ब्लॉग के माध्यम से मेरा प्रयास है कि मैं अपने विचारों, भावनाओं को अपने पारिवारिक दायित्व निर्वहन के साथ-साथ कुछ सामाजिक दायित्व को समझते हुए सरलतम अभिव्यक्ति के माध्यम से लिपिबद्ध करते हुए अधिकाधिक जनमानस के निकट पहुँच सकूँ। इसके लिए आपके सुझाव, आलोचना, समालोचना आदि का स्वागत है। आप जो भी कहना चाहें बेहिचक लिखें, ताकि मैं अपने प्रयास में बेहत्तर कर सकने की दिशा में निरंतर अग्रसर बनी रह सकूँ|

Tuesday, March 29, 2016

ईर्ष्या और लालसा कभी शांत नहीं होती है


मूर्ख लोग ईर्ष्यावश दुःख मोल ले लेते हैं।
द्वेष फैलाने वाले के दांत छिपे रहते हैं।।

ईर्ष्यालु व्यक्ति दूसरों की सुख सम्पत्ति देख दुबला होता है।
कीचड़ में फँसा इंसान दूसरे को भी उसी में खींचता है।।

ईर्ष्या  के दफ्तर में कभी छुट्टी नहीं मिलती है।
ईर्ष्या खाली घर में कभी पाँव नहीं रखती है।।

जैसे लोहे को जंग वैसे ही ईर्ष्या मनुष्य को भ्रष्ट करती है।
भले ही ईर्ष्यालु मर जाय लेकिन ईर्ष्या कभी नहीं मरती है।।

ईर्ष्या के बल पर कभी कोई धनवान नहीं बनता है।
ईर्ष्या के डंक को कोई भी शांत नहीं कर सकता है।।

ईर्ष्या लोभ से भी चार कदम आगे रहती है।
ईर्ष्या और लालसा कभी शांत नहीं होती है।।


....कविता रावत

Friday, March 11, 2016

आवाजों को नजरअंदाज न करें


हमारे शरीर में नाक से लेकर घुटनों तक समय-समय पर कुछ आवाजें आती हैं। ये आवाजें शरीर का हाल बयां करती हैं। इन्हें नजरअंदाज न करें। इस बारे में प्रस्तुत है मासिक पत्रिका आरोग्य सम्पदा से संकलित उपयोगी जानकारी। 
1. खर्राटों की आवाज
सोते समय खर्राटे लेने की आवाज सांस लेते हुए  मुँह और गले के मुलायम टिश्यू के वाइब्रेट होने के कारण आती हैं। नैसेल स्प्रे से यह ठीक हो जाती है। आप अपने वजन को कम करके भी इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।
यदि खर्राटे की समस्या अधिक हो और सोते समय आपकी सांस फूलती हो या जगने के बाद आप पसीने से भीगे हुए होते हों तो तुरन्त डाॅक्टर से संपर्क करें। यह स्लीप एप्निया के लक्षण है। इस बीमारी में एयरफ्लो रूक जाता है और डाॅयबिटीज तथा स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
2. घुटने और टखने की आवाज
घुटने और टखने से आवाज आना सामान्य बात है। यह जोड़ों के फ्लूइड शिफ्ट होते समय एयर बबल आने, नसों के जोड़ों पर चढ़ जाने अथवा जोड़ों के खिसकने के कारण होता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
        यदि घुटने और टखनों से चटकने के साथ ही दर्द भी होता हो तो डाॅक्टर से जरूर मिलें। इसके अलावा सूजन आना और जोड़ों का बहुत अधिक न खुलना भी परेशानी का संकेत है। यह मेनिस्कस (जोड़ों के पास की हड्डी का कुशन) के फटने व आस्टिमेंट आर्थराइटिस का लक्षण हो सकता है।
3. कान की आवाज
कान में झनझनाहट या घंटी बजने की आवाज भी हमेें अक्सर सुनाई देती है। यह बजती है और तुरन्त खत्म हो जाती है, इसे टिनीटस कहते हैं। यह इसलिए होता है क्योंकि कई बार दिमाग कुछ इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स को शोर समझ लेता है।
यदि यह समस्या बार-बार और एक ही कान में होती है तो यह कान का इंफेक्शन हो सकता है। इसलिए डाॅक्टर से परामर्श जरूरी है। हालांकि अधिकांश मामलों में डाॅक्टर्स को इसकी कोई ठोस वजह नहीं मिलती है। इसलिए इस बीमारी का कोई ठोस इलाज भी नहीं है।
4. पेट की आवाज
पेट से गुड़गुड़ाने की आवाजें भूख लगने पर भी आती हैं और कई बार खाना खाते समय भी आती हैं। यह आंतों के मरोड़ के कारण होता है। यह डाइजेशन की ही प्रक्रिया है। यह समस्या कई लोगों के साथ होती है।
पेट से आवाज आना तो कुछ हद तक ठीक है, लेकिन यदि इन आवाजों का आना बढ़ जाए तो खतरा हो सकता है। साथ ही यदि आंतों में सूजन हो और आवाज के साथ दर्द भी हो तो तुरन्त डाॅक्टर से संपर्क करें। कई मामलों में आंतों के अधिक सिकुड़ने के कारण भी ऐसा होता है।
5. नाक की आवाज
कई बार नाक से हल्की सीटी बजने की आवाज आती है। यह नाक में स्पेस की कमी के कारण होता है। कम स्पेस में जब सांस लेते समय एयर पास होती है तो सीटी बजने की आवाज आती है। यह रात को अधिक परेशान करती है।
यदि नाक से आवाज आनी किसी इंजुरी के बाद शुरू हुई है तो तुरन्त डाॅक्टर से मिलें। इसके अलावा यदि यह आवाज लम्बे समय तक आती है तो भी डाॅक्टर से संपर्क करें। ऐसा नथुनों के कार्टीलेज में छेद होने के कारण भी होता है। इसे ठीक करने के लिए सर्जरी करानी पड़ती है।

Tuesday, March 1, 2016

परीक्षा का भूत


           इन दिनों बच्चों की परीक्षा हो  रही है, जिसके कारण घर में एक अधोषित कर्फ्यू लगा हुआ है। बच्चे खेल-खिलौने, टी.वी., कम्प्यूटर, मोबाईल और संगी-साथियों से दूर संभावित प्रश्नों को कंठस्थ करने में लगे हुए हैं। ये दिन उनके लिए परीक्षा-देवी को मनाने के लिए अनुष्ठान करने के दिन हैं। परीक्षा रूपी भूत ने उनके साथ ही पूरे घर भर की रातों की नींद और दिन का चैन हर लिया है। बच्चों को रट्टा लगाते देख अपने बचपन के दिन याद आने लगे हैं, जब हम भी खूब रट्टा मारते तो, हमारे गुरूजी कहने लगते- “रटंती विद्या घटंती पानी, रट्टी विद्या कभी न आनी।“ लेकिन तब इतनी समझ कहाँ? दिमाग में तो बस एक ही बात घुसी रहती कि कैसे भी करके जो भी गलत-सलत मिले, उसे देवता समझकर पूज लो, विष को भी अमृत समझकर पी लो और पवनसुत हनुमान की भाँति एक ही उड़ान में परीक्षा रूपी समुद्र लांघ लो। परीक्षा करीब हों तो न चाहते हुए भी तनाव शुरू हो जाता है। जब हम कॉलेज में पढ़ते तो  मेरी एक सहेली अक्सर कहती- यार आम के पेड़ों पर बौर देखकर मुझे बड़ा टेंशन  होने लगता है क्योंकि इससे पता चलता है परीक्षा आने वाली है।
             घर में परीक्षा का भूत सबको डरा रहा है। बच्चे परीक्षा के भूत को भगाने के लिए दिन-रात घोटे लगाने में लगे हुए हैं, लेकिन परीक्षा का भूत है कि जाता ही नहीं! उनके मन-मस्तिष्क में कई सवाल आकर उन्हें जब-तब आशंकित किए जा रहे हैं। यदि कंठस्थ किए प्रश्न नहीं आए तो? प्रश्न पत्र की शैली में परिवर्तन कर दिया तो? यदि प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर से पूछ लिए तो? यदि कठिन और लम्बे-लम्बे प्रश्न पूछ लिए तो?
           जानती हूँ बच्चों को समझाना दुनिया का सबसे कठिन काम है, फिर भी समझा-बुझा रही हूँ कि आत्मविश्वास बनाए रखना। जो कुछ पढ़ा है, समझा है, कंठस्थ किया है, उस पर भरोसा करना।  परीक्षा देने से पहले मन को शांत रखना। परीक्षा देने से पहले पढ़ने के लिए न कोई किताब-कापी साथ नहीं ले जाना और नहीं कहीं से पढ़ने-देखने की कोशिश करना। उन प्रश्नों पर चिन्ह लगाना जिन्हें कर सकते हो और जो प्रश्न सबसे अच्छा लिख सकते हो, उन्हें सबसे पहले करना। जो प्रश्न बहुत कठिन लगे उसे सबसे बाद में सोच-विचार कर जो समझ में आता हो, उसे लिखना। हर तरह से प्रत्येक परीक्षा के दिन समझाने की माथा-पच्ची करती हूँ, लेकिन बच्चे यह कहते हवा निकाल देते हैं कि प्रश्न पत्र देखते ही उन्हें यह सब भाषणबाजी याद नहीं रहती? अब उन्हें कैसे समझायें कि यह सब भाषणबाजी नहीं है! 
         बच्चों की परीक्षा जल्दी से खत्म हो, इसका मुझे ही नहीं बल्कि बच्चों के प्यारे राॅकी को भी बेसब्री से इंतजार है। जब से परीक्षा के दिन आये हैं, बच्चों के साथ उसका खेलना-कूदना क्या छूटा कि वह बेचारा उछलना-कूदना भूलकर मायूस नजरों से टुकुर-टुकुर माजरे को समझने की कोशिश में लगा रहता है। 
           बच्चों को पढ़ाने का काम बोझिल जरूर लगता है, लेकिन यदि उनके रंग में  रम जाओ तो कभी-कभी रोचक प्रसंग देखकर मन गुदगुदा उठता है। ऐसा ही एक प्रसंग मुझे मेरे बेटे जो कि चौथी कक्षा की परीक्षा दे रहा है, देखने को मिला।  मैं जब उसकी हिन्दी विषय की कॉपी देख रही थी तो मुझे उसमें उसके द्वारा लिखे मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग देखकर बहुत हँसी आई, जिसे देखकर वह नाराज होकर रोने लगा कि शायद उसने गलत लिखा है। बहुत समझाने के बाद कि उसने बहुत अच्छा लिखा है, चुप हुआ। आप भी पढ़िए आपको भी मेरी तरह जरूर हँसी आएगी।   

...कविता रावत