मौत नहीं पर कुछ तो अपने वश में होता ही है

जरा इन मासूम बच्चों को अपनी संवेदनशील नजरों से देखिए, जिसमें 14 वर्ष की सपना और उसकी 11 वर्ष की बहिन साक्षी और 11 वर्ष के भैया जिन्हें अभी कुछ दिन पहले तक माँ-बाप का सहारा था, वे 1 जुलाई 2018 रविवार को भयानक सड़क दुर्घटना भौन-धुमाकोट मोटर मार्ग पर होने से बेसहारा हो चुके हैं। इस दर्दनाक हादसे से उत्तराखंड ही नहीं अपितु पूरा देश दहल उठा, जिसने भी सुना/ देखा उनकी आंखे नम हुए बिना नहीं रही। इस हादसे में इन तीनों बच्चों ने माँ-बाप को खो दिया, जिससे इनके सामने परवरिश की बड़ी विकट समस्या खड़ी हो गयी है। भले ही निकट रिश्तेदार, सगे सम्बन्धी इनको अभी सहारा दें लेकिन मां-बाप जितना अपने बच्चों के लिए करते हैं, उतना और किसी के लिए करना कहाँ संभव हो पाता है, यह हम सभी जानते हैं। इन बच्चों ने पहले तो अपने दादा-दादी खोये और अब काल ने इनके माँ-बाप को भी लील लिया। प्रभु की इस लीला को, मृत्यु के तांडव-नृत्य के रहस्य को, प्रकृति के इस दंड-विधान को, जगनियन्ता की क्रीड़ा ही मान सकते हैं, जिसका भेद पाना मनुष्य के वश में नहीं है। हाँ कोई नचिकेता हो तो संभव है, मृत्यु के रहस्य को पा सके। कोई भी दुर्घटना न मनुष्य की उपयोगिता और महत्ता को देखती है और न समय और कुसमय को। कोई व्यक्ति किसी आवश्यक कार्य से जा रहा है, कितने उत्साह के साथ किसी स्वागत-समारोह या विवाहोत्सव की तैयारियां हो रही हों, इन बातों से दुर्घटना का  कोई वास्ता नहीं, जरा झटका लगने की देर है और मनुष्य की जीवन-लीला समाप्त। लगता है दुर्घटना को तो जैसे किसी की बलि चाहिए- चाहे वह कोई भी हो, उसे किसी का निहाज नहीं, किसी से प्यार नहीं। जब भी ऐसी किसी दुर्घटना के बारे में सुनती हूँ तो मेरा मन बड़ा व्यथित हो जाता है, क्योंकि 13 जून, 2010 को ऐसी ही एक सड़क दुर्घटना में मेरे ममेरे देवर  अपनी टाटा सूमो सहित एक गहरी खाई में गिर गये थे, जिसमें बैठे 9 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।
     "सदा न फूले तोरई, सदा न सावन होय, सदा न जीवन थिर रहे, सदा न जीवै कोय।" अर्थात् इस संसार में न तो सदा-सदा के लिए सावन  है, न फल-फूल, न कोई स्थिर है और नहीं जीवित रहता है। बाबजूद इसके मनुष्य प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि उसके पास संवेदना है, सोच-विचार, अच्छे-बुरे को समझने की शक्ति है।  हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि मानवीय संवेदना और इंसानियत की लौ सबके दिलों में जलती रहती हैं, बस उसे जिन्दा रखने की जरुरत होती  है। मैंने एक छोटी सी पहल की है और आप से भी अनुरोध करती हूँ कि थोड़ा संवेदनशील होकर विचार-विमर्श करते हुए मानवीय आधार पर इन मासूमों को थोड़ा-थोड़ा सहारा देने के लिए आगे बढ़ें, आपका एक छोटे से छोटा सहयोग भी इन्हें इनके भविष्य गढ़ने में मददगार साबित होगा, जीने का आधार बनकर  इन्हें संबल प्रदान करेगा, और वे जीवन जीने की राह पर चलना सीख सकें।  इसलिए यथा सामर्थ्य सहायता करने में पीछे न रहे। बूँद-बूँद से घड़ा भरता है। एक-एक रुपये करके भी लाखों आसानी से जमा हो सकते हैं, बस इसके लिए इच्छा शक्ति और संवेदनशीलता की जरुरत है। आजकल तो इंटरनेट बैंकिंग और ऐप से किसी के खाते में पैसे जमा करना बड़ा आसान काम हो गया है। अभी बच्चें अपने   मामा अरुण भदोला के पास है, जो भी व्यक्तिगत रूप से संवेदना अथवा आर्थिक सहयोग करना चाहें, वे उनके मोबाइल नम्बर 8650536735 से संपर्क कर सकते हैं।
            
सपना और साक्षी के निम्न बैंक खाते के माध्यम से आप सहयोग कर सकते हैं-
1. कु. सपना पुत्री स्व0 सुखदेव स्व0बबली देवी
कक्षा 9 ई0का0 अन्द्रोली
ग्राम अपोला पोस्ट अन्द्रोली नैनीडांडा
पौड़ी गड्वाल उतराखण्ड।
खाता संख्या. 35559265859
IFSC SBIN0004533
SBI DHUMAKOT

2. कु.  साक्षी पुत्री स्व0 सुखदेव स्व0 बबली देवी
कक्षा 7 ई0का0 अन्द्रोली
ग्राम अपोला पोस्ट अन्द्रोली नैनीडांडा
खाता संख्या. 31863809098
IFSC SBIN0004533
SBI DHUMAKOT

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July 5, 2018 at 2:15 PM

बहत ही दर्दनाक हादसा है ये ... कई बार प्राकृति विनाश की चरम स्थिति में पहुँच जाती है और इंसान के हात कुछ नहीं रह जाता ... मेरी संवेदनाएं हैं परिवार के साथ ... उमीद करता हूँ की इनकी मदद को दिल खोल के सभी साथ आयेंगे ... दुःख सभी का साझा होता है ...

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July 5, 2018 at 2:23 PM

भगवान ऐसे दिन किसी को भी न दिखाए.................. इस गहरी दुःख की घड़ी में मेरे से जो भी बनेगा निश्चित रूप से सहयोग करूँगा और आशा करता हूँ आपके ब्लॉग तक पहुँचने वाले लोग भी सहयोग करने में पीछे नहीं रहेंगे ...............

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July 5, 2018 at 3:49 PM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (06-07-2018) को "सोशल मीडिया में हमारी भूमिका" (चर्चा अंक-3023) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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July 5, 2018 at 7:18 PM

जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार ६ जुलाई २०१८ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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July 5, 2018 at 10:59 PM

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन वयस्क होता बचपन और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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July 6, 2018 at 6:59 AM

बच्चों के संपर्क सूत्र देने के लिए धन्यवाद.

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July 6, 2018 at 11:32 AM

बहुत दर्दनाक हादसा। ईश्वर उन्हें दुखों से लड़ने की शक्ति दे।

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July 6, 2018 at 12:10 PM

जो कुछ अपने हाथ में है उसका तो भरपूर उपयोग होना ही चाहिए

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July 6, 2018 at 10:09 PM

बहुत ही दुखद और मार्मिक ।

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July 7, 2018 at 10:54 PM

बहुत ही दुखद हादसा । संपर्क सूत्र देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद कविता जी ।

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July 8, 2018 at 3:26 PM

अत्यन्त दर्दनाक हादसा। ईश्वर मृतको की आत्मा को शान्ति एवं परिजनो शक्ति प्रदान करे।

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July 9, 2018 at 2:04 AM

निमंत्रण विशेष : हम चाहते हैं आदरणीय रोली अभिलाषा जी को उनके प्रथम पुस्तक ''बदलते रिश्तों का समीकरण'' के प्रकाशन हेतु आपसभी लोकतंत्र संवाद मंच पर 'सोमवार' ०९ जुलाई २०१८ को अपने आगमन के साथ उन्हें प्रोत्साहन व स्नेह प्रदान करें। सादर 'एकलव्य' https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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July 13, 2018 at 8:34 PM

बहुत दर्दनाक हादसा ... दुखद

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July 14, 2018 at 11:36 AM

अत्यन्त दर्दनाक हादसा ईश्वर मृतको को दुखों से लड़ने की शक्ति :)

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July 14, 2018 at 11:37 AM

अत्यन्त दर्दनाक हादसा ईश्वर मृतको को दुखों से लड़ने की शक्ति

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