स्वतंत्रता खोने वाले के पास कुछ नहीं बचता है

जो अपना स्वामी स्वयं नहीं,
उसे  स्वतंत्र नहीं कहा जा सकता है ।
जिसे अत्यधिक स्वतंत्रता मिल जाय,
वह सबकुछ चौपट करने लगता है 

फरिश्तों की गुलामी करने से,
शैतानों पर हुकूमत करना भला 
पिंजरे में बंद शेर की तरह जीने से,
आवारा पशु की तरह रहना  भला 

दासता की हालत में कोई नियम लागू नहीं होता है 
स्वतंत्रता खोने वाले के पास कुछ नहीं बचता है

दूसरों की गुलामी के निवाले से हृष्ट-पुष्ट हो जाने से,
स्वतंत्रता के साथ दुर्बल बने रहना भला 
झूठ-फरेब, भ्रष्टाचार, दुराचार-अनाचार भरी शान से
गरीब रहकर घर की रुखी-सूखी खाकर जीना भला 

                      .........कविता रावत

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August 13, 2016 at 9:58 AM

कविता जी, सही कहा आपने। स्वतंत्रता खोने वाले के पास कुछ नहीं बचता है। सुंदर प्रस्तुति।

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August 13, 2016 at 10:17 AM

सही लिखा है .. आज़ादी पर पूरी तरह दूसरे की आज़ादी का ख्याल ख्याल रखते हुए ...
सच है की जब तक अंतस आज़ाद नहीं ... सच्ची आज़ादी नहीं ...

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August 13, 2016 at 11:04 AM

शब्दशः सत्य एवं पुष्ट ।

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August 13, 2016 at 5:44 PM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (14-08-2016) को "कल स्वतंत्रता दिवस है" (चर्चा अंक-2434) पर भी होगी।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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August 14, 2016 at 6:28 AM

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 15 अगस्त 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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August 15, 2016 at 12:14 AM

अच्‍छी बातें परोसीं।

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August 15, 2016 at 10:57 AM

जो अपना स्वामी स्वयं नहीं,
उसे स्वतंत्र नहीं कहा जा सकता है ।
ध्रुव सत्य
सादर

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August 15, 2016 at 12:09 PM

एकदम सही.कहा.आपने कविता जी । सुदंर रचना ।

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August 15, 2016 at 12:09 PM

एकदम सही.कहा.आपने कविता जी । सुदंर रचना ।

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August 15, 2016 at 12:58 PM

सुंदर एवम् सत्य कथ्य..

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August 15, 2016 at 8:23 PM

स्वतंत्रता खो देने के बाद ही वैसे बहुत कुछ बचा रहे हैं लोग सुना है :)

सुन्दर प्रस्तुति ।

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August 16, 2016 at 6:47 PM

सच कहा, सोने के पिंजरे से भला तिनके का घोसला।

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August 22, 2016 at 4:57 PM

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September 3, 2016 at 5:52 PM

कटु सत्य तो यही है
सादर

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