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October 21, 2015 at 3:56 PM

कविता जी बधाई । किसी भी लेख/फीचर के प्रकाशित होने का अपना ही आनंद है । इससे यह अधिक पाठकों तक पहुंचता है । दशहरे की उन यादों पर अच्छा लिखा है आपने ।

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October 21, 2015 at 5:51 PM

bahut badhiya likhti hain aap !! bachpan ki yaaden taza ho gayin ji !

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October 21, 2015 at 6:04 PM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बृहस्पतिवार (22-10-2015) को "हे कलम ,पराजित मत होना" (चर्चा अंक-2137)   पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
विजयादशमी (दशहरा) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

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RAJ
October 21, 2015 at 6:27 PM

गांव की रामलीला जिसने एक बार देखी हो वह कभी नहीं भूल सकता.........पढ़ते पढ़ते यादों में खो गए हम और पहुँच गयी उस दौर में ................
दशहरा की शुभकामना ...

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October 21, 2015 at 6:39 PM

बचपन में जब भी रामलीला होती हम बच्चे में आपस में खूब चर्चे करते स्कूल में, घर में ...यहाँ तक की रात को सपने में वही सीन दिखाई देते ......

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October 21, 2015 at 6:54 PM

रामलीला के बारे में पढ़कर मजा आ गया ..........................

हर साल रावण को जलाकर हम ख़ुशी मानते हैं और समझ बैठते हैं की हमने बुराई का अंत किया है, परन्तु रावण के अवगुणों पर ईमानदारी से गौर करते हुए आत्ममंथन किया जाय तो हम पाते हैं ये सभी बुराईयां तो हमारे अंदर भी हैं। जीवन में कितने ही अवसर पर हमारे अंदर छिपा रावण चुपके से अपना कमाल दिखा जाता है।

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October 21, 2015 at 7:34 PM

कविता जी, लेख प्रकाशित होने पर बहुत बहुत बधाई।

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October 21, 2015 at 7:34 PM

कविता जी, लेख प्रकाशित होने पर बहुत बहुत बधाई।

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October 22, 2015 at 10:31 AM

बहुत सुंदर .विजयादशमी की शुभकामनाएं !
नई पोस्ट : बीते न रैन

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October 22, 2015 at 11:56 AM

सही कहा। सभी को दशहरे के मेले में जाने का इंतजार रहता है। खासकर बच्‍चों के लिए रावण वध कौतूहल का विषय होता है।

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October 22, 2015 at 3:09 PM

रावण के बिना रामलीला अधूरी है
जोरदार पोस्ट ...
दशहरा की बधाई हो

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October 22, 2015 at 10:45 PM

बहुत बढ़िया लिखा है आपने, प्रकाशन की बधाई। दशहरे की शुभकामनाएँ।

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October 23, 2015 at 11:12 AM

मैंने कभी गाँव का दशहरा तो नहीं देखा। मगर आपने अपने बचपन की इस खूबसूरत याद को जिस तरह से यहाँ बखूबी उकेरा है उसके के लिए आपको धन्यवाद एवं बधाई।

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October 23, 2015 at 11:34 AM

हम भी डूब गए अपनी गांव की रामलीला में...................
जय जय सियाराम!
जय हनुमान!

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October 23, 2015 at 6:16 PM

बधाई कविता जी ! आपकी लेखनी यूँ ही अखबारो की शोभा बढाती रहे ! शुभकामनाये :-)

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October 23, 2015 at 9:13 PM

बहुत सुन्दर रचना ।Seetamni. blogspot. in

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October 23, 2015 at 9:53 PM

बचपन के दशहरे की यादें ताज़ा कर दीं. बहुत सुन्दर और रोचक आलेख...शुभकामनाएं!

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October 24, 2015 at 1:06 PM

बेहतरीन प्रस्तुति, आभार आपका।

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October 24, 2015 at 3:14 PM

अब तो रामलीलाऔ मे भी वह आनन्द नही, जिसकी ऐसी प्रतीक्षा की जाय।

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October 25, 2015 at 5:27 PM

दशहरे के मेले का तो आज भी बेसब्री से इंतजार रहता है..क्योंकि मेलों में आज भी दीखते हैं...वाही प्यारे खिलौने...गर्म जलेबियाँ....खट्टी चाट की दुकानें और उत्साही लोग...मेले अ का तो अपना अलग ही आनंद है।

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October 26, 2015 at 3:22 PM

आपने यह पोस्ट लिखकर मुझे उत्तराखंड की याद दिला दी जहाँ मैं रामलीलाओं का खुद बचपन में इतंजार करता रहता था | रामलीला देखने के लिए मैंने कई बार घर वालों के सामने बीमारी का बहाना बनाना पड़ता था तब कहीं दिन भर सो पाता था और पूरी रामलीला का लुफ्त उठाता था

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October 26, 2015 at 5:38 PM

दिल्ली में रामलीला और दशहरा का वो मज़ा ही नहीं.

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October 27, 2015 at 4:24 PM

बधाई एवं शुभकामनाएं ।
हमने संस्कृति के जिस रूप को अपने बचपन में देखा है, हमारी परवर्ती पीढ़ी अब उसे कभी नहीं देख पाएगी ।

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October 27, 2015 at 8:03 PM

प्रभावी विवेचन
सार्थक प्रस्तुति
सादर

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October 27, 2015 at 9:02 PM

आपके कमेंट को हम अपने आगामी पोस्ट की हेडिंग बनाएगे Seetamni. blogspot. in

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October 29, 2015 at 3:39 PM

लेख प्रकाशित होने पर डबल बहुत बहुत बधाई।

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October 29, 2015 at 5:57 PM

बहुत बहुत बधाई..पर लेख पढ़ बी सकें सही से इसका भी इंतजाम करिए न

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November 2, 2015 at 12:25 PM

बहुत बहुत बधाई दीदी।

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October 7, 2016 at 12:59 PM

आपका ब्लॉग पढ़ कर हमें अच्छा लगा। विजयादशमी और दशहरा क्यों मनाया जाता है इसकी जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पे विजिट करें ।
http://www.dishanirdesh.in/vijayadashmi-11-october-2016/

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