डरपोक कुत्ते सबसे तेज़ भौंकते हैं

मुर्गा अपने दड़बे पर बड़ा दिलेर होता है
अपनी गली का कुत्ता भी शेर होता है

दुष्ट लोग क्षमा नहीं दंड के भागी होते हैं
लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं

हज़ार कौओं को भगाने हेतु एक पत्थर बहुत है
सैकड़ों गीदड़ों के लिए एक शेर ही ग़नीमत है

बुराई को सिर उठाते ही कुचल देना चाहिए
चोर को पकड़ने के लिए चोर लगाना चाहिए

कायर भेड़िए की खाल में मिलते हैं
डरपोक कुत्ते सबसे तेज़ भौंकते हैं

...कविता रावत



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February 21, 2019 at 8:50 AM

हर बात सटीक ... सामयिक और सार्थक ....
डरपोक कुत्ते सच में सबसे तेज़ भौंकते हैं ... गली के कुत्ते शेर होते हैं ...
लातों के भूत बातों से नहीं मानते ... आपका अंदाज़ बहुत चुटीला, चुस्त और लाजवाब है ...

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February 21, 2019 at 10:34 AM

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 22 फरवरी 2019 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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February 21, 2019 at 11:09 AM

सटीक डरपोक कुत्ते और तेज भौंक ।

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February 21, 2019 at 12:20 PM

चोर को पकड़ने के लिए चोर लगाना चाहिए
बहुत ही अच्छी बात।
आतंकवादियों से मुक्ति का यही एक फार्मूला है।
प्रणाम।

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February 21, 2019 at 4:14 PM

बुराई को सिर उठाते ही कुचल देना चाहिए
चोर को पकड़ने के लिए चोर लगाना चाहिए

कायर भेड़िए की खाल में मिलते हैं
डरपोक कुत्ते सबसे तेज़ भौंकते हैं
बहुत सही कहा, कविता दी।

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February 21, 2019 at 5:24 PM

बुराई को सिर उठाते ही कुचल देना चाहिए। प्रणाम कविता जी।

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February 21, 2019 at 6:09 PM

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (22-02-2019) को "नमन नामवर" (चर्चा अंक-3255) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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February 21, 2019 at 10:43 PM

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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February 22, 2019 at 9:31 AM

बहुत अच्छी रचना सखी |पढ़कर बहुत अच्छा लगा
सादर

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February 22, 2019 at 12:51 PM

गली के कुत्ते शेर होते हैं एकदम सटीक और लाजवाब है लिखा है कविता दी

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February 22, 2019 at 4:27 PM

कविता जी बहुत खरी-खरी सुनाई आपने ! लेकिन आप से हमारे तमाम नेता नाराज़ हो जाएंगे क्योंकि वो भी दुश्मन को काटने से ज़्यादा उस पर भौंकने में यकीन रखते हैं.

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February 22, 2019 at 9:19 PM

समसामयिक सटीक प्रस्तुति...
बहुत ही लाजवाब।

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February 23, 2019 at 1:13 PM

हज़ार कौओं को भगाने हेतु एक पत्थर बहुत है
सैकड़ों गीदड़ों के लिए एक शेर ही ग़नीमत है
बहुत खूब.... कविता जी

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March 2, 2019 at 9:46 AM

बहुत बढ़िया

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March 19, 2019 at 12:26 AM

क्या कविता लिखा है आपने बहुत खूब !!
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