ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Thursday, September 10, 2015

21 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.09.2015) को "सिर्फ कथनी ही नही, करनी भी "(चर्चा अंक-2095) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

    ReplyDelete
  2. सार्थक विचार ..... हिंदी का मान बना रहे

    ReplyDelete
  3. हिंदी हैं हमवतन हैं ..हिन्दोस्तान हमारा हमारा ..

    ReplyDelete
  4. हिंदी है देश का अभिमान
    इससे होगा देश का उत्थान

    उत्तम आलेख

    ReplyDelete
  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, परमवीरों को समर्पित १० सितंबर - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  6. मातृभाषा के दृष्टिकोण से आधुनिक हिंदी के जनक भारतेंदु की ये पंक्तियाँ महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं. हिंदी को आज भी वह स्थान नहीं मिल पाया है जिसकी वह हक़दार है. ब्रितानी हुकूमत के समय अंग्रेजी का जो महत्व था उससे कही अधिक आज है. अपने ही देश में हिंदी उपेक्षित है. भारतेंदु हरिश्चंद्र जी की जयंती (९ सितम्बर) पर सुन्दर और सार्थक आलेख के लिए धन्यवाद.

    ReplyDelete
  7. बहुत उम्दा विचार...प्रकाशन हेतु बधाई!!

    ReplyDelete
  8. हिंदी देश की पहचान और अभिमान है.

    प्रकाशन के बधाई.

    ReplyDelete
  9. हिंदी दिवस की बधाइयाँ

    ReplyDelete
  10. वाह बधाई ......प्रकाशन के लिए

    ReplyDelete
  11. जी हाँ हिंदी भाषा का मान -सम्मान बना रहना बहुत जरुरी है । प्रकाशन के लिए बधाई ।

    ReplyDelete
  12. बिलकुल सहमत हूँ इस बात से की निज भाषा की उन्नति से देश, समाज औरर खुद की प्रगति भी निश्चित है ... सार्थक आलेख ...

    ReplyDelete
  13. सार्थक आलेख के लिए धन्यवाद.

    ReplyDelete
  14. मातृभाषा का जो न करे सम्मान वह कैसे जुड़ेगा अपनी संस्कृति से.

    ReplyDelete
  15. हिंदी भाषा का मान -सम्मान बना रहना बहुत जरुरी है

    ReplyDelete