चूहे के न्याय से बिल्ली का अत्याचार भला

कानून का निर्णय काले कौए को बरी लेकिन फाख्ता को दोषी ठहराता है
निर्धन के लिए मुसीबत और धनवान के लिए कानून फायदेमंद होता है

मुकदमे में किसान नहीं जमींदार को हमेशा सही माना जाता है
धनवान के लिए एक कानून और निर्धन के लिए दूसरा होता है

एक निर्दोष को दंड देने से दस दोषियों को छोड़ देना भला
दो वकीलों के बीच फंसने से मुकदमा वापस लेना भला

जो दूसरों का बुरा सोचता है उसका अपना बुरा होता है
ईश्वर देर भले ही करे लेकिन अनदेखी नहीं करता है

गीदड़ भाग जाते हैं पर बंदरों को डंडे पड़ते हैं
कानून से अधिक उल्लंघन करने वाले मिलते हैं।

चूहे के न्याय से बिल्ली का अत्याचार भला
अन्यायपूर्ण शान्ति से न्यायपूर्ण युद्ध भला

...कविता रावत


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December 16, 2017 at 11:17 AM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (17-12-2017) को
"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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December 16, 2017 at 12:57 PM

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 17 दिसम्बर 2017 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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December 16, 2017 at 1:17 PM

वाह्ह्ह...कविता जी...बहुत ही लाज़वाब सारगर्भित अभिव्यक्ति,आपने खूब आईना दिखाया है।

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December 16, 2017 at 9:45 PM

वाह ... हर बात जैसे एक सूक्ति की तरह है ...
सटीक, स्पष्ट और शब्दों के साथ न्याय करती हुयी ... लक्ष्य को भेद रही है ... आज की वास्तविकता है ...

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December 16, 2017 at 11:52 PM

अर्थपूर्ण तर्क !

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December 17, 2017 at 8:50 AM

बिल्कुल सही कहा कविता जी कि
चूहे के न्याय से बिल्ली का अत्याचार भला
अन्यायपूर्ण शान्ति से न्यायपूर्ण युद्ध भला। सुंदर प्रस्तुति।

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December 17, 2017 at 9:19 AM

सावधानी हटी, दुर्घटना घटी

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December 17, 2017 at 11:13 AM

उम्दा
बेहतरीन रचना....हार्दिक बधाई

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December 17, 2017 at 12:24 PM

सटीक रचना

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December 17, 2017 at 3:56 PM

अन्याय पूर्णण शान्ति से अन्याय पूर्ण युद्ध भला.....
वाह!!!!
बहुत ही सटीक....
लाजवाब अभिव्यक्ति

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December 17, 2017 at 4:03 PM

सार्थक रचना..
अन्यायपूर्ण शान्ति से न्यायपूर्ण युद्ध भला।

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December 23, 2017 at 12:49 PM

सत्य वचन ..कडवे बोल

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December 25, 2017 at 1:11 PM

गीदड़ भाग जाते हैं पर बंदरों को डंडे पड़ते हैं
कानून से अधिक उल्लंघन करने वाले मिलते हैं।
अत्यंत सारगर्भित रचना...

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January 1, 2018 at 6:01 AM

नव वर्ष की शुभकामनायें.
वर्तमान का हाल और विसंगति पर व्यंग खूब बनता है.
आनंद आया पढ़कर.

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February 20, 2018 at 11:47 PM

आपने बहुत अच्छी बात कही है।

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