बात खरी कितनी सीधी सच्ची खरी और बातें सही मार्ग दर्शन करती हुई बेहतरीन पोस्ट

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November 29, 2010 at 2:49 PM

इससे पहले कि कोई
घर में घुसकर
अपनों में फूट डालने लगे
भांप जाना
इससे पहले कि किसी की कोई
बात चुभने लगे
बातों पर अपनी ध्यान देना

.....सावधान करती हुई प्रेरणादायक प्रस्तुति पढ़कर मन अभिभूत हो गया ,
बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आभार

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November 29, 2010 at 9:10 PM

पहली तीन लाइनें ही गज़ब हैं कविता जी !
बढ़िया चेतावनी दी है इस रचना में ...हकीकत में जो खतरे है उन्हें आगाह करने के लिए आभार !

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November 29, 2010 at 10:40 PM

आपने बहुत ही सुन्दर रचना की तथा साथ ही शिक्षा भी दी. आभार

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November 30, 2010 at 10:43 AM

नमस्कार जी! बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...

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December 8, 2010 at 1:12 AM

jindagi main ye ehtiyaat bartne chahiye.....
lekin hum aksar bhool jaate hain aur pachtate hai..
yaad rakhne wali hidaayten...
shukriya !!!

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