विवशता में फायदे का सौदा नहीं किया जा सकता है

विवशता की हालत में कोई नियम लागू नहीं होता है।
कीचड़ में फँसे हाथी को कौआ भी चोंच मारता है।।

कुँए में गिरे शेर को बंदर भी आँखें दिखाता है।
उखड़े हुए पेड़ पर हर कोई कुल्हाड़ी मारता है।।

मुसीबत में फँसा शेर भी लोमड़ी बन जाता है।
मजबूरी के आगे किसी का जोर नहीं चलता है।।

विवशता नई सूझ-बूझ को जन्म देती है।
विवशता लोहे के सलाखों को तोड़ सकती है।।

विवशता में ईमानदार भी धूर्त  बन जाता है।
विवशता कायर को भी शूरवीर बना सकता है।।

जरूरत पड़ने पर गधे को भी बाप बनाना पड़ता है।
विवशता में फायदे का सौदा नहीं किया जा सकता है।।

....  कविता रावत 

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January 30, 2014 at 12:43 PM

जरूरत पड़ने पर गधे को भी बाप बनाना पड़ता है।
विवशता में फायदे का सौदा नहीं किया जा सकता है ...
बहुत खूब लिखा है ... और हकीकत को लिखा है ... सच है की जरूरत पे सब कुछ करना पड़ता है और विवश इन्सान कुछ भी करने को मजबूर होता है ...

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January 30, 2014 at 4:36 PM

विवशता नये आविस्कार को भी जन्म देती है।

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January 30, 2014 at 5:11 PM

यह विवशता बड़ी ही कष्‍टकारी है।

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January 30, 2014 at 6:49 PM

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (31-01-2014) को "कैसे नवअंकुर उपजाऊँ..?" (चर्चा मंच-1508) पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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January 30, 2014 at 8:06 PM

गधे को बाप बनाना फायदे का सौदा है...विवशता में भी आदमी लाभ-हानि खोज लेता है...

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January 30, 2014 at 10:44 PM

आपकी इस प्रस्तुति को आज की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 66 वीं पुण्यतिथि और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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January 31, 2014 at 6:44 AM

विवशता किसी से कुछ भी करा सकता है !
सियासत “आप” की !
नई पोस्ट मौसम (शीत काल )

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January 31, 2014 at 12:12 PM

विवशता हर रूप में अलग है .... विचारणीय

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January 31, 2014 at 12:45 PM

सच है, सब लूटने को तत्पर रहते हैं

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January 31, 2014 at 12:49 PM

विचारणीय पोस्ट..बहुत बढिया..

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January 31, 2014 at 4:20 PM

सुन्दर सुन्दर संग्रहणीय रचना ....

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RAJ
January 31, 2014 at 4:46 PM

वह खुशकिस्मत ही होगा जो कभी न कभी जिंदगी में विवशता का शिकार न हुआ हो ....
बहुत बढ़िया.................

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January 31, 2014 at 7:06 PM

बिलकुल सटीक कहा कविता जी आपने। जीवन का कटु सत्य है यह।

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February 1, 2014 at 2:38 PM

कल 02/02/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
धन्यवाद !

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February 2, 2014 at 5:57 PM

विवशता नई सूझ-बूझ को जन्म देती है।
विवशता लोहे के सलाखों को तोड़ सकती है।। 100% sahmat hoon ...sacche mayne me vivashta hmari dost hai .....

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February 3, 2014 at 10:44 AM

जरूरत पड़ने पर गधे को भी बाप बनाना पड़ता है।
विवशता में फायदे का सौदा नहीं किया जा सकता है ...
......................बहुत खूब हकीकत को लिखा है कविता जी आपने

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February 4, 2014 at 10:46 AM

बहुत खूब
सटीक प्रस्तुति.....

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February 4, 2014 at 2:33 PM

सटीक बातें. शुभकामनाएँ.

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February 4, 2014 at 9:19 PM

विचारपूर्ण
वाह !! बहुत सुंदर
उत्कृष्ट प्रस्तुति
बधाई ----

आग्रह है--
वाह !! बसंत--------

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April 20, 2014 at 7:00 PM

You have shown the different facets of Helplessness very vividly and beautifully. This is the maturity of mind. Regards.

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