स्वतन्त्रता दिवस के लड्डू

9:23:00 AM 49 Comments A+ a-

कभी बचपन में हम पंद्रह अगस्त के एक दिन पहले एक सफ़ेद कागज़ पर गाढ़े लाल, हरे और नीले रंग से तिरंगा बनाकर उसे गोंद से एक लकड़ी के डंडे पर फहरा कर झंडा तैयार कर लिया करते थे और फिर १५ अगस्त के दिन जल्दी सुबह उठकर बड़े जोश से जब प्रभात फेरी लगाते हुए देश भक्ति गीत गाते हुए उबड़=खाबड़ पगडंडियों से निकलकर गाँव में प्रवेश करते थे तो तब लोग अपने घरों से निकल कर खूब तालियाँ बजाकर हमारा उत्साह बढाकर दुगुना कर देते थे. प्रभात फेरी में देशभक्ति के जाने कितने ही गीत  इतने जोर शोर गाते थे कि अगले दिन गले से आवाज बंद हो जाया करती थी. प्रभात फेरी के माध्यम से गाँव-गाँव, घर-घर जाकर देशभक्ति के गीतों से देशप्रेम का अलख जगाने का यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहता था. शाम को स्कूल से १-२ लड्डू क्या मिले कि बड़े खुश होकर घर लौटकर अपने घर और आस-पड़ोस में उसे प्रसाद की तरह मिल बांटकर खुश हो लेते थे. आज जब उन गीतों के साथ ही बीच-बीच में लगाए नारों को याद करती हूँ तो सोचती हूँ तब बचपन कितना मासूम होता था जिसमें बहुत कुछ सोचने समझने की जरुरत ही नहीं पड़ती थी. अपनी ही मस्ती में गीत और नारे लगाकर थकते नहीं थे.

"कौमी तिरंगे झंडे, ऊँचे रहो जहाँ में
हो तेरी सर बुलंदी, ज्यों चाँद आस्मां में
तू मान है हमारा, तू शान है हमारी
तू जीत जा निशाँ है, तू जान है हमारी
आकाश और जमीं पर, हो तेरा बोल बाला
झुक जाय तेरे आगे, हर तख्तो- ताज वाला
हर कौम की नज़र में, तू अमन का निशाँ है"
..................
और नारों का भी तब हमारे पास कम जवाब नहीं था -

गुरूजी - "शेर बच्चो!"
बच्चे - "हाँ जी हाँ"
गुरूजी - "खाते क्या हो?"
बच्चे - " दूध-मलाई"
गुरूजी - "करते क्या हो?"
बच्चे - "देश भलाई"

...बचपन के इस "दूध -मलाई" और "देश भलाई" के मायने धीरे-धीरे बदलकर गहन शोध के विषय बन जायेंगे, इसका ख्याल कभी जेहन में आया ही नहीं पाया था. चलिए फ़िलहाल इस मौके पर एक बानगी प्रस्तुत है-

जब-जब १५ अगस्त को लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया जाता है
तब-तब स्वातंत्र्य के लिए न्यौछावर हर शहीद सबको याद आने लगता है
प्रधानमंत्री जी पहले देश की कठिनाईयों, विपदाओं पर कुछ देर गंभीर होते हैं
फिर भावी योजना पर प्रकाश डाल वर्षभर की उपलब्धियों का बखान करते हैं
राष्ट्रशक्ति को निर्बल करने वाले आंतरिक व बाह्य तत्वों पर तीव्र प्रहार करते हैं
'जय हिंद' का घोष कर मिलकर 'राष्ट्रगान' गाकर फिर अपनी राह पकड़  लेते हैं 
इधर दिल्ली के प्रमुख नागरिक, राजदूत, कूटनीतिज्ञों का सरकारी भोज होता है
उधर हमारा भी 'आजादी का एक लड्डू, पाकर मन को ख़ुशी से भर आता है
चलो आज 'हम स्वतंत्र है और रहेंगे' यह भाव एक बार सबके मन तो आता है
जो मन में 'राष्ट्र और राष्ट्रीयता' की हलकी-सी हलचल उत्पन्न कर जाता है
आओ सभी फहरा कर तिरंगा
मिलकर गायें ये गीता न्यारा
"इस वास्ते पंद्रह अगस्त है हमें प्यारा
आजाद हुआ आज के दिन देश हमारा"

स्वतंत्रता दिवस की मंगलकामनाओं सहित
जय हिंद, जय भारत 

...कविता रावत

49 comments

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August 14, 2012 at 9:35 AM delete

बहुत ही अच्छी पोस्ट

स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ!


सादर

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vijay
AUTHOR
August 14, 2012 at 9:44 AM delete

चलो आज 'हम स्वतंत्र है और रहेंगे' यह भाव एक बार सबके मन तो आता है
जो मन में 'राष्ट्र और राष्ट्रीयता' की हलकी-सी हलचल उत्पन्न कर जाता है
आओ सभी फहरा कर तिरंगा
मिलकर गायें ये गीता न्यारा
"इस वास्ते पंद्रह अगस्त है हमें प्यारा
आजाद हुआ आज के दिन देश हमारा"

.......
याद तो रखना ही होगा वर्ना फिर से मुट्ठी भर लोग आकर गुलामी की कोई नयी जंजीर गले में डाल देंगे ........
सुन्दर और सार्थक आलेख के लिए बधाई के साथ
आपको भी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना!

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August 14, 2012 at 9:53 AM delete

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...
बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!
शुभकामनायें.

दो चार बर्ष की बात नहीं अब अर्ध सदी गुज़री यारों
हे भारत बासी मनन करो क्या खोया है क्या पाया है

गाँधी सुभाष टैगोर तिलक ने जैसा भारत सोचा था
भूख गरीबी न हो जिसमें , क्या ऐसा भारत पाया है


क्यों घोटाले ही घोटाले हैं और जाँच चलती रहती
पब्लिक भूखी प्यासी रहती सब घोटालों की माया है

अनाज भरा गोदामों में और सड़ने को मजबूर हुआ
लानत है ऐसी नीती पर जो भूख मिटा न पाया है

अब भारत माता लज्जित है अपनों की इन करतूतों पर
राजा ,कलमाड़ी ,अशोक को क्यों जनता ने अपनाया है।

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August 14, 2012 at 10:23 AM delete

जाने कहाँ गये वो दिन-----। तब बच्चों को स्कूलों मे देश भक्ति के पाठ पढाये जाते थे स्कूलों के कार्यक्रकों मे देश भक्ति के गीत नाटक क़ादि हुआ करते थे लेकिन आज कल ?-- बस आजा नच लै की धूम होते है देश प्रेम का नाम हटा दिया गया है।स्वतन्त्रता दिवस की आप सब को बधाई। उन शहीदों को नमन जो देश की खातिर मिट गये।

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expression
AUTHOR
August 14, 2012 at 11:48 AM delete

बचपन में १५ अगस्त का दिन स्वतन्त्रता दिवस होता था....
आज एक छुट्टी का दिन होकर रह गया है....
सुन्दर पोस्ट
आपको भी आज़ादी के पर्व की ढेरों शुभकामनाएं...
सादर
अनु

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August 14, 2012 at 1:33 PM delete

सुन्दर संस्मरण .
जैसे जैसे हम १९४७ से दूर जा रहे हैं , वैसे वैसे स्वतंत्रता के मायने भूलते जा रहे हैं .
शुभकामनायें .

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Amrita Tanmay
AUTHOR
August 14, 2012 at 2:12 PM delete

मिशनरी स्कूलों में तो बच्चों को कहा जाता है कि आना अनिवार्य नही है . जूनियर को तो छुट्टी दे दी जाती है .

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Shekhar
AUTHOR
August 14, 2012 at 2:52 PM delete

लड्डू भी तो सबको एक जैसे कहाँ मिलते है.. उसमें भी घपला मिल जाता है ..कम से कम एक दिन छोड़ दे यह मिलावटी खेल ...लेकिन कहाँ ..

चलो आज 'हम स्वतंत्र है और रहेंगे' यह भाव एक बार सबके मन तो आता है
जो मन में 'राष्ट्र और राष्ट्रीयता' की हलकी-सी हलचल उत्पन्न कर जाता है

सही कहती हैं आप की एक दिन देशप्रेम की हलचल हो ही जाती है अब चाहे जैसी भी हो ...
तब और अब के स्वतंत्रता दिवस में जमें जमीन-आसमान का अंतर साफ़ नज़र आता है ..
आपको भी आज़ादी के पर्व की ढेरों शुभकामनाएं...

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सदा
AUTHOR
August 14, 2012 at 2:54 PM delete

स्‍वतंत्रता दिवस की अनंत शुभकामनाएं

कल 15/08/2012 को आपकी इस पोस्‍ट को नयी पुरानी हलचल पर लिंक किया जा रहा हैं.
आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!


'' पन्‍द्रह अगस्‍त ''

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Dolly
AUTHOR
August 14, 2012 at 2:58 PM delete

आपकी पोस्ट पढ़कर बचपन के दिनों में स्कूल में खाए लड्डू याद आने लगी है ..
बहुत सुन्दर संस्मरण
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

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August 14, 2012 at 4:01 PM delete

आपने तो सचमें शोध किया है की अब क्या क्या होता है १५ अगस्त के दिन ... देश की प्राचीर से ...
बचपन के दिन याद ताज़ा करा दिये आपने ...
१५ अगस्त की बधाई....

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August 14, 2012 at 4:24 PM delete

आज का लड्डू ???? प्रभात फेरी ????? इन्कलाब जिंदाबाद

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aarkay
AUTHOR
August 14, 2012 at 4:28 PM delete

कविता जी, आपने स्कूल के दिनों की याद ताज़ा कर दी । कुछ और जोड़ना चाहूँगा :
“...........आज़ाद हिन्द सारा खुश हो के गा रहा है
सर पर तिरंगा अपना जलवा दिखा रहा है ....”
सुंदर पोस्ट ! स्वतन्त्रता दिवस की बधाई !

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August 14, 2012 at 5:53 PM delete

सुंदर पोस्ट ! स्वतन्त्रता दिवस की बधाई

आओ सभी फहरा कर तिरंगा
मिलकर गायें ये गीता न्यारा
"इस वास्ते पंद्रह अगस्त है हमें प्यारा
आजाद हुआ आज के दिन देश हमारा"

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raju
AUTHOR
August 14, 2012 at 6:37 PM delete

कविता जी, बहुत खूबसूरत पोस्ट.आप की सरलता का इस पोस्ट में प्रतिबिम्ब है.

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Reena Maurya
AUTHOR
August 14, 2012 at 8:45 PM delete

बहुत खुबसूरत पोस्ट
बचपन से लेकर आज तक का सफ़र करवा दिया आपने..
आपको भी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये...
:-)

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August 14, 2012 at 9:11 PM delete

आज़ादी सबके लिए मंगलमय हों

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August 15, 2012 at 12:05 AM delete

आज़ादी की ६६ वीं वर्षगांठ मुबारक हो.

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August 15, 2012 at 9:06 AM delete

65 वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई-शुभकामनायें.
आपकी चिंताएं वाजिब हैं . वाकई बचपन के दिन अच्छे थे.
इस यौमे आज़ादी पर हमने हिंदी पाठकों को फिर से ध्यान दिलाया है.

देखिये-
http://hbfint.blogspot.com/2012/08/65-swtantrta-diwas.html

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dheerendra
AUTHOR
August 15, 2012 at 11:02 AM delete

वे क़त्ल होकर कर गये देश को आजाद,
अब कर्म आपका अपने देश को बचाइए!

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,,
RECENT POST...: शहीदों की याद में,,

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RAJ
AUTHOR
August 15, 2012 at 12:26 PM delete

भास्कर भूमि समाचार पत्र में आपकी पोस्ट के लड्डू खाकर यहाँ तक दौड़ा चला आया हूँ .........
अब तो जिस स्कूल में पढ़े -लिखे थे वहां भी अब स्वतंत्रता दिवस की सिर्फ औपचारिकता भर होती है ...आधुनिक फूहड़ नाच-गानों के बीच देशभक्ति की झलक दे दर्शन दुर्लभ होते जा रहे हैं ..
बहुत सुन्दर आलेख
आपको भी स्वतंत्रता दिवस की बधाई...

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August 15, 2012 at 12:57 PM delete

अच्छा लगा संस्मरण ,
आजादी की वर्षगांठ पर बहुत- बहुत शुभकामनाएं.

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August 15, 2012 at 1:43 PM delete

बहुत सुन्दर। आपको भी स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं।

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August 15, 2012 at 3:31 PM delete

मलाई प्रभावी हो गयी है, भलाई छिप गयी है।

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August 15, 2012 at 3:59 PM delete

तब और अब के स्वतंत्रता दिवस मनाने के में अंतर अ चुका है

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Vaanbhatt
AUTHOR
August 15, 2012 at 7:15 PM delete

बहुत बढ़िया...वन्दे मातरम...

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August 15, 2012 at 9:58 PM delete

आपकी यह पोस्ट पढ़ कर हमें भी अपना बचपन याद आ गया है. वो दिन भी क्या दिन थे....... तब देश भक्ति का जूनून था. राजनीति इतनी नीचे नहीं गिरी थी... राजनीतिज्ञों की हवस तब इतनी नहीं बढ़ी थी..... सरकारी नौकर कार्य करना अपना फर्ज मानता था... मीडिया तब "सच" को इस तरह नंगा नहीं करता था...... दो लड्डू तब हमारे लिए भारत माँ का प्रसाद हुआ करता था... अब तो माँ और पिता के मायने ही बदल गए हैं कविता जी.

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August 15, 2012 at 10:52 PM delete

गुरूजी - "खाते क्या हो?"
बच्चे - " दूध-मलाई"
गुरूजी - "करते क्या हो?"
बच्चे - "देश भलाई"
कविता जी बहुत सुन्दर ..पिछले दिन गाँव गाँव प्रभात फेरी में घूमना जी भर जोश से चिल्लाना क्या आनंद आता था ..आभार आप ने छवि उन सब की दिखाई ....जय हिंद
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाये आप को तथा सभी मित्र मण्डली को भी
भ्रमर ५

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Vevek
AUTHOR
August 17, 2012 at 9:52 AM delete

..बचपन के इस "दूध -मलाई" और "देश भलाई" के मायने धीरे-धीरे बदलकर गहन शोध के विषय बन जायेंगे, इसका ख्याल कभी जेहन में आया ही नहीं पाया था. च
..
अब तो जहाँ मलाई नज़र आती है वही लपकते है सभी....
शानदार पोस्ट.
आजाद देश में सबको आजादी मुबारक हो !!

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Rajput
AUTHOR
August 17, 2012 at 4:50 PM delete

कविता जी , हमारे पीएम ने इस बार भी वायदों के लड्डू खूब खिलाए हैं । जल्दी ही वो हमे मंगल पे ले जाएंगे।
जमीन पे तो उनका ज़ोर चला नहीं , चलो वहीं देख लेते हैं कोनसा तीर मार देंगे ।

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August 17, 2012 at 4:57 PM delete

भावनाओं और रचनाओं का अनुपम मेल !!

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August 17, 2012 at 9:03 PM delete

प्रसंशनीय..। मेरी कामना है कि आप अहर्निश सृजनरत रहें । राही मासूम रजा की एक सुंदर कविता पढ़ने के लिए आपका मेरे पोस्ट पर आमंत्रण है ।

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August 18, 2012 at 9:22 AM delete

स्वतंत्रता दिवस के परिप्रेक्ष्य में आपने आज की स्थिति का जायजा लेने का उत्तम प्रयास किया है।

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S.N SHUKLA
AUTHOR
August 18, 2012 at 11:09 AM delete


इस ख़ूबसूरत पोस्ट के लिए बधाई स्वीकारें.

कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें.

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August 19, 2012 at 3:30 PM delete

सिर्फ रस्मी रह गए हैं ये पर्व।
हैरानी तो इस बात की है इसे राष्ट्रीय पर्व का सरकार ने आज तक दर्जा नहीं दिया है।

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ZEAL
AUTHOR
August 19, 2012 at 5:29 PM delete

Great post ! Beautifully expressed !

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August 19, 2012 at 7:33 PM delete

बेहतरीन प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद ।

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Vidhu
AUTHOR
August 21, 2012 at 2:22 PM delete

जब-जब १५ अगस्त को लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया जाता है
तब-तब स्वातंत्र्य के लिए न्यौछावर हर शहीद सबको याद आने लगता है
15 अगस्त पर आपका ये लेख एक सार्थक प्रस्तुति है ..बहुत दिनों बाद आपको पढ़ा अच्छा लगा

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August 21, 2012 at 3:58 PM delete

बहुत सुन्दर संस्मरण
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

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Naveen
AUTHOR
August 22, 2012 at 1:58 PM delete

बेहतरीन प्रस्तुति।
स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ!

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Sanju
AUTHOR
August 23, 2012 at 10:26 AM delete

nice presentation....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

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August 24, 2012 at 9:38 PM delete

देशभक्ति एक पागलपन है -भगवती चरण वर्मा

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farooq shaikh
AUTHOR
August 26, 2012 at 2:56 AM delete

आपने तो सचमें शोध किया है की अब क्या क्या होता है १५ अगस्त के दिन
देश की प्राचीर से बचपन के दिन याद ताज़ा करा दिये आपने.......
तब और अब के स्वतंत्रता दिवस मनाने के में अंतर आ चुका है

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August 27, 2012 at 7:42 PM delete

वो आज़ादी के दिवानो की यादों अफसानों से लबालब दौर था .ईमानदारी के लड्डू थे ,अब सिर्फ लाल किले से बीमारी बतलाई जाती है .कृपया यहाँ भी पधारें -

सोमवार, 27 अगस्त 2012
अतिशय रीढ़ वक्रता (Scoliosis) का भी समाधान है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली में
http://veerubhai1947.blogspot.com/

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August 30, 2012 at 12:38 AM delete

इस दिन एक अलग ही जुनून सवार रहता था सर पर..अब बस सोच ही सकते हैं |

मेरा ब्लॉग आपके इंतजार में,समय मिलें तो बस एक झलक-"मन के कोने से..."
आभार..|

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Anonymous
AUTHOR
October 5, 2013 at 1:49 AM delete

Thanks foг sharing your thoughts аbout 1.
Regaгds

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August 15, 2016 at 12:36 PM delete

अपने बचपन के दिन मुझे भी याद हैं हमारे स्कूल में भी लड्डू बाँटते थे और मज़ा ही आ जाता था १५ अगस्त के दिन का ...

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