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May 18, 2015 at 2:17 PM

सच के बारे में जो भी कहा है सौ फी सदी सच कहा है ... एक सच ही है जो चमकता रहता है काली रात में भी ... चाहे लोग उसे देखें या न देखें ...

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May 18, 2015 at 2:49 PM

सच-झूठ को लोकोक्तियों के द्वारा सुन्दर ढंग से समझाया है आपने .......
बहुत सुन्दर .,.........

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May 18, 2015 at 5:09 PM

सत्य लाख पर्दों के पीछे छुपा हो लेकिन एक दिन सामने जरूर आता है ...............अति सुन्दर

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dj
May 18, 2015 at 5:33 PM

झूठ की उम्र चन्द समय की ही होती है। आखिरकार तो जीत सत्य की ही होती है।
बढ़िया रचना

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May 18, 2015 at 9:10 PM

सत्यमेव जयते ...

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May 19, 2015 at 11:34 AM

sundar rachna...................yahee satya hai

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May 20, 2015 at 2:55 PM

सुन्दर एवं सत्य

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May 20, 2015 at 3:01 PM

दीदी सच का सामना वही कर सकता है जो खुद सच्चा हकस।

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May 20, 2015 at 3:06 PM

सच तो सच ही है छुप नहीं सकता। कविताजी कृपया मेरा ब्लॉग wikismarter.com ज्वाइन कीजिये न।

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May 21, 2015 at 10:32 AM

सच
http://hradaypushp.blogspot.in/2013/09/blog-post.html

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May 21, 2015 at 4:49 PM

सच तो सच होता है,


अच्छी प्रस्तुति ।

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May 22, 2015 at 4:30 PM

मार्गदर्शन करने वाली रचना .
हिंदीकुंज

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May 23, 2015 at 1:37 PM

सच कहा। झूठ को कभी छिपा कर नहीं रखा जा सकता क्‍योंकि झूठ बिना पांव का आभासी जीव होता है।

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May 24, 2015 at 1:07 PM

सच को बनाव श्रृंगार नहीं पसंद .....

कितनी अच्छे से भाव को पेश किया है.

कविता जी बहुत बहुत बधाई.

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May 28, 2015 at 5:06 PM

sundar rachna...satya batati,,,

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May 29, 2015 at 3:43 PM

सुंदर भावाभिव्यक्ति, सच सामने आ ही जाता है, झूठ सौ पर्दों में छिप कर भी सच का सामना नहीं कर सकता...

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May 31, 2015 at 10:19 PM

सच सामने जरूर आता है पर कभी कभी कितनी देर से............।
सुंदर प्रस्तुति।

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June 18, 2015 at 6:06 PM

बहुत सुन्दर

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September 24, 2015 at 3:32 PM

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