गरीब, कमजोर पर हर किसी का जोर चलने लगता है!


स्वर्ण लदा गधा किसी भी द्वार से प्रवेश कर सकता है।
शैतान से न डरने वाला आदमी धनवान बन जाता है ।।

अक्सर धन ढेर सारी त्रुटियों में टांका लगा देता है । 
गरीब मामूली त्रुटि के लिए जिंदगी भर पछताता है ।। 

यदि धनवान को काँटा चुभे तो सारे शहर को खबर होती है। 
निर्धन को साँप भी काटे तो भी कोई खबर नहीं पहुँचती है ।। 

अक्सर गरीब की जवानी और पौष की चांदनी बेकार जाती है । 
गर आसमान से बला उतरी तो वह गरीब के ही घर घुसती है ।।

गरीबी के दरवाजे पर दस्तक देते ही प्रेम खिड़की से कूद जाता है। 
निर्धन सुंदरी को प्रेमी बहुत लेकिन कोई पति नहीं मिल पाता है ।। 

गरीब, कमजोर पर हर किसी का जोर चलने लगता है! 
अमीरों की बजाई धुन पर गरीबों को नाचना पड़ता है!!


......कविता रावत

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October 14, 2011 at 11:31 AM

अति सुन्दर व प्रभावी रचना.

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RAJ
October 14, 2011 at 11:44 AM

गरीब, कमजोर पर हर किसी को जोर चलने लगता है!
अमीरों की बजाई धुन पर गरीबों को नाचना पड़ता है!!
............
इसको कोई नहीं झूठला सकता है की हर कोई गरीब और कमजोर आदमी को दबाने की फ़िराक में रहता है और गरीब के बिना तो अमीरों का कोई अपना अस्तित्व है ही नहीं...नाचना भले ही गरीबों को पड़ता है..
..लाजवाब रचना के लिए शुक्रगुजार हैं...

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October 14, 2011 at 11:46 AM

कविता जी , गरीब और गरीबी पर बहुत सी कहावतें और मुहावरे बने हैं , जैसे :

" गरीबी में आटा गीला "
" गरीब की जोरू सबकी भाभी "
" रेशम में टाट का पैबंद "
आदि आदि !
कोई आश्चर्य नहीं कि स्वामी राम तीर्थ ने गरीबी को एक पाप कहा था !
कुदरत का कहर भी गरीबों पर ही टूटता है !
बढ़िया आलेख !

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October 14, 2011 at 11:53 AM

गरीब, कमजोर पर हर किसी को जोर चलने लगता है!
अमीरों की बजाई धुन पर गरीबों को नाचना पड़ता है!!.....सुन्दर व प्रभावी रचना.

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October 14, 2011 at 12:11 PM

गरीबी के दरवाजे पर दस्तक देते ही प्रेम खिड़की से कूद जाता है।
निर्धन सुंदरी को प्रेमी बहुत लेकिन कोई पति नहीं मिल पाता है ।।
...एकदम सही कहा आपने.... सबकी निगाह जो उसपर होती है,,कोई देखने वाला जो नहीं होता है उसका...
बहुत बढ़िया विचारणीय रचना के लिए आभार!!!!

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October 14, 2011 at 12:18 PM

गरीब, कमजोर पर हर किसी का जोर चलने लगता है!
अमीरों की बजाई धुन पर गरीबों को नाचना पड़ता है!!
..मजबूरी जो बन जाती है नाचने की .....पेट के लिए गरीब करे भी तो क्या करे..
सुन्दर प्रभावपूर्ण रचना....

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October 14, 2011 at 12:38 PM

नाद करती हुई रचना..

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October 14, 2011 at 1:43 PM

यदि धनवान को काँटा चुभे तो सारे शहर को खबर होती है।
निर्धन को साँप भी काटे तो भी कोई खबर नहीं पहुँचती है ।।
सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें

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October 14, 2011 at 2:04 PM

यदि धनवान को काँटा चुभे तो सारे शहर को खबर होती है।
निर्धन को साँप भी काटे तो भी कोई खबर नहीं पहुँचती है ।।
अक्सर गरीब की जवानी और पौष की चांदनी बेकार जाती है ।
गर आसमान से बला उतरी तो वह गरीब के ही घर घुसती है ।।
Sachhayee bayaan kartee huee sashakt panktiyan!

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October 14, 2011 at 2:42 PM

सच्चाई को ब्यान करती सार्थक प्रस्तुति....

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October 14, 2011 at 5:02 PM

यदि हृदयों में मानवता हो तो ग़रीबी इतना बड़ा अभिशाप न रह जाए. सुंदर कविता.

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October 14, 2011 at 5:24 PM

यथार्थ को दर्शाती हुई रचना ..

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October 14, 2011 at 5:26 PM

स्वर्ण लदा गधा किसी भी द्वार से प्रवेश कर सकता है।
शैतान से न डरने वाला आदमी धनवान बन जाता है ।।क्या सच्ची बात कही है, बहुत बढ़िया ...

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October 14, 2011 at 5:37 PM

Sarshwat satya par adarit kavita...

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October 14, 2011 at 5:41 PM

गरीबी के दरवाजे पर दस्तक देते ही प्रेम खिड़की से कूद जाता है।
निर्धन सुंदरी को प्रेमी बहुत लेकिन कोई पति नहीं मिल पाता है ।।

गरीब को अक्सर वक़्त की चक्की मे पिसना पड़ता है।

सादर

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October 14, 2011 at 5:49 PM

यदि धनवान को काँटा चुभे तो सारे शहर को खबर होती है।
सच तो यही है

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October 14, 2011 at 5:54 PM

बहुत सुन्दर, सार्थक प्रस्तुति| धन्यवाद|

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October 14, 2011 at 5:56 PM

क्या बात कही है. एक एक शब्द सटीक, सत्य, यथार्थ.

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October 14, 2011 at 6:52 PM

एहसासों से भरी एक कढवी सच्चाई .....!!!
शुभकामनाएँ!

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October 14, 2011 at 7:11 PM

जीवन का यथार्थ और अनुभवों का निचोड़ समाया है इनमें!!

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October 14, 2011 at 7:13 PM

निर्धन सबकी सहता है।

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October 14, 2011 at 7:30 PM

गरीबी अमीरी को रेखांकित करती सुन्दर पंक्तियाँ. आपने सही लिखा है. आभार !

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October 14, 2011 at 7:32 PM

कढवी सच्चाई को दर्शाती हुई रचना ..
सादर....

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October 14, 2011 at 8:46 PM

बहुत सुन्दर प्रस्तुति वाह!

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October 14, 2011 at 8:50 PM

शायद ऐसा सदैव होता रहा है और होता रहेगा. सच्चाई को सहजता से उतरा है कविता में. बहुत सुंदर.

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October 14, 2011 at 9:19 PM

आपकी प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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October 14, 2011 at 11:57 PM

याथार्थवादी चित्रण।
मौजूदा दौर में लोगों की मानसिकता का बेहतर प्रस्‍तुतिकरण।

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October 15, 2011 at 1:30 AM

सामाजिक विषमता का सही चित्र आपकी कविता से झलकता है |मन को छू गई आपकी कविता | धन्यवाद |

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October 15, 2011 at 11:07 AM

सार्थक व सटीक लेखन ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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October 15, 2011 at 1:32 PM

बहुत सही एक कडवी सच्चाई को उजागर करती रचना जिसमे आप सफल रही हैं आगे भी ये सफ़र जारी रहना चाहिए हार्दिक शुभ कामनाएं

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October 15, 2011 at 2:08 PM

सही है समरथ को नही दोष गोसाई को विस्तार दे दिया आपने विचारणीय रचना

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October 15, 2011 at 8:03 PM

bahut hi satik tarike se chitrit kiya hai garib aaur garibi ko aapne..shaandar rachna ke liye sadar badhayee aaur amantran ke sath

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October 16, 2011 at 10:52 AM

वाह कविता जी !
आपकी रचना की हर एक पंक्ति कटु यथार्थ की सार्थक अभिव्यक्ति है |

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October 16, 2011 at 1:57 PM

बहुत ही अच्छी और भावपूर्ण रचना,बधाई!

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October 16, 2011 at 3:07 PM

गरीबी के दरवाजे पर दस्तक देते ही प्रेम खिड़की से कूद जाता है।
निर्धन सुंदरी को प्रेमी बहुत लेकिन कोई पति नहीं मिल पाता है ।।
गरीब, कमजोर पर हर किसी का जोर चलने लगता है!
अमीरों की बजाई धुन पर गरीबों को नाचना पड़ता है!!

......गरीबी और अमीरी सुन्दर प्रभावपूर्ण ढंग से यथार्थ चित्रण पढ़कर मन में हलचल मचने लगी है...
बहुत बहुत शुक्रिया आपका ...

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October 16, 2011 at 3:56 PM

गरीबी के दरवाजे पर दस्तक देते ही प्रेम खिड़की से कूद जाता है।

आधुनिक प्रेम की बिलकुल ठीक परिभाषा दी आपने

आँखें खोलने वाली पोस्ट आभार

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October 16, 2011 at 6:29 PM

गरीब, कमजोर पर हर किसी का जोर चलने लगता है!
nice post kuchh bhee ho dil par har kisi kaa raaz nahee hotaa

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October 17, 2011 at 12:08 PM

निर्धन सुंदरी को प्रेमी बहुत लेकिन कोई पति नहीं मिल पाता है ।। hakikat bayan aapne ki hai. Achhi kavita.

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October 17, 2011 at 1:36 PM

निर्धन को साँप भी काटे तो भी कोई खबर नहीं पहुँचती है ।।
अक्सर गरीब की जवानी और पौष की चांदनी बेकार जाती है ।
....
अमीरी-गरीबी की यथार्थ भरी प्रस्तुति बहुत बढ़िया लगी...

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October 18, 2011 at 1:54 PM

बहुत बढ़िया संकलन..

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October 18, 2011 at 5:12 PM

अक्सर धन ढेर सारी त्रुटियों में टांका लगा देता है ।
गरीब मामूली त्रुटि के लिए जिंदगी भर पछताता है ।।

बहुत सुन्दर कटु यथार्थ की सार्थक अभिव्यक्ति ..आभार........

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October 18, 2011 at 5:19 PM

गरीब, कमजोर पर हर किसी का जोर चलने लगता है!
अमीरों की बजाई धुन पर गरीबों को नाचना पड़ता है!!
...
अमीर-गरीब की तुलनात्मक रचना पढना अच्छा लगा... इसमें कोई संदेह नहीं की गरीब अमीरों की धुन पर नाचने के लिए हमेशा से ही नाचता आया है..
सुन्दर पोस्ट के लिए धन्यवाद ...........

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October 18, 2011 at 5:41 PM

सचाई छिपी है इन बातों में ... सूक्तियां हैं ये ... जीवन का सत्य ... पैसे की नाय अपरम्पार होती है ...

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October 18, 2011 at 7:40 PM

एक एक शब्द सत्य,
यथार्थ की सार्थक अभिव्यक्ति

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October 18, 2011 at 9:43 PM

बिल्कुल यथार्थ.

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October 19, 2011 at 10:06 PM

"अक्सर धन ढेर सारी त्रुटियों में टांका लगा देता है ।
गरीब मामूली त्रुटि के लिए जिंदगी भर पछताता है ।।"


एकदम सही कहा आपने....
धन के बल पर कुछ भी किया जा सकता है...
सारे दुर्गुण छुपाये जा सकते हैं...जिन्दगी के सारे रिश्ते,सारे एहसास,साथ ही आंसू पोछने वाले भी आसानी से मिल जाते हैं..बस,साथ में स्वर्ण लदा गधा ज़रूर होना चाहिए.....!!

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October 20, 2011 at 7:51 AM

सच्चाई को आपने बड़े ही खूबसूरती से शब्दों में पिरूया है ! शानदार पोस्ट!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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October 21, 2011 at 11:18 AM

सुन्दर, सार्थक प्रस्तुति.बधाई!

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October 21, 2011 at 1:25 PM

अमीरों की बजाई धुन पर गरीबों को नाचना पड़ता है!! सुन्दर प्रस्तुति !
सार्थक अभिव्यक्ति !!!

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October 21, 2011 at 3:29 PM

गरीब, कमजोर पर हर किसी को जोर चलने लगता है!
...सुन्दर व प्रभावी रचना.

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October 21, 2011 at 4:32 PM

आज के दौर में खरी बात कही आपने...

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October 21, 2011 at 8:02 PM

गरीबी के दरवाजे पर दस्तक देते ही प्रेम खिड़की से कूद जाता है।
sunder bhav aur sachchai batati kavita
badhai
rachana

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October 22, 2011 at 9:28 AM

अमीरों की बजाई धुन पर गरीबों को नाचना पड़ता है!! सुन्दर प्रस्तुति !
खरी बात ...
सार्थक अभिव्यक्ति !

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October 22, 2011 at 11:19 AM

बहुत सुन्दर व प्रभावी रचना....

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October 22, 2011 at 3:17 PM

sahi hai garibon ki do joon ki roti bhi bhaari....aabhar...

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October 22, 2011 at 7:53 PM

लोकोक्तियों के सुन्दर समागम से सार्थक और प्रभावपूर्ण रचना बन पड़ी है...

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October 22, 2011 at 9:46 PM

आपसे जुड़ कर और इन संवेदनाओं ,से जुड़ कर बहुत अच्छा लगा .सच की यही प्रखरता आपकी लेखनी को सतत ऊर्जा देती रहे .
दीपावली की हार्दिक शुभ-कामनायें !

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October 23, 2011 at 2:13 PM

स्वर्ण लदा गधा किसी भी द्वार से प्रवेश कर सकता है।
शैतान से न डरने वाला आदमी धनवान बन जाता है ।।
..very good...

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November 8, 2011 at 6:23 PM

कविता जी यथार्थ झलका कविता में सच में भोपाल गैस त्रासदी ने आप के महसूस करने की शक्ति को चरम पर पहुंचा दिया ...गजब की अनुभूति ..बधाई हो
भ्रमर ५

गरीबी के दरवाजे पर दस्तक देते ही प्रेम खिड़की से कूद जाता है।
निर्धन सुंदरी को प्रेमी बहुत लेकिन कोई पति नहीं मिल पाता है ।।

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November 11, 2011 at 4:14 PM

बहुत ही सत्य को प्रस्तुत करती कविता लिखी है आपने.
गरीबी का आपने बिल्कुल सही वर्णन किया है.
सत्य है, आपको हार्दिक धन्यवाद.

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December 5, 2011 at 12:44 PM

हर पंक्ति एक उक्ति की तरह है. हर पंक्ति पहली पंक्ति से बेहतर है.झकझोरती हुई अच्छी कृति

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December 8, 2011 at 8:53 PM

निर्धन सुंदरी को प्रेमी बहुत लेकिन कोई पति नहीं मिल पाता है ।।
बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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February 29, 2012 at 7:55 PM

कविता जी बेहतरीन अभिव्यक्ति है । हर एक पंक्ति अक्षरसः सत्य है ।

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March 16, 2012 at 2:40 PM

sahi kaha aapne...yah ek kadwa sach h...

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April 16, 2012 at 12:46 AM This comment has been removed by the author.
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April 16, 2012 at 12:48 AM

बहुत अच्छे ..यहाँ बहुत से पाठकों ने बहुत सी टिपण्णीयां की है ..मैं बस ये पूछना चाहता हूँ की कितने पाठक गरीबी के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहे है ..अगर नहीं तो मैं गलत जगह हूँ..और अगर यहाँ ऐसे पाठक है तब मैं भी उनके साथ आना चाहता हूँ!
प्रतीक त्यागी
pratiktyagi1@gmail.com

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April 16, 2012 at 12:52 AM

माफ़ी चाहूँगा आप सभी से लेकिन इस प्रस्तुति के पीछे एक मकसद जरुर होगा लेखक का जिसे वो हम सभी तक पहुँचाना चाहते है ..ये प्रस्तुति सिर्फ टिप्पणियों की मोहताज नहीं है ..

जो इस मकसद के लिए कार्य करना चाहता है वो मुझे लिखे ..
pratiktyagi1@gmail.com

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