फायदे अक्सर आदमी को गुलाम बना देते हैं

सोने की बेड़ियां हों तो भी उसे कौन चाहता है?
स्वतंत्रता स्वर्ण से अधिक मूल्यवान होता है

बंदी  राजा  बनने से आजाद पंछी बनना भला
जेल के मेवे-मिठाई से रूखा-सूखा भोजन भला

स्वतंत्रता का अर्थ खुली छूट नहीं होती है
अत्यधिक स्वतंत्रता सबकुछ चौपट करती है

लोहा हो या रेशम दोनों बंधन एक जैसे होते हैं
फायदे अक्सर आदमी को गुलाम बना देते हैं


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August 14, 2018 at 1:48 PM

सच, सच एकदम सच
सादर

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August 14, 2018 at 3:03 PM

बहुत सुंदर |
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें

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August 14, 2018 at 4:31 PM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (15-08-2018) को "स्वतन्त्रता का मन्त्र" (चर्चा अंक-3064) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
स्वतन्त्रतादिवस की पूर्वसंध्या पर
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
राधा तिवारी

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August 14, 2018 at 4:39 PM

लोहा हो या रेशम दोनों बंधन एक जैसे होते हैं
फायदे अक्सर आदमी को गुलाम बना देते हैं
बहुत सही कहा कविता दी।

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August 14, 2018 at 7:00 PM

बंदी राजा बनने से आजाद पंछी बनना भला
जेल के मेवे-मिठाई से रूखा-सूखा भोजन भला...........

सही कहती हैं आप, गुलामी से अच्छा है आजादी से जो कुछ मिले

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August 14, 2018 at 7:08 PM

बहुत सही बात कही हैं

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August 15, 2018 at 12:11 PM

उत्तम विचारों की अभिव्यक्ति

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August 15, 2018 at 1:02 PM

नमस्ते,
आपकी यह प्रस्तुति BLOG "पाँच लिंकों का आनंद"
( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में
गुरुवार 16 अगस्त 2018 को प्रकाशनार्थ 1126 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।

प्रातः 4 बजे के उपरान्त प्रकाशित अंक अवलोकनार्थ उपलब्ध होगा।
चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
सधन्यवाद।

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August 15, 2018 at 3:21 PM

आपकी साइट बहुत अच्‍छी लगी, और रचना तो गजबै हइ कविता जी

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August 16, 2018 at 6:42 PM

स्वतंत्रता का अर्थ खुली छूट नहीं होती है
अत्यधिक स्वतंत्रता सबकुछ चौपट करती है

आज जो हालात हैं, उस पर सटीक बैठ रही हैं ये पक्तियां। शिक्षाप्रद रचना हैं।

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August 18, 2018 at 5:13 PM

बहुत सुंदर रचना पहले की 2 पक्तियां काफी अच्छी लगी.

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August 18, 2018 at 6:22 PM

सब कुछ बिलकुल सच- सच।

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August 21, 2018 at 9:46 AM

सहमत आपकी बात से ।।।
आज़ादी की सूखी रोटी भी अलग स्वाद देती है ...
आपके हर शेर में ग़ज़ब का अन्दाज़ है ... तीखी और प्रखर बात ...

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