बीते हुए दुःख की दवा सुनकर मन को क्लेश होता है


बड़े मुर्गे की तर्ज पर छोटा भी बांग लगाता है।
एक खरबूजे को देख दूसरा भी रंग बदलता है।।

एक कुत्ता कोई चीज देखे तो सौ कुत्ते उसे ही देखते हैं।
बड़े पंछी के जैसे ही छोटे-छोटे पंछी भी गाने लगते हैं।।

जिधर एक भेड़ चली उधर सारी भेड़ चल पड़ती है।
एक अंगूर को देख दूजे पर जामुनी रंगत चढ़ती है।।

जिसे कभी दर्द न हुआ वह भी सहनशीलता का पाठ पढ़ा लेता है।
अपना पेट भरा हो तो भूखे को उपदेश देना बहुत सरल होता है।।।

नेक सलाह जब भी मिले वही उसका सही समय होता है।
बीते हुए दुःख की दवा सुनकर मन को क्लेश होता है।।

...कविता रावत 


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November 3, 2016 at 11:06 AM

पर उपदेश कुशल बहु तेरे....। और
जाके पाँव न फाटे बिवाई......।
सुन्दर सन्देश देती 'कविता'।

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November 3, 2016 at 11:17 AM

आज के समाज के ऊपर ... :) बहुत ही सटीक ... बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। :)

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November 3, 2016 at 12:39 PM

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 04 नवम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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November 3, 2016 at 12:58 PM

सुन्दर कविता ...

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November 3, 2016 at 10:23 PM

बहुत सुन्दर शब्द रचना

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November 4, 2016 at 12:01 AM

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’रंगमंच के मुगलेआज़म को याद करते हुए - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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November 5, 2016 at 2:24 PM

बहुत बढ़िया,कविता!

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November 6, 2016 at 10:48 PM

सुन्दर रचना कविता जी !

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November 7, 2016 at 1:18 PM

आपके द्वारा लिखी गई हर पंक्तियाँ बेहद खूबसूरत होती हैं कविता जी !

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November 8, 2016 at 3:26 PM

सुन्दर सटीक और सार्थक सूक्तियां ... हर पंक्ति गहरा अर्थ समेटे है ...

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November 23, 2016 at 3:08 PM

जिसे कभी दर्द न हुआ वह भी सहनशीलता का पाठ पढ़ा लेता है।
अपना पेट भरा हो तो भूखे को उपदेश देना बहुत सरल होता है।।।
सही और सटीक

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November 30, 2016 at 6:19 PM

बहुत खूब कविता जी!

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