मेरी बहिना जाएगी स्कूल!















माँ जी देखो बाबा देखो 
बहिना मेरी रट लगाती है।
'मैं भी स्कूल चलूँगी भैय्या'
खींचकर बस्ता कहती है।।

जाकर बाजार से जल्दी 
एक स्लेट-बत्ती ला दो ।
पकड़कर हाथ इसका
क ख ग घ  सिखला दो।।

रात को जल्दी सुलाकर इसे
सुबह जगाना न जाना भूल।
मेरे संग उछलकूद करती
मेरी बहिना जाएगी स्कूल।।

       ...कविता रावत

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April 7, 2013 at 11:30 AM

सार्थक और सहाज भाव। कविता जी हो सकाता है आपने अपने बचपन को भी कविता लिखते महसूस किया हो। घर के बच्चों का हठ और मांगे देख हम मन ही मन हंसने लगते हैं। मैं कहूं कि मेरी बहना स्कूल जाएं और पढ-लिख आसमान को छुएं। मेरा संदेश उस तक पहुंचाने का कष्ट करें।
drvtshinde.blogspot.com

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April 7, 2013 at 12:07 PM

:-)

बचपन की मिठास लिए प्यारी रचना...

अनु

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April 7, 2013 at 12:19 PM

छोटे बच्चों की पहले पहल स्कूल जाने की उत्सुकता का सुन्दर मासूम सजीव चित्रण पढ़कर लगा जैसे यह मेरे बच्चे हों और मुझसे बतिया रहें हों...

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April 7, 2013 at 1:19 PM

बहुत बेहतरीन प्रेरक सुंदर बाल रचना !!!

RECENT POST: जुल्म

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April 7, 2013 at 1:51 PM

बहुत ही बेहतरीन प्रेरक रचना,आभार.

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April 7, 2013 at 3:02 PM

अभी तो जिद्द कर रहा है ... बहना जब तंग करेगी तो कहेगा ... नहीं नहीं इसे दूसरे स्कूल भेजो ... हा हा ...
सुन्दर बाल रचना है ..

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April 7, 2013 at 3:09 PM

बहुत ही मासूम सी रचना...तस्वीर तो और भी प्यारी

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April 7, 2013 at 3:11 PM

वहुत बढ़िया, यह ललक अन्त तक बनाए रहिए!

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April 7, 2013 at 5:08 PM

वाह इतना बढ़िया

प्रिय रंजन भोखरी करगहर रोहतास

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April 7, 2013 at 10:19 PM

मीठी सी ...लोरी सीसुन्दर रचना

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April 7, 2013 at 10:55 PM


सुंदर रचना
बधाई

http://jyoti-khare.blogspot.in/-------में
सम्मलित हों "समर्थक"बनें
आभार

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April 8, 2013 at 3:14 AM

कविता : इतना सहज कैसे लिख लेती है आप... !!!

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April 8, 2013 at 3:16 AM

मैं इसे फेसबुक के 'काव्यालय ' फोरम में शेर कर रहा हूँ...

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April 8, 2013 at 3:51 AM This comment has been removed by the author.
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April 8, 2013 at 3:53 AM

अजीब बात है - इसे पढ़ कर आँखें नम हो जाती है...

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April 8, 2013 at 5:56 AM

भाई-बहन का जोड़ा जैसे एक डाल पर खिले दो फूल -सहज,सुन्दर ,अनुरूप!

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April 8, 2013 at 8:44 AM

बहुत प्यारी , मासूम सी रचना.

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April 8, 2013 at 10:29 AM

मीठी सी प्यारी सी रचना

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April 8, 2013 at 10:45 AM

बचपन भी कितना प्यारा होता है ....जितना सोचो उतना और प्यार आता है ...बचपन सी प्यारी रचना

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RAJ
April 8, 2013 at 3:33 PM

आपके नाम के अनुकूल मासूमियत से रची-बसी सुन्दर प्यारी बाल रचना ......लाजवाब !!

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April 8, 2013 at 3:40 PM

वाह जी वाह! कविता जी ! जितने सुन्दर मासूम बच्चे उतनी ही सहज प्यारी रचना आप के अलावा और भला आजकल कौन लिखता है!!!!!! भाई-बहन के प्यार से बढ़कर कुछ नहीं है संसार में ...

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April 9, 2013 at 12:57 PM

bhai bahan ke pyar ko darshaati sunder rachna

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April 9, 2013 at 10:55 PM

रात को जल्दी सुलाकर इसे
सुबह जगाना न जाना भूल।
मेरे संग उछलकूद करती
मेरी बहिना जाएगी स्कूल।

आपने बचपन को लौटा दिया

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April 10, 2013 at 11:00 AM

masti bhari pyari rachna.............. bhai- bahan ko tasveer me dekhna aur use kavita k roop me padhna, achchha laga!

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April 10, 2013 at 6:22 PM

वाह, बहुत बढ़िया

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April 10, 2013 at 9:40 PM

मीठी सी प्यारी रचना

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April 10, 2013 at 10:43 PM

कविता जी आपकी कविता और आपके विषय में पढकर अच्छा लगा । आप शिक्षा विभाग में हैं तब तो और भी सुलभ और स्वाभाविक है बच्चों के लिये लिखना । आपके हौसले का अभिनन्दन ।
एक बात कहना चाहती हूँ कि शब्द भले ही अंग्रेजी के हों लेकिन जब हम उन्हें हिन्दी के साथ प्रयोग में ला रहे हैं तब उनकी वर्तनी देवनागरी ही होनी चाहिये । आपने 'विहान' देखा । उम्मीद है देखती रहेंगी

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April 11, 2013 at 12:01 AM

बहुत सुन्दर कविता...बहुत भावुक |

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

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April 11, 2013 at 5:25 AM

:) Sundar, cute si kavita hai ..

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April 11, 2013 at 4:41 PM

ओह, बहुत सुंदर
क्या बात

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April 11, 2013 at 7:05 PM

पढ़ लिख कर ही आयेगी।

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April 12, 2013 at 10:15 AM

रात को जल्दी सुलाकर इसे
सुबह जगाना न जाना भूल।
मेरे संग उछलकूद करती
मेरी बहिना जाएगी स्कूल।
सुंदर रचना

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April 13, 2013 at 10:00 AM

वाह, जैसा सुंदर चित्र, वैसी ही सुंदर बाल-कविता...बधाई इस सुंदर रचना के लिए

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April 13, 2013 at 9:00 PM

सुंदर रचना

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April 14, 2013 at 12:46 PM

बहुत प्यारा बाल गीत.

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April 15, 2013 at 6:50 PM

सुंदर चित्र से सजी सराहनीय कृति..

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April 15, 2013 at 7:12 PM

bahut hi saral shbdon mein itni sundar rachna"meri behna jyegi school"

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April 16, 2013 at 4:50 PM

बहुत सुन्दर रचना

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April 16, 2013 at 5:46 PM

बच्चों की एक प्यारी नोंक झोंक सी कविता!!

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April 16, 2013 at 9:54 PM

---- भावपूर्ण बाल कविता तो है ही....
मम्मी देखो! पापा देखो!
बहिना मेरी रट लगाती है।
'मैं भी स्कूल चलूँगी भैय्या'
खींचकर बस्ता कहती है।।
----- और कोई तो कुछ कहेगा नहीं सब घिसी-पिटी ही कहते हैं.....

---- रट लगाती है व कहती है ... एक ही भाव हैं अतः पुनुरुक्ति दोष है ...
---- लगाती है व कहती है में तुक भंग भी है ..

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