हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।

धैर्य कडुवा लेकिन इसका फल मीठा होता है।
लोहा आग में तपकर ही फौलाद बन पाता है।।

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं।।

छटाँक भर धैर्य सेर भर सूझ-बूझ के बराबर होता है।
जल्दीबाजी में शादी करने वाला फुर्सत में पछताता है।।

उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है।
धैर्य से विपत्ति को भी वश में किया जा सकता है।।

हाथ  में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।

....कविता रावत 

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July 9, 2013 at 11:47 AM

उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है।
धैर्य से विपत्ति को भी वश में किया जा सकता है।।

क्या बात है, बहुत सुंदर..
मुझे वसीम बरेलवी साहब की दो लाइन याद आ रही है..

कौन सी बात, कब, कहां, कैसे कही जाती है,
ये सलीका हो, तो हर बात सुनी जाती है।

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July 9, 2013 at 12:05 PM

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।
..
कविता जी सही फ़रमाया आपने सब्र था तभी अर्जुन मछली की आंख पर निशाना साध पाए ..................
अति सुन्दर ................

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July 9, 2013 at 12:08 PM

बहुत सुंदर और मीनिंग फुल पंक्तिया ......

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RAJ
July 9, 2013 at 12:18 PM

आज इस जहाँ में सबकुछ है पर धैर्य नहीं.........
आपकी यह रचना सुन्दर सीख दे रहीं है ..
साधुवाद

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July 9, 2013 at 12:30 PM

सही लिखा आपने कविता जी,उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है आभार।

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July 9, 2013 at 12:41 PM

वाह बहुत सुंदर, बिलकुल सार्थक कहा है, यहाँ भी पधारे


रिश्तों का खोखलापन

http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_8.html

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July 9, 2013 at 12:54 PM

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं।।
.................कविता जी बहुत सुन्दर बोल!!!

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July 9, 2013 at 1:03 PM

सही कहा। धैर्य ही सफल जीवन की कुंजी है।

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July 9, 2013 at 1:44 PM

बहुत बढ़िया ग़ज़ल....
हलके फुल्के अंदाज़ में......

अनु

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July 9, 2013 at 1:45 PM

हर एक पंक्ति जीवन राह में मार्गदर्शिका बनने के योग्य!
आभार!
कुँवर जी,

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July 9, 2013 at 2:16 PM

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।

वाह !!! बहुत उम्दा लाजबाब गजल ,,

RECENT POST: गुजारिश,

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July 9, 2013 at 3:02 PM

बेहद सुन्दर प्रस्तुतीकरण ....!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (10-07-2013) के .. !! निकलना होगा विजेता बनकर ......रिश्तो के मकडजाल से ....!१३०२ ,बुधवारीय चर्चा मंच अंक-१३०२ पर भी होगी!
सादर...!
शशि पुरवार

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July 9, 2013 at 3:25 PM

आपकी रचना कल बुधवार [10-07-2013] को
ब्लॉग प्रसारण पर
कृपया पधार कर अनुग्रहित करें |
सादर
सरिता भाटिया

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July 9, 2013 at 3:29 PM

धैर्य ही जीवन को सफल बनाता है।

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July 9, 2013 at 4:34 PM

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
साझा करने के लिए आभार!

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July 9, 2013 at 7:14 PM

धैर्य की महिमा को अच्छे से समझाया है आपने

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July 9, 2013 at 7:16 PM

बढ़िया प्रस्तुति ....

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July 9, 2013 at 7:43 PM

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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July 10, 2013 at 5:44 AM

सूक्तियाँ ग्रहण करने योग्य हैं !

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July 10, 2013 at 7:24 AM

शिक्षाप्रद पंक्तियाँ. सच्चे मार्ग पर चलने को चलने को प्रेरित करती हुई.

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July 10, 2013 at 1:06 PM

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।...शिक्षाप्रद सुन्दर पंक्तियाँ...

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July 10, 2013 at 1:57 PM

उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है।
धैर्य से विपत्ति को भी वश में किया जा सकता है।।

...बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति...

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July 10, 2013 at 3:16 PM

बहुत बढ़िया।

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July 10, 2013 at 5:39 PM

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं।।
...................सही लिखा आपने कविता जी

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July 10, 2013 at 7:24 PM

सही कहा आदरणीया आपने....
धैर्य कडुवा लेकिन इसका फल मीठा होता है।
धैर्य ही सफलता की कुंजी है ..

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July 10, 2013 at 7:29 PM

आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।

.... उम्दा गजल कविता जी

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July 10, 2013 at 9:58 PM

साँस भर विश्वास की,
एक अपरिमित आस की।

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July 11, 2013 at 11:55 AM

बहुत अच्छी बातें कही गई हैं।

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July 11, 2013 at 1:17 PM

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं ...

सच कहा है ... तभी तो कहते हैं सहज पके सो मीठा होय ... धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय ...
लाजवाब रचना है ...

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July 11, 2013 at 2:50 PM

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं।।

छटाँक भर धैर्य सेर भर सूझ-बूझ के बराबर होता है।
जल्दीबाजी में शादी करने वाला फुर्सत में पछताता है।




वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

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July 11, 2013 at 4:00 PM

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।

सार्थक प्रस्तुति

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July 12, 2013 at 7:42 AM

आपने लिखा....हमने पढ़ा....
और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 13/07/2013 को
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

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July 12, 2013 at 7:14 PM

धैर्य कडुवा लेकिन इसका फल मीठा होता है।
लोहा आग में तपकर ही फौलाद बन पाता है।।

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July 13, 2013 at 7:18 PM

sabr ka fal meetha hota hae

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July 13, 2013 at 10:25 PM

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।। बि‍ल्‍कुल सही...

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July 14, 2013 at 11:16 AM

उतावलापन बड़े-बड़े मंसूबों को चौपट कर देता है।
धैर्य से विपत्ति को भी वश में किया जा सकता है।।

हाथ में सब्र की कमान हो तो तीर निशाने पर लगता है।
आराम-आराम से चलने वाला सही सलामत घर पहुँचता है।।--
सार्थक और सुन्दर अभिव्यक्ति!
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July 15, 2013 at 12:12 PM

छटाँक भर धैर्य सेर भर सूझ-बूझ के बराबर होता है।
जल्दीबाजी में शादी करने वाला फुर्सत में पछताता है।।
बहुत सुंदर और अर्थपूर्ण अभिव्यक्ति ......

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July 15, 2013 at 12:18 PM

कविता जी एक से एक बढ़कर सुन्दर सुन्दर प्यारी प्यारी बातें !

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July 15, 2013 at 1:09 PM

एक-एक पायदान चढ़ने वाले पूरी सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
जल्दी-जल्दी चढ़ने वाले जमीं पर धड़ाम से गिरते हैं ...


sahi kha hai aapne

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July 19, 2013 at 5:36 AM

वाह... हर शेर उम्दा... बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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July 14, 2016 at 10:05 AM

कविता दीदी आपकी इस रचना को कविता मंच पर आज साँझा किया गया है


संजय भास्कर
कविता मंच
http://kavita-manch.blogspot.in

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