परीक्षा के दिन

इन दिनों बच्चों की परीक्षा से ज्यादा अपनी परीक्षा चल रही है। घर पर परीक्षा का भूत सवार हो रखा है, जिसने पूरे परिवार की रातों की नींद, दिन की भूख गायब कर दी है। न टीवी सीरियल, कार्टून फिल्मों का हो-हल्ला न कम्प्यूटर में बच्चों के गेम्स की धूड़-धाड़ सुनाई दे रही है। शादी-ब्याह, पार्टियाँ, खेल-तमाशे सब बन्द हैं। बच्चे जब छोटी कक्षाओं में होते हैं तो उनकी परीक्षा की तैयारियाँ कराने में नानी याद आने लगती है। अब पहले जैसा समय तो रहा नहीं कि माँ-बाप और परीक्षा के डर से बच्चे चुपचाप हनुमान चालीसा की तरह "सभय हृदयं बिनवति जेहि तेही" की तर्ज पर घोटा लगाने बैठ गए। आजकल के बच्चों को न माँ-बाप न परीक्षा का भय लगता है, वे नहीं जानते कि परीक्षा और भय में चोली-दामन का साथ है। बिना भय के परीक्षा का अस्तित्व नहीं और बिना परीक्षा भय का निदान नहीं होता। इस प्रसंग में रामचन्द्र शुक्ल जी कहना है- "किसी आती हुई आपदा की भावना या दुःख के कारण के साक्षात्कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्तम्भकारक मनोविकार होता है, उसी को भय कहते हैं।"
        परीक्षा देते समय आत्मविश्वास बनाए रखना, जो कुछ पढ़ा, रट्टा, समझा है, उस पर भरोसा रखना, परीक्षा में बैठने से पहले मन को शांत रखना, प्रश्न पत्र को ध्यान से पढ़ना और जो प्रश्न अच्छे से आता हो, उसका उत्तर पहले लिखना और बाद में कठिन प्रश्नों पर विचार कर सोच समझकर लिखना आदि कई बातें  बच्चों को हर दिन समझाते-बुझाते मन में अजीब से उकताहट होने लगती है। यह जानते हुए भी कि परीक्षा मात्र संयोग है, प्रश्न-पत्र अनिश्चित और अविश्वसनीय लाटरी है। परीक्षक प्रश्न पत्र के माध्यम से उनके भाग्य के साथ कैसा क्रूर परिहास करेगा, कितना पढ़ा हुआ कंठस्थ किया हुआ परीक्षा में आयेगा, यह अनिश्चित है, फिर भी संभावित प्रश्नों के उत्तर बच्चों को मुगली घुट्टी की तरह पिलाने में जुटी हुई हूँ। 
       "हेम्नः संलक्ष्यते ह्यगनौ विशुद्धिः श्यामिकापि वा" अर्थात सोने की शुद्धि अग्नि में ही देखी जाती है। संभवजातक में कहा गया है- "जवेन वाजिं जानन्ति बलिवद्दं च वाहिए। दोहेन धेनुं जानन्ति भासमानं च पंडितम्।।" अर्थात वेग से अच्छे घोडे़ का, भार ढ़ोने के सामथ्र्य से अच्छे बैल का, दुहने से अच्छी गाय का और भाषण से पंडित के ज्ञान का पता लगता है।
       शिक्षक सबको एक समान पढ़ाता है लेकिन योग्यता क्रम निर्धारण करने के लिए परीक्षा माध्यम अपनाना पड़ता है। इसी आधार पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय आदि स्थानों के निर्णय का निर्धारण होता है। जिन्दगी में मनुष्य को भी विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता है। जिस प्रकार हमारे शरीर की पांचों उंगलियां समान नहीं होती, उसी प्रकार गुण, योग्यता और सामर्थ्य की दृष्टि से हर मनुष्य में अंतर है। उसके ज्ञान, विवेक और कर्मठता में अंतर है। व्यक्ति विशेष में कार्य विशेष के गुण हैं या नहीं, पद की प्रामाणिकता और व्यवस्था का सामर्थ्य है या नहीं, इसकी जानकारी के लिए परीक्षा ही एक मात्र साधन है। परीक्षा से पद के अनुकूल उनकी योग्यता, विशेषता, शालीनता, शिष्टता की जांच करके क्रम निर्धारित होता है। कालिदास जी कहते हैं-
        "अनिर्वेदं च दाक्ष्यं च मनसश्चापराजयम्"  अर्थात् अभीष्ट सफलता के लिए उत्साह, सामर्थ्य और मन में हिम्मत जरूरी है। इसी सबक को याद कर आॅफिस-घर के बीच तालमेल बिठाते हुए घर से परीक्षा का भूत निकाल बाहर करने की जुगत में दिन-रात कैसे बीत रहे हैं, कुछ पता नहीं है।
       ...कविता रावत

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RAJ
February 25, 2015 at 1:02 PM

जिंदगी में सबसे कठिन दिन परीक्षा के दिन होते हैं वह चाहे किसी भी स्तर पर हो....परीक्षा तो परीक्षा है ..............
बहुत अच्छा आलेख ..............

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February 25, 2015 at 1:28 PM This comment has been removed by the author.
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February 25, 2015 at 2:16 PM

परीक्षा कभी ख़त्म नहीं होती .....
उम्दा लेखन!

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February 25, 2015 at 3:34 PM

आज कल तो हमारे घर में भी कर्फ्यू लगा हुआ है इसी परीक्षाओं के चलते ... ये दौर बचपन से शुरू होकर कभी ख़त्म नहीं होता जिंदगी में ...
कदम कदम पे परीक्षा होती है पर उस परीक्षा के लिए ये स्कूल की परीक्षाओं की अहमियत बहुत ज्यादा हो जाती है ... अच्छा आलेख ...

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February 25, 2015 at 4:09 PM

सच में घर का माहौल ही बदल जाता है | सार्थक लेख

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February 25, 2015 at 6:36 PM

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26-02-2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 1901 में दिया जाएगा
धन्यवाद

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February 25, 2015 at 7:32 PM

परीक्षाओं में बच्चों से ज्यादा माँ-बाप की ही माथा-पच्ची होती है,... और कोई विकल्प भी तो नहीं रहता ...
उपयोगी आलेख .....

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February 25, 2015 at 7:39 PM

बच्चे जब छोटी कक्षाओं में होते हैं तो उनकी परीक्षा की तैयारियाँ कराने में नानी याद आने लगती है।
बच्चों को पढ़ना तो बहुत बड़ी कला है ...

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February 25, 2015 at 9:46 PM

बहुत बढ़िया लेख ...परीक्षा में माता-पिता के सहयोग से बच्चे पेपर अच्छा ही कर के आते है .....बहुत कुछ सीखने और सिखाने को उस परीक्षा के माध्यम से उन दिनों मिल जाता है वह दूसरे दिनों से भिन्न भय के मामले में ही है!

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February 26, 2015 at 8:45 AM

बहुत सुंदर प्रस्तुति.परीक्षा का तनाव न केवल बच्चों बल्कि माता-पिता पर भी हावी होने लगा है.इसलिए जरूरत है कि ऐसे मौकों पर तनाव से दूर रहने का प्रयास किया जाए.
नई पोस्ट : परंपराएं आज भी जीवित हैं

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February 26, 2015 at 10:17 AM

परीक्षा में माता-पिता के सहयोग से हीअच्छा कर के आते है

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February 26, 2015 at 10:20 AM

बच्चो से अधिक माता- पिता को परीक्षा का भय सताता है।

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February 26, 2015 at 2:54 PM

ये पलछिन उम्र भर याद आते हैं फिर..
बढ़िया लेख...

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February 26, 2015 at 4:47 PM

बच्चो की परीक्षा के समय माँ बाप का भी वोही हाल होता है जो बच्चो का....

बहुत बढ़िया और सार्थक रचना !

@Ritesh Gupta
www.safarhainsuhana.blogspot.in

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February 26, 2015 at 5:18 PM

सबकी परीक्षा होती है तभी तो उसका नाम परीक्षा रखा है ..
बच्चों की परीक्षा के कठिन दोनो का सुन्दर वर्णन .....
सार्थक लेख ...

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February 26, 2015 at 6:00 PM

सुंदर और सार्थक लेख...परीक्षा देने से पहले हर बच्चा तनाव में होता है। पर परीक्षाओं के दौरान बच्चों एक्जाम प्रेशर से दूर रहना बेहद जरूरी है।

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February 26, 2015 at 6:34 PM

उत्तम. भय की विस्तृत व्याख्या विशेष अच्छी लगी.

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February 26, 2015 at 7:47 PM

वाकई...ये दि‍न बड़े कठि‍न लगते हैं हमें...सब पर तनाव हावी हाेता है

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February 27, 2015 at 8:14 AM

परीक्षाओं के दौरान बच्चों एक्जाम प्रेशर से दूर रहना बेहद जरूरी है।

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February 27, 2015 at 9:59 PM

परिक्षा कभी आसान नहीं होती जो आसान हो वो परिक्षा नहीं होती
http://savanxxx.blogspot.in

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February 28, 2015 at 11:47 AM

परिक्षा तो हर कठिन होती है, पर बच्चों की परिक्षा बच्चों से ज्यादा माँ बाप की होती है।

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March 1, 2015 at 10:34 PM

परिक्षा चाहे बच्चों की शिक्षा के लिए हो या हम बड़े लोगों के जीवन की, ऐसे में कितनी कठिनाई और भय में वक़्त बीतता है. बहुत सही कहा - ''परीक्षा मात्र संयोग है, प्रश्न-पत्र अनिश्चित और अविश्वसनीय लाटरी है''.

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March 4, 2015 at 4:08 PM

सही बात है बच्चो की परीक्षा अभिभावकों के भी परीक्षा का समय होता है … रंगोत्सव होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ...

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March 7, 2015 at 9:02 PM

आपको सपरिवार होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ .....!!
http://savanxxx.blogspot.in

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March 8, 2015 at 5:52 PM

सार्थक लेख मुझे तो खुद को बहुत डर लगता है

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March 8, 2015 at 5:54 PM

सार्थक लेख मुझे तो खुद को बहुत डर लगता है

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March 23, 2015 at 7:20 PM

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March 24, 2015 at 3:22 PM

बढ़िया ..अपने परीक्षा के दिन याद आ गए

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