धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं

जीत और हार के बीच
झूलते, डूबते-उतराते
विपरीत क्षण में भी
अविचल, अविरल भाव से
लक्ष्य प्राप्ति हेतु
आशावान बने रहना बहुत मुश्किल
पर नामुमकिन नहीं
होता है इसका अहसास
सफलता की सीढ़ी-दर- सीढ़ी
चढ़ने के उपरान्त
चिर प्रतीक्षा
चिर संघर्ष के बाद
मिलने वाली हर  ख़ुशी
बेजोड़ व अनमोल होती है
इसकी सुखद अनुभूति
वही महसूस कर पाते हैं
जो हर हाल में निरंतर
सबको साथ लेकर लक्ष्य प्राप्ति हेतु
हरक्षण संघर्षरत रहते हैं
और मुकाम हासिल कर ही
दम लेते हैं सगर्व, सम्मान 
जिसके वे हक़दार होते हैं
अनुकूल मौसम में तो हर कोई नाव चला सकते  हैं
पर तूफां में कश्ती पार लगाने वाले विरले ही होते हैं
कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां एक दिन चैंपियन बनते हैं
                                  ...कविता रावत



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April 3, 2011 at 11:01 AM

वर्ड कप और नवसंवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएँ| धन्यवाद|

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April 3, 2011 at 11:18 AM

कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं ...

सटीक पंक्तियां...
भारत के विजय की बधाई.

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April 3, 2011 at 12:03 PM

bahut sahee baat aur samyik rachana ke liye badhaee.......
sach drad sankalp ke aage kuch bhee asambhav nahee.......
sabko sath lekar chalna aur apanee been nahee bajana.......sabhee me aatm bal ka sanchar karta hai........team effort hee beda paar lagata hai.....

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April 3, 2011 at 12:03 PM

सुन्दर अभिव्यक्ति ....चैम्पियन बनने की बधाई

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April 3, 2011 at 12:14 PM

अनुकूल मौसम में तो हर कोई नाव चला सकते हैं
पर तूफां में कश्ती पार लगाने वाले विरले ही होते हैं
कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं
..sateek panktiyan...nayee urja ka sanchar karti sundar rachna aur bharat ka chaimpian banne par bahut bahut badhai...

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April 3, 2011 at 12:26 PM

कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं ...

सटीक पंक्तियां...
भारत के चैम्पियन बनने की बधाई

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April 3, 2011 at 1:45 PM

कविता जी, लम्बी प्रतीक्षा के बाद आपका नया आलेख देखा, तो पढ़े बिना नहीं रहा गया. .... मेहनत का फल मीठा होता है. प्रस्तुत करने का आपका तरीका अनूठा है..... यह आलेख भी पूर्ववत स्तर बनाये रखता है....... आभार.

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April 3, 2011 at 2:11 PM

कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं ...

तमाम विपरीतताओं के बावजूद टीम इंडिया को हासिल इस चेम्पियनशिप पर आपको भी बहत-बहुत बधाईयां...

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April 3, 2011 at 2:21 PM

बहुत खूब कहा ।
जीत के जश्न में हम भी शामिल हैं ।
बधाई ।

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April 3, 2011 at 2:26 PM

धुन के पक्के ही जीतते हैं।

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April 3, 2011 at 4:34 PM

धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं

Heading is very good

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April 3, 2011 at 5:12 PM

चैम्पियन बनना इतना आसान नहीँ. सही कहा आपने कि धुन के पक्के ही चैम्पियन बनते है. बहुत बधाई आपको भारत के वर्ल्ड चैम्पियन बनाने पर और आपकी सुंदर पोस्ट के लिए भी.

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April 3, 2011 at 5:19 PM

दिन मैं सूरज गायब हो सकता है

रोशनी नही

दिल टू सटकता है

दोस्ती नही

आप टिप्पणी करना भूल सकते हो

हम नही

हम से टॉस कोई भी जीत सकता है

पर मैच नही

चक दे इंडिया हम ही जीत गए

भारत के विश्व चैम्पियन बनने पर आप सबको ढेरों बधाइयाँ और आपको एवं आपके परिवार को हिंदी नया साल(नवसंवत्सर२०६८ )की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

आपका स्वागत है
"गौ ह्त्या के चंद कारण और हमारे जीवन में भूमिका!"
और
121 करोड़ हिंदुस्तानियों का सपना पूरा हो गया

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April 3, 2011 at 5:21 PM

अनुकूल मौसम में तो हर कोई नाव चला सकते हैं
पर तूफां में कश्ती पार लगाने वाले विरले ही होते हैं

सकारात्मक सन्देश से भरी देशभक्ति संचरण करती सार्थक रचना के लिए लिए आभार
जीत की ख़ुशी का जश्न मानती हमारी इंडिया आज सच में चैम्पियन हो गयी है ...

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April 3, 2011 at 5:27 PM

कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं ...

जिनके इरादे पक्के होते है उन्हें कोई बाधा नहीं रोक सकती है .. कुछ न कुछ सार्थक सन्देश होता है आपकी रचनाओं में तभी तो चले आते हैं आपके ब्लॉग पर .... बहुत ख़ुशी हुयी पढ़कर और अपनी इंडिया का लाजवाब परफोर्मेंस से .. दुनिया में नाम रोशन हो गया ... आपको भी सुन्दर रचना के लिए बधाई

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April 3, 2011 at 5:33 PM

इसकी सुखद अनुभूति
वही महसूस कर पाते हैं
जो हर हाल में निरंतर
सबको साथ लेकर लक्ष्य प्राप्ति हेत
हरक्षण संघर्षरत रहते हैं
और मुकाम हासिल कर ही
दम लेते हैं सगर्व, सम्मान
.........क्यों न गर्व हो ऐसी सम्मान भरी जीत पर! सच हैं कि एकजुटता से जीत और बिखराव से हार ही नसीब होती है....
बहुत सुन्दर सामयिक प्रेरणा भरी कविता
आपका आभार

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April 4, 2011 at 7:52 AM

बहुत ओजपूर्ण अर्थपूर्ण रचना....बधाइयाँ

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April 4, 2011 at 11:07 AM

जीत की बधाई के साथ नववर्ष ( सम्वत्सर ) और नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं

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April 4, 2011 at 11:46 AM

कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं ..।

बिल्‍कुल सच कहा है आपने ...बधाई ।

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April 4, 2011 at 2:39 PM

अनुकूल मौसम में तो हर कोई नाव चला सकते हैं
पर तूफां में कश्ती पार लगाने वाले विरले ही होते हैं ...

बहुत ही लाजवाब ... सच है की हिम्मत हो जज़्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है ...

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April 4, 2011 at 4:04 PM

बधाई हो जीत हमारी हुयी है ..........

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April 4, 2011 at 4:14 PM

जीतने वाले कभी पीछे मुड के नहीं देखते। बस बढ़ते ही जातें हैं अनंत ऊँचाइयों की तरफ।

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April 4, 2011 at 10:05 PM

DHUN KI PAKKI DHONI SENA
NE KIYA KHOOB LANKA DAHAN
JO BHI CHALLENGE DIYA GAYA UNKO,
USKA KIYA UNHONE ACHHA NIRBAHAN.

BAHUT BADHIYA LIKHA AAPNE.

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April 5, 2011 at 8:22 PM

कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं
........बिल्‍कुल सच कहा है आपने तमाम विपरीतताओं के बावजूद टीम इंडिया को हासिल इस चेम्पियनशिप पर आपको भी बहत-बहुत बधाईयां...

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April 6, 2011 at 11:19 AM

सुन्दर अभिव्यक्ति, आपको भी बहत-बहुत बधाईयां...

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April 6, 2011 at 1:36 PM

आदरणीय कविता जी
नमस्कार !
बहुत सुन्दर सामयिक प्रेरणा भरी कविता
आपका आभार

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April 6, 2011 at 1:37 PM

नवसंवत्सर की हार्दिक शुभकामनायें !
माँ दुर्गा आपकी सभी मंगल कामनाएं पूर्ण करें

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April 6, 2011 at 1:38 PM

कई दिनों व्यस्त होने के कारण  ब्लॉग पर नहीं आ सका
बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..

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April 6, 2011 at 2:40 PM

बेशक। तभी बरसों का सपना पूरा हुआ।

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April 7, 2011 at 6:00 PM

अनुकूल मौसम में तो हर कोई नाव चला सकते हैं
पर तूफां में कश्ती पार लगाने वाले विरले ही होते हैं ...
.हिम्मत से बड़े बड़े काम आसान हो जाते है..
बहुत सुन्दर ओजपूर्ण रचना के लिए बधाई आभार

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April 8, 2011 at 7:35 PM

बिलकुल सत्य बात है।

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April 9, 2011 at 1:04 PM

चैम्पियन बनने की यही तो प्रक्रिया है

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April 9, 2011 at 3:30 PM

वही धुन के पक्के इन्सां ही एक दिन चैंपियन बनते हैं ...
बिलकुल सत्य बात है।

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April 10, 2011 at 2:27 PM

भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा, जन लोकपाल बिल पास हुआ हमारा.
बजा दिया क्रांति बिगुल, दे दी अपनी आहुति अब देश और श्री अन्ना हजारे की जीत पर योगदान करें आज बगैर ध्रूमपान और शराब का सेवन करें ही हर घर में खुशियाँ मनाये, अपने-अपने घर में तेल,घी का दीपक जलाकर या एक मोमबती जलाकर जीत का जश्न मनाये. जो भी व्यक्ति समर्थ हो वो कम से कम 11 व्यक्तिओं को भोजन करवाएं या कुछ व्यक्ति एकत्रित होकर देश की जीत में योगदान करने के उद्देश्य से प्रसाद रूपी अन्न का वितरण करें.

महत्वपूर्ण सूचना:-अब भी समाजसेवी श्री अन्ना हजारे का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना हैं ज़ोर कितना बाजू-ऐ-कातिल में है.

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April 12, 2011 at 11:39 PM

अनुकूल मौसम में तो हर कोई नाव चला सकते हैं
पर तूफां में कश्ती पार लगाने वाले विरले ही होते हैं
कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां एक दिन चैंपियन बनते हैं
ati sundar aur gyaan bhare

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April 15, 2011 at 3:08 PM

अनुकूल मौसम में तो हर कोई नाव चला सकते हैं
पर तूफां में कश्ती पार लगाने वाले विरले ही होते हैं
कठिन राह को जो आसाँ बना मंजिल तक पहुँचते हैं
वही धुन के पक्के इन्सां एक दिन चैंपियन बनते हैं
.बिलकुल सत्य बात है।
बहुत सुंदर प्रस्तुति...

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April 17, 2011 at 1:52 PM

बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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April 17, 2011 at 7:01 PM

saahas aatmavishvaas man me ho to kuch bhee mushkil nahee. achhi post aur preranaa ke liye dhanyavaad shubhakaamanaayen.

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April 18, 2011 at 5:48 PM

देश और समाजहित में देशवासियों/पाठकों/ब्लागरों के नाम संदेश:-
मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन-सा समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है और देश की सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं हैं. क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता?

मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.
आपका अपना नाचीज़ दोस्त रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

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April 19, 2011 at 7:28 PM

कविता जी! बहुत दिन से आपने ब्लॉग पर कोई पोस्ट नहीं की! भ्रष्टाचार पर देश में बहुत हंगामा मचा है आप भी प्लीज इस पर कुछ पोस्ट लिखिए न! मैं समझता हूँ कि आपको कुछ परेशानिया होंगी फिर भी प्लीज लिखना जरुर.............सादर

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April 22, 2011 at 2:23 AM

Nice post.

अभी हाथ ही मिला है, अभी दिल कहां मिले हैं
अभी और पास आओ, अभी फ़ासला बहुत है

http://mushayera.blogspot.com/

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April 22, 2011 at 10:20 PM

क्या हुआ ....आपने काफी समय से लिखा नहीं ? शुभकामनायें आपको !!!

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April 24, 2011 at 3:41 PM

कविता जी! आपकी नयी ब्लॉग पोस्ट का इंतज़ार है ..... कुछ लिखिए ...

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December 29, 2011 at 4:47 PM

वाह! बहुत खूब रचना....
सादर...

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