अपने-पराये का भेद

लाठी मारने से पानी जुदा नहीं होता है।
हर पंछी को अपना घोंसला सुन्दर लगता है।।

शुभ कार्य की शुरुआत अपने घर से की जाती है।
पहले अपने फिर दूसरे घर की आग बुझाई जाती है।।

दूसरे के भरे बटुए से अपनी जेब के थोड़े पैसे भले होते हैं।
समझदार पराया महल देख अपनी झोंपड़ी नहीं गिराते हैं।।

पड़ोसी की फसल अपनी फसल से बढ़िया दिखाई देती है।
बहुधा पराई चीज़ अपनी से ज्यादा आकर्षक नजर आती है।।

जूते में पड़े कंकर की चुभन को कोई दूसरा नहीं जानता है।
कांटा जिसे भी चुभा हो वही उसकी चुभन समझ सकता है।।

अपना सिक्का खोटा हो तो परखने वाले का दोष नहीं होता है।
जो दूसरों का भाग्य सराहता है अपने भाग्य को कोसता है।।



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December 26, 2016 at 10:21 AM

दिनांक 27/12/2016 को...
आप की रचना का लिंक होगा...
पांच लिंकों का आनंद... https://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
आप भी इस प्रस्तुति में....
सादर आमंत्रित हैं...

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December 26, 2016 at 3:58 PM

लोकोक्ति आधारित सुन्दर कविता है .........

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December 27, 2016 at 10:58 AM

सच्चाई पहले अपने घर की आग को बुझाना ... कोई गैर नहीं आता ...
वैसे हर छंद तीखा, सोचने वाला और सत्य की अदायगी है ... बहुत खूब ... नव वर्ष मुबारक हो ...

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December 27, 2016 at 2:40 PM

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 28 दिसम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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December 28, 2016 at 11:26 AM

बेहद खूबसूरत रचना
उम्दा अभिव्यक्ति

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December 28, 2016 at 10:17 PM This comment has been removed by the author.
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December 28, 2016 at 10:19 PM

अपने पराये का भेद ।
वाह!!!

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December 29, 2016 at 3:33 PM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (30-12-2016) को "महफ़ूज़ ज़िंदगी रखना" (चर्चा अंक-2572) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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December 29, 2016 at 7:48 PM

हमेशा की तरह एक और बेहतरीन पोस्ट इस शानदार पोस्ट के लिए धन्यवाद। .... Thanks for sharing this!! :) :)

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December 30, 2016 at 7:57 PM

खूबसूरत रचना उम्दा :))

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December 31, 2016 at 7:17 AM

उत्तम अभिव्यक्ति.

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December 31, 2016 at 6:53 PM

बहुत सुंदर.नव वर्ष की शुभकामनाएं !

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December 31, 2016 at 7:24 PM

बहुत ही उम्दा ...कभी मेरे ब्लॉग पे भी आये तो ख़ुशी होगी https://muskuratealfaz.blogspot.in/

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January 4, 2017 at 10:49 PM

सुन्दर शब्द रचना
नव बर्ष की शुभकामनाएं

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January 6, 2017 at 8:16 PM

बहुत ही सटीक बात कही है आपने ....

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January 10, 2017 at 1:15 PM

बहुत ही लाजबाब.
बलदेव नेगी.

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January 10, 2017 at 11:03 PM

अति उत्तम !कहावतों का बेजोड़ उपयोग

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January 17, 2017 at 5:40 PM

very nice and impressive lines....thanks.....

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February 9, 2017 at 5:37 PM

बहुत ही अच्छा लेख है

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