उद्यम से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है

सोए हुए भेड़िए के मुँह में मेमने अपने आप नहीं चले जाते हैं।
भुने   हुए   कबूतर   हवा   में  उड़ते  हुए  नहीं  पाए  जाते  हैं।।

सोई लोमड़ी के मुँह में मुर्गी अपने-आप नहीं चली जाती है।
कोई  नाशपाती बन्द मुँह  में  अपने  आप  नहीं  गिरती है।।

गिरी  खाने  के लिए अखरोट को तोड़ना पड़ता है।
मछलियाँ पकड़ने के लिए जाल बुनना पड़ता है।।

मैदान  का नजारा देखने के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है।
परिश्रम में कोई कमी न हो तो कुछ भी कठिन नहीं होता है।।

एक जगह मछली न मिले तो दूसरी जगह ढूँढ़ना पड़ता है।
उद्यम   से   सब   कुछ   प्राप्त   किया   जा   सकता  है।।

... कविता रावत 


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December 18, 2015 at 11:55 AM

मंजिल पाने के लिए कदम तो उठाना ही पड़ेगा

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December 18, 2015 at 12:35 PM

प्रेरक रचना !

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December 18, 2015 at 1:41 PM

बिना परिश्रम कुछ नहीं मिलता ...................बहुत बहुत अच्छी कविता है

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December 18, 2015 at 3:19 PM

bahut sundar baat ki hai aapne....

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December 18, 2015 at 3:30 PM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (19-12-2015) को "सुबह का इंतज़ार" (चर्चा अंक-2195) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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December 18, 2015 at 4:47 PM

मैदान का नजारा देखने के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ता है।
परिश्रम में कोई कमी न हो तो कुछ भी कठिन नहीं होता है।।

एक जगह मछली न मिले तो दूसरी जगह ढूँढ़ना पड़ता है।
उद्यम से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है।।
प्रेरित करते सार्थक शब्द कविता जी ! बधाई आपको

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December 18, 2015 at 6:46 PM

बहुत सार्थक रचना है कविता जी.

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December 19, 2015 at 11:16 AM

प्रयासरत रहना ही जीवन है।

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December 19, 2015 at 5:30 PM

बहुत प्रेरक रचना । बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता ।

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December 20, 2015 at 12:55 PM

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 21 दिसम्बर 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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December 20, 2015 at 8:34 PM

बहुत बहुत शानदार रचना की प्रस्‍तुति। इस रचना की जितनी तारीफ की जाए कम है। बहुत ही उम्‍दा।

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December 21, 2015 at 2:18 PM

शानदार रचना की प्रस्‍तुति।मेहनत के बिना कुछ नहीं मिलता

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December 25, 2015 at 6:25 PM

सत्य को बयां करती प्रस्तुति...

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December 26, 2015 at 9:31 PM

प्रेरक और सार्थक संदेश देती रचना ।

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December 27, 2015 at 8:19 PM

प्रेरक रचना ।

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December 27, 2015 at 8:20 PM

प्रेरक रचना ।

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December 30, 2015 at 2:50 PM

प्रेरक रचना।

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January 8, 2016 at 10:26 PM

सुंदर। उद्य़मेन ही सिध्दंति कार्याणि न मनोरथै।

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