दूर-पास का लगाव-अलगाव


कोई सेब अपने पेड़ से बहुत दूर नहीं गिरता है।

बछड़ा अपनी माँ से बहुत दूर नहीं रहता है।।


दूर का पानी पास की आग नहीं बुझा सकता  है।

मुँह मोड़ लेने पर पर्वत भी दिखाई नहीं देता है।।


दूर उड़ते हुए पंछी के पंख बहुत लुभावने होते हैं।

किसी सुंदरी के केश दूर से घने दिखाई देते हैं।।


दूर रहने वाले बंधु-बांधव भले जान पड़ते हैं।

दूर के ढोल सबको ही बड़े सुहावने लगते हैं।।


बाड़ के पार घास ज्यादा हरी दिखाई देती है।

अक्सर दूरी घिनौनेपन को छिपा लेती है।।


.....कविता रावत


SHARE THIS

Author:

Previous Post
Next Post
June 1, 2013 at 1:58 PM

दूर का पानी पास की आग नहीं बुझा सकता है।
मुँह मोड़ लेने पर पर्वत भी दिखाई नहीं देता है।।

सशक्त पंक्तियां, जीवन-सूत्रों को अभिव्यक्त करती हुईं।

Reply
avatar
June 1, 2013 at 2:10 PM

दूर के ढोल सबको ही बड़े सुहावने लगते हैं। सही कहा आपने बहुत पते की बात कविता रावत जी, आभार।

Reply
avatar
June 1, 2013 at 2:27 PM

गहरी सीख देती पंक्तियाँ... आभार इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए

Reply
avatar
June 1, 2013 at 2:30 PM

दूर का गहरा दर्शन।

Reply
avatar
June 1, 2013 at 2:52 PM

कोई सेब अपने पेड़ से बहुत दूर नहीं गिरता है।
बछड़ा अपनी माँ से बहुत दूर नहीं रहता है।।
......................
ना तो बछड़ा और नाही माँ रहती है एक दुसरे की बिना
आपने तो दूर-पास के संबंधो को सुन्दर ताने -बाने से बुन दिया है.,......कुशल बुनकर हैं ............बधाई

Reply
avatar
June 1, 2013 at 3:09 PM

सुन्दर ,भावपूर्ण ,सशक्त और नसीहत देती रचना

Reply
avatar
June 1, 2013 at 3:19 PM

अनुपम, अद़भुद, अतुलनीय, अद्वितीय, निपुण, दक्ष, बढ़िया रचना
हिन्‍दी तकनीकी क्षेत्र की रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियॉ प्राप्‍त करने के लिये एक बार अवश्‍य पधारें
टिप्‍पणी के रूप में मार्गदर्शन प्रदान करने के साथ साथ पर अनुसरण कर अनुग्रहित करें
MY BIG GUIDE
नई पोस्‍ट
इन्‍टरनेट पर हिन्‍दी सर्च इंजन
अपने ब्‍लाग के लिये सर्च इंजन बनाइये

Reply
avatar
June 1, 2013 at 4:20 PM

बाड़ के पार घास ज्यादा हरी दिखाई देती है।

हां क्रिकेट में ही देखो वहां भी खूब हरी भरी घास उग गयी है आजकल सबकी नज़र उसी घास पर जमी हुयी है .............................................बहुत सशक्त रचना

Reply
avatar
June 1, 2013 at 4:35 PM

बहुत उम्दा,सशक्त भावपूर्ण पंक्तियाँ,,,

Recent post: ओ प्यारी लली,

Reply
avatar
June 1, 2013 at 5:22 PM

.बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति.....

Reply
avatar
June 1, 2013 at 6:15 PM

बाड़ के पार घास ज्यादा हरी दिखाई देती है।
अक्सर दूरी घिनौनेपन को छिपा लेती है।।GAZAB CHHOTI PAR GAHRI SOCH ....

Reply
avatar
June 1, 2013 at 6:32 PM

बहुत बढ़िया...

Reply
avatar
June 1, 2013 at 7:55 PM

आसपास के सब आवश्यक तत्वों से हम सदा ही अधिक पाते हैं, वही सदा साथ निभाते हैं।

Reply
avatar
June 1, 2013 at 8:40 PM

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (02-06-2013) के चर्चा मंच 1263 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

Reply
avatar
June 1, 2013 at 9:45 PM

क्या बात है वाह

Reply
avatar
June 1, 2013 at 10:01 PM

अक्सर दूरी घिनौनेपन को छिपा लेती है।।

सच-मुच ठीक कहा

Reply
avatar
June 1, 2013 at 10:02 PM

सुंदर जिंदगी की सार्थकता को लिए हुए सुंदर प्रस्तुति !!

Reply
avatar
June 1, 2013 at 10:30 PM

पुरानी कहावत सच ही है कि दूर के ढोल सुहावने होतें हैं ..बहुत सुंदर |

Reply
avatar
June 1, 2013 at 10:50 PM

दूर की हर चीज़ सुहानी ही लगती है हकीक़त तो नजदीकी के एहसास से ही पता लगती है....
बहुत सुन्दर

Reply
avatar
June 1, 2013 at 11:39 PM


दूर रहने वाले बंधु-बांधव भले जान पड़ते हैं।
दूर के ढोल सबको ही बड़े सुहावने लगते हैं।।----

बहुत सही और सार्थक बात
वाह बहुत खूब
बधाई


आग्रह है पढें
तपती गरमी जेठ मास में---
http://jyoti-khare.blogspot.in

Reply
avatar
June 2, 2013 at 8:09 AM

सटीक बात कहती अच्छी रचना

Reply
avatar
June 2, 2013 at 11:21 AM

बहुत सुंदर
अच्छी रचना
क्या कहने


नोट : आमतौर पर मैं अपने लेख पढ़ने के लिए आग्रह नहीं करता हूं, लेकिन आज इसलिए कर रहा हूं, ये बात आपको जाननी चाहिए। मेरे दूसरे ब्लाग TV स्टेशन पर देखिए । धोनी पर क्यों खामोश है मीडिया !
लिंक: http://tvstationlive.blogspot.in/2013/06/blog-post.html?showComment=1370150129478#c4868065043474768765

Reply
avatar
June 2, 2013 at 1:58 PM

सुंदर बात सुंदर कविता.

Reply
avatar
June 2, 2013 at 2:12 PM

बहुत बढ़िया ..

Reply
avatar
June 2, 2013 at 2:39 PM

दूरी हमेशा प्रयत्नशील बनाती है।

Reply
avatar
June 2, 2013 at 2:52 PM

दूर रहने वाले बंधु-बांधव भले जान पड़ते हैं।
दूर के ढोल सबको ही बड़े सुहावने लगते हैं।।..

बिलकुल सच कहा है ... दूर से सब कुछ हरा हरा नज़र आता है ...
हर छंद कड़क है ... अपनी बात स्पष्ट कहता है ...

Reply
avatar
June 3, 2013 at 8:52 AM

एक वैज्ञानिक जब इसे सोचता है तो गुरुत्वाकर्षण का नियम बन जाता है जब इसे कवि सोचता है तो धरती को एक सुंदर कविता मिल जाती है।

Reply
avatar
June 3, 2013 at 9:49 PM

बाड़ के पार घास ज्यादा हरी दिखाई देती है।
अक्सर दूरी घिनौनेपन को छिपा लेती है।। --सच कहा है
LATEST POSTअनुभूति : विविधा ३
latest post बादल तु जल्दी आना रे (भाग २)

Reply
avatar
June 5, 2013 at 3:34 PM

वाह .लाजवाब कविता. धन्यवाद

Reply
avatar
June 6, 2013 at 12:23 PM

jeevan ki vastvikta darshati ek achhi rachna

shubhkamnayen

Reply
avatar
June 7, 2013 at 9:40 AM

आपने लिखा....हमने पढ़ा
और लोग भी पढ़ें;
इसलिए कल 08/06/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
धन्यवाद!

Reply
avatar
June 11, 2013 at 8:59 PM

सटीक अभिव्यक्ति.

Reply
avatar
June 21, 2013 at 10:00 PM

आदरणीया कविता जी,
आपकी रचना ने चमौली और उत्तराखंड के हादसे की याद दिला दी,
पास रहकर दूर जाते अपनों को बचाने उतरे सेना के जवानों की
जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगा ... जवानों को मेरा नमन ....

Reply
avatar
June 24, 2013 at 5:23 PM

door ka paani paas ki pyas nahin bujha sakta .. kewal dilasa de sakta hai aur wo bhi jhoothaa

Reply
avatar