हम भाँति-भाँति के पंछी हैं

हम भाँति-भाँति के पंछी हैं पर बाग़ तो एक हमारा है
वो बाग़ है हिन्दोस्तान हमें जो प्राणों से भी प्यारा है
हम  हम भाँति-भाँति के पंछी ………………………

बाग़ वही है बाग़ जिसमें तरह-तरह की कलियाँ हों
कहीं पे रस्ते चंपा के हों कहीं गुलाबी गलियाँ हों
कोई पहेली कहीं नहीं है, सीधा साफ़ इशारा है
हम  हम भाँति-भाँति के पंछी ………………………

बड़ी ख़ुशी से ऐसे-वैसे इकड़े तिकड़े बोलो जी
लेकिन दिल में गिरह जो बाँधी  है वो पहले खोलो जी
सुर में चाहे फर्क हो फिर भी इक  तारा इक तारा
पंजाबी या बंगाली मद्रासी या गुजराती हो
प्रीत की इक बारात है यह हम सबके साथी हो
भेद या बोली कुछ भी हो हम एक शमां  के परवाने
आपस में तकरार करें हम ऐसे तो नहीं दीवाने
मंदिर मस्जिद गिरजा अपना, अपना ही गुरुद्वारा है
हम  हम भाँति-भाँति के पंछी ……………………… 
                                                      …राजेन्द्र कृष्ण

सभी ब्लोग्गर्स एवं पाठकों को गणत्रंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

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January 25, 2016 at 10:43 AM

अनेकता में एकता, यह हिन्द की विशेषता...

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January 25, 2016 at 11:34 AM

आपने लिखा...
और हमने पढ़ा...
हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
इस लिये आप की रचना...
दिनांक 26/01/2016 को...
पांच लिंकों का आनंद पर लिंक की जा रही है...
आप भी आयीेगा...

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January 25, 2016 at 12:41 PM

अनेकता में एकता
सुन्दर गीत ...

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January 25, 2016 at 2:05 PM

अति सुन्दर ...
आपको भी गणत्रंत्र दिवस की शुभकामनाए.......!

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January 25, 2016 at 4:34 PM

भारत माता की जय!

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January 25, 2016 at 7:08 PM

आपकी पोस्ट का लिंक कल के चर्चा मच पर भी है।
गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

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January 25, 2016 at 11:07 PM

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " ६७ वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति जी का संदेश " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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January 26, 2016 at 5:24 PM

जय हिंद। गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ।

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January 26, 2016 at 9:35 PM

बहुत सुन्दर रचना । गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें ।

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January 27, 2016 at 5:39 PM

Aha ! Anupam shabd sanyojan.....
Jai hind......

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January 28, 2016 at 4:32 PM

तभी तो इसे भारतवर्ष कहते हैं।

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January 29, 2016 at 12:34 AM

बहुत सुंदर रचना ।

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January 30, 2016 at 7:20 PM

यही पहचान है हमारी .... :)

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January 31, 2016 at 11:25 AM

हमारे देश की यही तो विशिष्टता है ।

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January 31, 2016 at 1:38 PM

उम्दा और बेहतरीन रचना.....बहुत बहुत बधाई.....

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January 31, 2016 at 4:51 PM

सुंदर रचना

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February 5, 2016 at 8:01 PM

इन्द्रधनुष सी हमारी पहचान पर मिल के सब एक रहें तो भारत चमकेगा ... सुंदर रचना ...

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February 6, 2016 at 11:07 AM

कविता जी, भिन्न भाषा, भिन्न पहनावा और भिन्न पहनावा ऐसी ढ़ेर सारी भिन्नताओं के बावजुद भी मेरा भारत एक है। इसे बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया है आपने।

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February 8, 2016 at 7:30 PM

बहुत सुन्दर और सार्थक रचना...

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February 8, 2016 at 7:31 PM

बहुत सुन्दर और सार्थक रचना...

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February 9, 2016 at 9:46 PM

राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत। बहुत बढ़िया।

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February 10, 2016 at 10:33 PM

बहुत सुंदर और सारगर्भित रचना

सादर

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February 11, 2016 at 1:04 PM

हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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February 24, 2016 at 10:35 AM

बहुत अच्छा गीत । प्रस्तुति के लिए आभार एवं अभिनंदन कविता जी ।

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January 26, 2017 at 8:10 PM

कितना अच्छा हो की सब ये बात समझें और प्राण लें देश को खुश-हाल बनाने का ...
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई ...

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January 26, 2017 at 9:47 PM

यहीं हैं भारत की सुन्दरता
सुन्दर शब्द रचना
गणत्रंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

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January 26, 2017 at 10:35 PM

बहुत सुन्दर रचना

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