सच और झूठ का सम्बन्ध

कविता संग्रह लोक उक्ति में कविता से 

23 comments :

  1. सच के बारे में जो भी कहा है सौ फी सदी सच कहा है ... एक सच ही है जो चमकता रहता है काली रात में भी ... चाहे लोग उसे देखें या न देखें ...

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  2. सच-झूठ को लोकोक्तियों के द्वारा सुन्दर ढंग से समझाया है आपने .......
    बहुत सुन्दर .,.........

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  3. सत्य लाख पर्दों के पीछे छुपा हो लेकिन एक दिन सामने जरूर आता है ...............अति सुन्दर

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  4. झूठ की उम्र चन्द समय की ही होती है। आखिरकार तो जीत सत्य की ही होती है।
    बढ़िया रचना

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  5. सत्यमेव जयते ...

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  6. sundar rachna...................yahee satya hai

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  7. सुन्दर एवं सत्य

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  8. दीदी सच का सामना वही कर सकता है जो खुद सच्चा हकस।

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  9. सच तो सच ही है छुप नहीं सकता। कविताजी कृपया मेरा ब्लॉग wikismarter.com ज्वाइन कीजिये न।

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  10. सच
    http://hradaypushp.blogspot.in/2013/09/blog-post.html

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  11. सच तो सच होता है,


    अच्छी प्रस्तुति ।

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  12. मार्गदर्शन करने वाली रचना .
    हिंदीकुंज

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  13. सच कहा। झूठ को कभी छिपा कर नहीं रखा जा सकता क्‍योंकि झूठ बिना पांव का आभासी जीव होता है।

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  14. सच को बनाव श्रृंगार नहीं पसंद .....

    कितनी अच्छे से भाव को पेश किया है.

    कविता जी बहुत बहुत बधाई.

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  15. sundar rachna...satya batati,,,

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  16. सुंदर भावाभिव्यक्ति, सच सामने आ ही जाता है, झूठ सौ पर्दों में छिप कर भी सच का सामना नहीं कर सकता...

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  17. सच सामने जरूर आता है पर कभी कभी कितनी देर से............।
    सुंदर प्रस्तुति।

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