हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है

हरेक पैर में एक ही जूता नहीं पहनाया जा सकता है।
हरेक  पैर  के  लिए  अपना  ही जूता ठीक रहता है।।

सभी लकड़ी तीर बनाने के लिए उपयुक्त नहीं रहती है। 
सब   चीजें  सब  लोगों  पर  नहीं  जँचती   है।।

कोई जगह नहीं मनुष्य ही उसकी शोभा बढ़ाता  है। 
बढ़िया कुत्ता बढ़िया हड्डी का हकदार बनता है ।।

एक मनुष्य का भोजन दूसरे के लिए विष हो सकता है ।
सबसे  बढ़िया  सेब को  सूअर  उठा ले  भागता  है।।

शहद गधे को खिलाने की चीज नहीं होती है ।
सोना नहीं गधे को तो घास पसंद आती है ।।

हरेक चाबी हरेक ताले में नहीं लग पाती है ।
हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है ।। 

                            .... कविता रावत  



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November 19, 2015 at 11:34 AM

हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है

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November 19, 2015 at 1:16 PM

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (20.11.2015) को "आतंकवाद मानव सम्यता के लिए कलंक"(चर्चा अंक-2166) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ, सादर...!

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November 19, 2015 at 1:36 PM

कविता जी, आपके ब्लॉग की तिथि की सेटिंग सही नहीं है, जिसके कारण यह आपकी ब्लॉगपोस्ट की तारिख एक दिन बाद की दिखता है. जैसे इस पोस्ट की प्रकाशन की तिथि 20 नवम्बर दिखाई दे रही है. इस कारण 'हमारीवाणी' पर आपकी पोस्ट से समस्या उत्पन्न होती है, आपसे अनुरोध है कि ब्लॉग की सेटिंग में जाकर चैक करें!

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November 19, 2015 at 2:08 PM

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 20 नवम्बबर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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November 19, 2015 at 2:14 PM

बहुत ही बढ़िया...

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November 19, 2015 at 4:14 PM

हरेक चाबी हरेक ताले में नहीं लग पाती है ।
हर मनुष्य की अपनी-अपनी जगह होती है ।।
............................................
तभी तो अलग अलग ताले बनते हैं रहते एक जैसे हैं इंसान जैसे ...
बहुत सुन्दर ..............

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RAJ
November 19, 2015 at 5:05 PM

सत्य कथन /........

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November 19, 2015 at 5:11 PM

सच कहा कविता जी हरेक की अपनी उपयोगिता है.

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November 19, 2015 at 5:37 PM

हरेक अपनी जगह पर ही अच्छा लगता है किसी और के नहीं ....................बहुत बहुत बहुत सुन्दर .............

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November 19, 2015 at 6:04 PM

सुंदर प्रस्तुति

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November 19, 2015 at 6:05 PM

सुंदर प्रस्तुति

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November 20, 2015 at 12:43 AM

बहुत ही सुंदर रचना की प्रस्‍तुति।

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November 20, 2015 at 10:53 AM

​​​​सुन्दर रचना ..........बधाई |
​​​​​​​​आप सभी का स्वागत है मेरे इस #ब्लॉग #हिन्दी #कविता #मंच के नये #पोस्ट #चलोसियासतकरआये पर | ब्लॉग पर आये और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें |

http://hindikavitamanch.blogspot.in/2015/11/chalo-siyasat-kar-aaye.html​​

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November 20, 2015 at 8:39 PM

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - कवियित्री निर्मला ठाकुर जी की प्रथम पुण्यतिथि में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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November 21, 2015 at 10:31 AM

सावधान! चोर एक ही चाबी का इस्तेमाल कई तालों में भी कर देते हैं।

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November 21, 2015 at 11:17 PM

सबका अपना रोल होता है ,यही दुनिया है !

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November 23, 2015 at 8:54 PM

सही है, जो जिस जगह के लिए उपयुक्त है उसे वहीं होना चाहिए ।

अच्छी रचना ।

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December 2, 2015 at 12:34 AM

बहुत सही बात कही रचना के माध्यम से ।

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December 2, 2015 at 12:35 AM

बहुत सही बात कही रचना के माध्यम से ।

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December 5, 2015 at 1:10 AM

आप की शादी की सालगिरह की कविता बहुत सुंदर थी । शादी की सालगिरह पर बहुत बहुत बधाई ।

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December 13, 2015 at 1:30 PM

बहुत सुंदर रचना वाह .

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