एमपी के बीएफ

नामनिर्देशित म्हणजे काय

नामनिर्देशित म्हणजे काय, सीमा : अभी नही आज तो मुझे ढेर सारा काम है, कल संजू अपने मामा के यहाँ जाएगा और मैं घर मे अकेली बोर हो जाउन्गि ऐसा करो तुम कल दोपहर मे आना फिर हम बाते करेगे सुजाता : तूने बेटे अभी अच्छे से औरतो को देखा कहाँ है एक से एक खूबसूरत औरते होती है, मैं तो अब 40 पर कर चुकी हू, मेरी खूबसूरती तो अब कहाँ रही

फिर मेने संकेत को कहा – तुम चलो, तुम्हारे पापा तुम्हें पार्टी में ढूंड रहे हैं, मे राशि को लेकर आता हूँ… मेरे चेहरे पे एक चमक आ गई और मेरा मन करने लगा कि मैं दौड़कर अभी रेणुका की पास पहुँच जाऊँ लेकिन तहज़ीब भी कोई चीज़ होती है…

आंटी : मुस्कुराते हुए अभी फूल की खुश्बू तो ले लो फिर जब सब भंवरे चले जाए तब उस फूल का रस भी पी लेना, इतना रस मिलेगा उस फूल मे कि तुम मस्त हो जाओगे नामनिर्देशित म्हणजे काय बहुत देर तक हमारी चुदाई धुँआधार तरीके से चलती रही, इस दौरान वो एक बार झड चुकी थी… ये मेने अच्छी तरह से महसूस किया, लेकिन उसने अपनी तरफ से जाहिर नही होने दिया…

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  1. बातें करते हुए बीच-बीच में उनकी नज़र भटक कर अपनी सास के यौवन पर ज़रूर अटक जाती, जिससे उनके पॅंट में उभार बढ़ने लगा था…!
  2. ये कहकर वो खिल-खिलाकर हँसने लगी, फिर मेरे गाल को चूमकर बोली – वाकाई में बहुत शैतान हो तुम और प्यारे भी.., जो गणतंत्र दिवस 2021 में मनाया जाता है
  3. अपनी तरफ मुझे इस तरह घूरते हुए पाकर वो शरमा गयी, कहीं ना कहीं सुबह वाली घटना से उन्हें लगने लगा कि मुझे पता लग गया है, इसलिए वो थोडा नर्वस दिख रही थी…! यूँ लग रहा था मानो वो मेरी नई नवेली दुल्हन हो और सुहागरात को मैंने उसे पहली बार उसके कामुक बदन को निहारना शुरू किया हो…
  4. नामनिर्देशित म्हणजे काय...श्यामा पाजामा के उपर से ही मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में भरते हुए बोली – जीजी के अलावा तो और किसी के आने के चान्स नही हैं.., रातभर मेरी चूत है ना इसकी सेवा के लिए.., ये कहकर उन्होने मेरे खड़े हो चुके लंड को अपनी चूत की फांकों पर रगड़ना शुरू कर दिया…!
  5. मे – अरे यार दीदी ! मुझे इसको चोदने की इतनी पड़ी नही है, बस साली को अपनी पालतू कुतिया बनाना चाहता हूँ, जो एक इशारे पर पून्छ हिलाकर पीछे – 2 चल पड़े.. कुछ देर तक कोई प्रतिक्रिया नही आई, तो मे फिरसे चिल्लाया.., इस बार किसी के कदमों की आहट मुझे सुनाई दी, फिर गेट का सरकंडा सरकाने की आवाज़ हुई, फिर एक इंसानी साया अंदर दाखिल हुया…

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प्राची जो कि ज़्यादातर उसी शहर में रहकर अपने मिशन को अंजाम दे रही थी उसे सारी योजना समझाकर एक दिन मेने संजू से मिलने का मन बना ही लिया……….!

मैंने धीरे से उन्हें अपनी बाहों से आजाद किया और उन्हें अपने सामने खड़ा किया ताकि मैं उन्हें ठीक से देख सकूँ। अभी शाम होने में वक़्त था, दिन के लगभग 4 बजे होंगे.., भले ही दिसंबर का महीना था लेकिन गर्मी में कोई ज़्यादा राहत नही थी..,

नामनिर्देशित म्हणजे काय,आश्चर्य के साथ बहुत देर तक मे उसे देखता ही रहा., वो अपने होठों को आपस में कसकर दबाते हुए मेरे पास बैठ गयी..ऐसा लगा मानो वो किसी दर्द को पीने की कोशिश कर रही हो…!

फिर उसने अपने टॉप को उतार कर एक तरफ को उच्छाल दिया… उसके बाद स्कर्ट भी उपर उठा लिया, और अपनी गान्ड उठाकर उसे भी सर के उपर से निकाल कर एक ओर को फेंक दिया….

खिड़की के स्लाइड को खोलने की धुन में उनकी निगाहें इधर-उधर भटकने लगी, शायद कोई ऐसी चीज़ मिल जाए जिससे इसे ज़ोर देकर खिसकाया जा सके…सामान्य वास्तु टिप्स

‘अब चुप हो जाओ और चलने की तैयारी करो, मैं बस थोड़ी देर में आया!’ इतना कह कर मैंने उसे उठाया और अपने घर जाने के लिए कहा। फोन अब्बास का था, शुरू-शुरू में कुछ उसने अकड़ दिखाई लेकिन लीना के धमकाने पर वो लाइन पर आगया और अपने माल के लिए गुहार करने लगा…!

मे – भाभी एक बात कहूँ.., आपकी गान्ड बहुत सुंदर है.., मन करता है, एक बार अपना लंड इस गद्देदार गान्ड में डाल दूं..,

अपने गोल-गोल नितंबों को मटकाते हुए वो उन दोनो के आगे-आगे चल रही थी.., उसके पीछे आहें भरते हुए वो दोनो किसी चाबी लगे खिलौनों की तरह उसकी मटकती गान्ड के मज़े लेते हुए पॅंट में अपने-अपने लंड अड्जस्ट करते हुए चल पड़े…!,नामनिर्देशित म्हणजे काय लेकिन जैसे ही वो पलटा.., पीछे से रुखसार ने उसकी कौली भर ली.., और उससे चिपकते हुए बोली – अब इतना अच्छा सीन तो आप ही की वजह से देखने को मिला है..,

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