श्री गणेश जन्मोत्सव

उत्सव, त्यौहार, पर्वादि हमारी भारतीय संस्कृति की अनेकता में एकता की अनूठी पहचान कराते हैं। रक्षाबन्धन के साथ ही त्यौहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। वर्ष के 365 दिन में से 111 दिन भारतीय समाज त्यौहारों और पर्वों को अलग-अलग रूपों में मनाता है। सदियों से चलती आयी हमारी यह उत्सवधर्मी परम्परा जीवन की एकरसता को दूर करने के साथ ही परिवार और समाज को एकसूत्र में बांधने का काम भी करती है। यह मात्र परम्परा नहीं है, यदि सूक्ष्मता से चिन्तन करें तो प्रत्येक पर्व के पीछे मानव कल्याण का भाव निहित है। हमारी भारतीय संस्कृति सर्व कल्याणकारिणी है, मंगलमयी है, जिसमें एक जाति, धर्म या राष्ट्र की नहीं, अपितु ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की मंगलकामना निहित हैः- "सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।"          
इन दिनों विघ्न हर्ता, बुद्धि और सुख-समृद्धि के देवता श्री गणेश की भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक दस दिन तक चलने वाले गणेश जन्मोत्सव की पूरे शहर के चौक, चौराहों, कालोनियों सहित घर-घर धूम मची है। घर से लेकर गली.मोहल्लों और बाजारों में गणपति मनमोहक रूपों में विराजमान हैं। हर वर्ष की भांति हमारे घर में भी गणपति विराजमान हैं। उनके बारे में जितना लिखा जाय, बहुत कम होगा। कहा जाता है कि गणपति जी से प्रार्थना कर महर्षि वेदव्यास ने लोक कल्याणार्थ 60 लाख श्लोकों के रूप में महाभारत की रचना की, जिसमें कहा जाता है कि इनमें से 30 लाख देवलोक, 14 लाख असुर लोक, 15 लाख यक्ष लोक और केवल 1 लाख पृथ्वी लोक पर हैं। महाभारत को वेद भी माना जाता है। भगवान गणेश की महिमा संसार में सर्वत्र व्याप्त है। आज सिंघ और तिब्बत से लेकर जापान और श्रीलंका तक तथा भारत में जन्मे प्रत्येक विचार एवं विश्वास में गणपति समाए हैं। जैन सम्प्रदाय में ज्ञान का संकलन करने वाले गणेश या गणाध्यक्ष की मान्यता है तो बौद्ध के वज्रयान शाखा का विश्वास कभी यहां तक रहा है कि गणपति के स्तुति के बिना मंत्रसिद्धि नहीं हो सकती। नेपाल तथा तिब्बत के वज्रयानी बौद्ध अपने आराध्य तथागत की मूर्ति के बगल में गणेश जी को स्थापित रखते रहे हैं। सुदूर जापान तक बौद्ध प्रभावशाली राष्ट्र में भी गणपति पूजा का कोई न कोई रूप मिल जाता है। प्रत्येक मनुष्य अपने शुभ कार्य को निर्विध्न समाप्त करना चाहता है। गणपति मंगल.मूर्ति हैं, विध्नों के विनाशक हैं। इसलिए इनकी पूजा सर्वप्रथम होती है। शास्त्रों में गणेश को ओंकारात्मक माना गया है, अतः उनका सबसे पहले पूजन-विधान है।
           भगवान श्री गणेश जीवन में श्रेष्ठ और सृजनात्मक कार्य करने की प्ररेणा देते हैं। उनकी अनूठी शारीरिक संरचना से हमें बड़ी सीख देती है। जैसे- उनका बड़ा मस्तक बड़ी और फायदेमंद बातें सोचने के लिए प्रेरित करता है तो छोटी-छोटी आंखे हाथ में लिए कार्यों को उचित ढंग से और शीघ्र पूरा करने एवं हिलती-डुलती लम्बी सूूंड हमेशा सचेत रहने की ओर इशारा करती हैं। उनके सूप जैसे बड़े कान हमें नये विचारों और सुझावों को धैर्यपूर्वक सुनने की सीख देते हैं तो लम्बी सूंड हमें अपने चारों ओर की घटनाओं की जानकारी और ज्यादा सीखने के लिए प्रेरित करती हैं । उनका छोटा मुंह हमें कम बोलने की याद दिलाता है तो जीभ हमें तोल मोल के बोल की सीख देती है।        
त्यौहारों के आगमन के साथ ही घर-घर से भांति-भांति के पकवानों की महक से वातावरण खुशनुमा हो जाता है। इसमें भी अगर मिठाईयां न हो तो त्यौहारों में अधूरापन लगता है। दूध मिठाईयों का आधार है। इसी से निर्मित मावे और घी से अनेक व्यंजन तैयार होते हैं, लेकिन आज यह अधिक मुनाफे के फेर में मिलावटी बनकर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहा है। मिलावटी दूध, घी हो या मावा सेहत के लिए वरदान नहीं बल्कि कई बीमारियों की वजह बनती है। इसलिए बाजार से मिठाई-नमकीन आदि जाँच-पड़ताल कर ही खरीदें, अच्छा तो यही होगा कि त्यौहार में घर पर पकवान बनाएं और स्वस्थ्य तन-मन से पूजा-अर्चना करें!

सभी को गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ।
                                     ....कविता रावत 

SHARE THIS

Author:

Previous Post
Next Post
September 18, 2015 at 12:37 PM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-09-2015) को " माँ बाप बुढापे में बोझ क्यों?" (चर्चा अंक-2103) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Reply
avatar
RAJ
September 18, 2015 at 12:56 PM

गणपति बाप्पा मोरया .....
बहुत ही अच्छी पोस्ट ...
श्री गणेश उत्सव की बधाई ओर शुभकामनायें .

Reply
avatar
September 18, 2015 at 1:01 PM

इन्सान में सीखने की चाह हो वह बहुत कुछ सीख सकता है हर किसी से ..... फिर भगवान गणपति तो हैं ही ऐसे देवता जो ज्ञान के भण्डार हैं ...
गणपति बप्पा की जय हो ....

Reply
avatar
September 18, 2015 at 1:13 PM

विघ्न हर्ता सुख दाता भगवान श्री गणेश सबका कल्याण करें जय श्री गणेश!

Reply
avatar
September 18, 2015 at 1:36 PM

जय श्री गणेश!

Reply
avatar
September 18, 2015 at 2:02 PM

बहुत सारगर्भित आलेख...गणेशोत्सव की हार्दिक मंगलकामनाएं!

Reply
avatar
September 18, 2015 at 3:16 PM

गणेशोत्सव की हार्दिक शुभकामनाये।

Reply
avatar
September 18, 2015 at 4:34 PM

विघ्न विनाशक गणराजा सभी पर कृपा करें...
गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

Reply
avatar
September 18, 2015 at 9:04 PM

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, आयकर और एनआरआई ... ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Reply
avatar
September 19, 2015 at 12:00 PM


आप की लिखी ये रचना....
20/09/2015 को लिंक की जाएगी...
http://www.halchalwith5links.blogspot.com पर....
आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित हैं...


Reply
avatar
September 19, 2015 at 8:49 PM

बहुत सुन्‍दर व ज्ञानवर्धक आलेख। निश्चित ही यह उपाय हमें जीवन में कुछ अच्‍छा करने की प्रेरणा देते हैं। सच्‍ची धार्मिक आस्‍था होनी उतनी ही जरूरी है जितनी श्‍वासों के लिए शुद्ध वायु।

Reply
avatar
September 20, 2015 at 1:12 AM

कविता जी गणेश चातुर्थी की आप को भी बहुत बहुत शुभ कामनाएँ।

Reply
avatar
September 20, 2015 at 1:52 PM

गणेशोत्सव पर ज्ञानवर्धक पोस्ट अच्छी लगी

Reply
avatar
September 21, 2015 at 2:14 PM

जय गणेश जी ... बहुत विस्तार से गणेश जी के बारे में लिखा है जिसको आज की पीढ़ी को जानना जरूरी है ...
आको और परिवार में सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं ...

Reply
avatar
September 22, 2015 at 10:01 AM

सिद्धि - बुद्धि सहिताय श्रीमन्महागणाधिपतये नमः ।
सुन्दर , सार - गर्भित प्रस्तुति ।

Reply
avatar
September 22, 2015 at 11:09 AM

कविता जी, बहुत सुंदर प्रस्तुति...

Reply
avatar
September 24, 2015 at 8:40 AM

बहुत सुंदर और ज्ञानवर्द्धक पोस्ट.
नई पोस्ट : प्रकृति से साहचर्य का पर्व : करमा

Reply
avatar
September 24, 2015 at 3:27 PM

publish ebook with onlinegatha, get 85% Huge royalty,send Abstract today
Ebook Publisher

Reply
avatar
September 25, 2015 at 4:34 PM This comment has been removed by the author.
avatar
September 25, 2015 at 4:36 PM

बहुत सुन्दर ........
जय श्री गणेश!!!

Reply
avatar
September 25, 2015 at 10:04 PM

आपको गणेष उत्‍सव की ढेरों बधाईयां।

Reply
avatar
September 26, 2015 at 11:52 AM

गणेश चातुर्थी की आप को भी बहुत बहुत शुभ कामनाएँ।

Reply
avatar