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December 10, 2015 at 1:52 PM

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.12.2015) को " लक्ष्य ही जीवन का प्राण है" (चर्चा -2187) पर लिंक की गयी है कृपया पधारे। वहाँ आपका स्वागत है, सादर धन्यबाद।

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December 10, 2015 at 2:31 PM

बधाई - गैस पीड़ितों को न्याय मिले

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December 10, 2015 at 3:21 PM

यही हमारे समाज की त्रासदी है कि न्याय का इंतज़ार करने के अलावा कुछ नहीं कर सकते...

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December 10, 2015 at 7:04 PM

गंभीर चिंतन आलेख .....बिडम्बना है ...

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December 10, 2015 at 7:14 PM

सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब होता है और उसको देखने सुनने वाला ऊपर वाला है .......जब सुन ले उनकी .................

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December 10, 2015 at 10:08 PM

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.12.2015) को " लक्ष्य ही जीवन का प्राण है" (चर्चा -2187) पर लिंक की गयी है कृपया पधारे। वहाँ आपका स्वागत है, सादर धन्यवाद।

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December 11, 2015 at 12:21 AM

न्‍याय दिलाने का काम तो जिम्‍मेदार और जवाबदेह सरकारों का होता है। पर अफसोस अपने देश में जिम्‍मेदारी और जवाबदेही का घोर आभाव है। आशा है कि न्‍यायपालिका ही गैस पीडि़तों के लिए कुछ राहत देने का काम करेगी।

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December 11, 2015 at 8:22 AM

सुन्दर व सार्थक रचना ..
मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

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RAJ
December 11, 2015 at 3:41 PM

सार्थक लेखन ,,,,,,,,,,,,,,,,,
बधाई !

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December 11, 2015 at 8:49 PM

सुंदर, सार्थक लेखन। तीस साल बाद भी गैस पीड़ित बस्तियों में हालात नहीं सुधरे, उस पर न्याय में देरी। लोग नारकीए जीवन जी रहे हैं। इन्हें समाज से मुख्यधारा में जोड़ने का प्रभावी प्रयास तक नहीं किया गया।

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December 11, 2015 at 8:50 PM

सुंदर, सार्थक लेखन। तीस साल बाद भी गैस पीड़ित बस्तियों में हालात नहीं सुधरे, उस पर न्याय में देरी। लोग नारकीए जीवन जी रहे हैं। इन्हें समाज से मुख्यधारा में जोड़ने का प्रभावी प्रयास तक नहीं किया गया।

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December 12, 2015 at 12:52 AM

बहुत सटीक लेख। आप की लेखनी से मै बहुत प्राभावित हूँ ।

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December 12, 2015 at 7:35 PM

बहुत सुंदर और सार्थक लेख.

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December 12, 2015 at 9:10 PM

जाने कब न्याय मिलेगा ? इस दुर्भग्यपूर्ण घटना को लेकर भी राजनीती ही हुयी , जो बेहद दुखद है

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December 18, 2015 at 8:53 AM

बधाई आपको और आपकी खूबसूरत कलम को

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December 18, 2015 at 11:11 AM

सार्थक एवं चिंतनपरक आलेख...

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