भेड़ाघाट (जबलपुर) नौका विहार  Bhedaghat Nauka Vihar

भेड़ाघाट (जबलपुर) नौका विहार Bhedaghat Nauka Vihar


ठण्ड अथवा बरसात के मौसम की अपेक्षा गर्मियों में सबसे ज्यादा शादी-ब्याह होते हैं। शादी-ब्याह अगर घर के आस-पास हो तो रात को घूमते-घामते एक के बाद एक शामिल होने में ज्यादा कष्ट की अनुभूति नहीं होती। लेकिन अगर शादी दूर किसी रिश्तेदार के घर हो, तो सौ बार सोचना पड़ता है। बावजूद इसके जब हमें जबलपुर रहने वाले एक निकट संबंधी का विवाह निमंत्रण पत्र मिला तो हमने फौरन गर्मी से हाल-बेहाल होते मन की सुनते हुए शादी में सम्मिलित होने एवं भेड़ाघाट में नौका-विहार का आनन्द उठाने का कार्यक्रम निश्चित कर लिया। गर्मियों में नौका-विहार करना अत्यन्त आनन्दप्रद होता है। नर्मदा का शान्त और शीतल वातावरण मन में अपूर्व आल्हाद उत्पन्न करता है। ऊंची-नीची विभिन्न रंग वाली संगमरमरी चट्टानों के अनोखे सौंदर्य में जब नौका मंथर गति से आगे बढ़ती है और उसमें सवार सभी ‘नर्मदा मैया की जै‘ का उद्घोष करते रहते हैं तो थका-हरा मन तरंगित होकर तरोताजगी से भर उठता है। भेड़ाघाट में धुआंधार जल प्रपात के बाद जब नौका-विहार को निकले तो नौका-विहार को मोबाईल में कैद कर लिया, जिसे यू-ट्यूब में पोस्ट किया तो सोचा ब्लाॅग में भी पोस्ट करती चलूँ।



हमेशा के डर से उससे एक बार गुजर जाना भला

हमेशा के डर से उससे एक बार गुजर जाना भला

गर्म पानी से झुलसा कुत्ता ठण्डे पानी से भी डरता है
चूने से मुँह जले वाले को दही देखकर डर लगता है

रीछ से डरा आदमी कंबल वाले को देख डर जाता है
दूध का जला छाछ को फूँक-फूँक कर पीता है

ईश्वर से न डरने वाले से सभी को डर लगता है
आग में झुलसा हुआ बच्चा आग से डरता है

जिससे बचना मुश्किल हो, उससे मूर्खता है डरना
कल क्या हो यह सोचकर आज क्यों डर के रहना

दुष्ट को क्षमा नहीं डर दिखाकर बस में करना भला
हमेशा के डर से उससे एक बार गुजर जाना भला
अपमान के साथ मिले लाभ से सम्मान के साथ हानि उठाना भला

अपमान के साथ मिले लाभ से सम्मान के साथ हानि उठाना भला

गलत ढंग से कमाया धन गलत ढंग से खर्च हो जाता है
बड़ी आसानी से मिलने वाला आसानी से खो भी जाता है

दूध की कमाई दूध और पानी की पानी में जाती है
चोरी की ऊन ज्यादा दिन गर्माइश नहीं देती है

एक नुकसान होने पर नुकसान होते चले जाते हैं
लाभ की चाहत में बुद्धिमान भी मूर्ख बन जाते हैं

हर लाभ के साथ कोई न कोई हानि जुड़ी रहती है
बिना परिश्रम की कमाई लड़ाई में गंवाई जाती है

बाल्टी डूब जाने के बाद रस्सी को नहीं फेंका जाता है
आग जलाने वाले को धुआं भी सहन करना पड़ता है

अंधेरे घर में चांद का उजाला जितने दिन उतना भला
ठंड में ठिठुरने से आंखो में धुआं बर्दाश्त करना भला

कस्तूरी की व्यापार हानि से मिट्टी के व्यापार से लाभ कमाना भला
अपमान के साथ मिले लाभ से सम्मान के साथ हानि उठाना भला

....कविता रावत