प्यार की अजीब होती है दास्ताँ

कुछ हुई उनकी बात
कुछ  हुई मुलाकात
और वे प्यार समझ बैठे
दिल देने की भूल कर  बैठे
कहते सुनते आए से जिसे
वे भी करने लगे प्यार
बस इसी प्यार की खातिर
आगे बढ़ते चले गए
रोक न पाए अपने दिल को
दिन को भी  मधुर सपने देखने लगे
यादों की ताजगी में रातभर जगने लगे
दिखते न थे जो घर के बाहर कभी
वे बार-बार हर कहीं नजर आने लगे
'नींद कोई उड़ा ले गया उनकी'
'कोई उधार दो नींद' कहने लगे
पर कुछ समय बाद
जाने क्या बात
या  हुई तकरार
कि वे मान बैठे हार
फिर उजाड़ दिखा प्यार तो
सपने बिखर गए
नाजुक दिल क्या चटका
कि जीना छोड़ गए
अब क्या करें बात उनकी
प्यार की अजीब होती है दास्ताँ
बातें छेड़ देते हैं अक्सर वे भी
जिनका दूर-दूर तक नहीं वास्ताँ
...कविता रावत 

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October 13, 2017 at 8:16 PM

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, याद दिलाने का मेरा फ़र्ज़ बनता है ... “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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October 14, 2017 at 4:51 AM

बहुत सुंदर रचना.कविता जी।

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October 14, 2017 at 6:48 PM

सुन्दर रचना

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October 17, 2017 at 1:40 PM

घायल की गति तो घायल ही जाने।

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October 20, 2017 at 12:10 PM

सुन्दर रचना पसंद आई
गोवर्घन पूजा की शुभ कामनाएँ

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November 26, 2017 at 9:35 AM

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द" सशक्त महिला रचनाकार विशेषांक के लिए चुनी गई है एवं सोमवार २७ नवंबर २०१७ को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"

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November 27, 2017 at 3:22 PM

प्यार की अजान दास्ताँ बड़ी ही ह्रदय स्पर्शी है आदरणीय कविता जी | सादर सस्नेह नमन और शुभकामना --

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November 27, 2017 at 3:23 PM

प्यार की अजब दास्ताँ बड़ी ही ह्रदय स्पर्शी है आदरणीय कविता जी | सादर सस्नेह नमन और शुभकामना --

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November 27, 2017 at 4:07 PM

बहुत सुंदर रचना..

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November 27, 2017 at 11:11 PM

लाजवाब प्रस्तुति...
वाह!!!!

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