दरिया जिधर बह निकले वही उसका रास्ता होता है

दो काम एक साथ हाथ में लेने पर एक भी नहीं हो पाता है।
बहुत ज्यादा सोच-विचार वाला कुछ भी नहीं कर पाता  है।।

जो कुछ नहीं जानता वह किसी बात में संदेह नहीं करता है।
जो अधिक जानता है वह कम पर भी विश्वास कर लेता है ।।

जो जल्दी विश्वास कर लेता है वह बाद में पछताता है ।
समझदार आदमी हर मामले में समझदार नहीं होता है ।।

कमजोर काठ को अक्सर कीड़ा जल्दी खा जाता है ।
दरिया जिधर बह निकले वही उसका रास्ता होता है ।।  

21 comments :

  1. वाह्ह्ह....बहुत खूब👌👌
    प्रेरक रचना कविता जी।

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26-10-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2769 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  3. नमस्ते, आपकी यह प्रस्तुति "पाँच लिंकों का आनंद" ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में गुरूवार 26-10-2017 को प्रातः 4:00 बजे प्रकाशनार्थ 832 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।
    चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
    सधन्यवाद।

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी को ब्लॉग बुलेटिन का नमन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. सुंदर प्रस्तुति।

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  6. बहुत ज्ञानवर्धक सन्देश !

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  7. बहुत सटीक सीख दी है आपने । हर पंक्ति उपयोगी शिक्षा को अपने में समेटे हुए....

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  8. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/10/41.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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  9. बहुत ही सुन्दर

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  10. सही है समझदार आदमी हर मामले में समझदार नहीं होता ...
    हर छंद गहरी सचाई लिए ... जमाने का आइना है ...

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  11. सार्थक सन्देश भरी सुंदर सरल रचना -------

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  12. अर्थात् जीवन जैसे चल पड़े चलने दो नदी की तरह।

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  13. वाह्ह्ह्ह बहुत सुन्दर 1

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  14. सार्थक संदेश से परिपूर्ण सुंदर रचना..

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  15. संदेश परक, मुहावरों वाली कविता ने मन मोह लिया.
    सादर

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  16. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 10/04/2018 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

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  17. वाह!!बहुत सुंंदर !!

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