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लड़की की चूत में

लड़की की चूत में, ‘अरे यार, तुझे नहीं मानना तो मत मानो…. मेरा क्या, मुहाँसे तुम्हारे ठीक होने हैं, मेरा क्या. नहीं मानना तो मत मानो! चलो घर चलते हैं अब!’ मैंने थोड़ा झुंझला कर कहा. काकी ने ठंडी सांस ली, भगवान बहुत चूहे हो गए हैं घर में, इतना अनाज़ रखा है क्या करें...... दवाई डालो तो भी मरते नहीं है....फिर मैं ये सब किसके भरोसे छोड़ कर जाऊँ ......

भेन्चोद........कोंन चुतिया चाची की शानदार चिकनी चूत को गन्दा बोलेगा.......वो तो गुलकंद का पीस लग रही थी. जी मेरा नाम इनस्पेक्टर मुनव्वर ख़ान है. इस इलाक़े में नया ट्रान्स्फर हुआ हूँ ख़ान ने फिर ई कार्ड निकालकर दिखाया वैसे लोग मुझे प्यार से मुन्ना भी कहते हैं

उसकी तुम चिंता मत करो. बस कल सुबह तक वहाँ पहुँच जाना कहते हुए रूपाली अपनी कार की तरफ बढ़ गयी. बिंदिया और पायल उसे कार तक छ्चोड़ने उसके पिछे पिछे आ रहे थे. लड़की की चूत में फिर उसने खुद ही अपना ब्लाउज खोल दिया मैंने उसे उसके बदन से अलग किया और फिर उसकी ब्रा को भी उससे जुदा कर दिया.

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  1. पिया : कहीं से भी मिला .....तुमसे मतलब.......अरे वो लायब्रेरी के कार्ड पर लिखा था. मैंने सेव कर लिया था की कभी काम पड़ा तो......
  2. तेज फिर चुप खड़ा रहा. रूपाली को हमेशा उसपर हैरत होती थी. ये वही तेज वीर सिंग है जिसने जाने कितनी लाशें गिरा दी थी अपने भाई का बदला लेने के लिए, ये वही तेज है जिसके सामने कोई ज़ुबान नही खोलता था, खुद ठाकुर साहब भी नही पर रूपाली के सामने तेज हमेशा सर झुकाए ही खड़ा रहता था. फिल्म बफ
  3. चाची के वो खुबसूरत नितम्ब, जिनको मैं आज सुबह ही नाप चुका था. मेरी नज़रों के सामने थे. मेर मुंह खुला का खुला रह गया. चाची की कमर से उठा कटाव उनके नितम्बो पर पुरे शबाब पर आ रहा था. मेडम मैं डॉक्टर कुलकर्णी बोल रहा हूँ. ठाकुर साहब का आक्सिडेंट हो गया है. काफ़ी चोट आई हैं. सीरीयस हालत में हैं. आप फ़ौरन हॉस्पिटल आ जाइए.
  4. लड़की की चूत में...फोन रखकर रूपाली उठी जे तभी पायल चाय लेकर आ गयी. रूपाली को रात का वो नज़ारा याद आया जब उसने पायल की गान्ड पर हाथ फेरते हुए अपने जिस्म की आग ठंडी की थी. वो एकटूक पायल को देखने लगी, उसकी अल्हड़ जवानी को निहारने लगी. मेरी गांड की फटफटी तो यूँही गियर मे रहती ही है….मैने तुरंत हड़बड़ते हुए रिमोट उठा लिया और आंटी के सीरियल लगाने लगा…..तो और क्या करता भी….बाबूराव खड़ा हो गया था….किधर चुपाता….
  5. इंदर अपनी गाड़ी रोके कोई एक घंटे से कामिनी का इंतेज़ार कर रहा था. कभी ऐसा नही होता था के कामिनी देर से पहुँचे, बल्कि वो इंदर से पहले ही पहुँच जाती थी पर आज इंदर को इंतेज़ार करना पड़ रहा था. वो शहेर के बाहर एक सुनसान इलाक़े में गाड़ी रोके खड़ा था. कामिनी और वो अक्सर यहीं मिला करते थे. झूठ थी. शादी के बाद मैने हार नही मानी. मैं सरिता के बिना ज़िंदा नही रह सकता था इसलिए यहाँ चला आया. पड़ा रहा एक नौकर बनके क्यूंकी यहाँ मुझे वो रोज़ नज़र आ जाती थी भूषण ने कहा

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मैं चाची के चेहरे से १० इंच की दुरी पर बाबुराव को लाकर धीरे धीरे हिलाने लगा. मैंने फिर कहा, च च चाची प्लीज़ चूस लो ना.....देखो कैसा तड़प रहा है .......आह ह ह ह .........

‘बस ऐसे ही… मार्किट में कुछ पर्चेजिंग करनी थी. इस तरफ से निकली तो आपका ऑफिस देख के मन हुआ कि आप से कुछ बातें ही हो जायें, बहुत दिन हो गये आप से बात किये हुए!’ मुझे ऐसा लगा मानो मेरे हाथ पर हजारो मधुमखियों से एक साथ डंक मार दिया....जैसे मेरा पूरा हाथ सेकण्ड के सौवे हिस्से में हज़ार बार हिल गया....मैंने चिल्लाने की कोशिश की मगर मेरे मुंह से आवाज़ ही नहीं निकली......मेरी आँखों पर अँधेरा सा छा गया.

लड़की की चूत में,हो गया मालकिन पायल ने धीमी आवाज़ में कहा पर रूपाली ने जैसे सुना ही नही. वो उसी तरह उसकी चूचियो पर हाथ फेरती रही. अचानक उसने पायल का एक निपल अपने उंगलियों में पकड़ा और धीरे से दबाया.

औरत की चौड़ी गांड हमेशा से मर्द को आकर्षित करती है…..यहाँ तो चौड़ी नही विशाल महाकाय गांड थी…ऐसा लग रहा था मानो 1500 स्क्वेर फीट का पूरा प्लॉट है…..

इधर देखो तो मेरे बाबूजी ने मेरी गांड में डंडा डाल रखा था वह बार-बार मुझसे बोलते थे कि दुकान पर बैठो ये तुम्हारी पढ़ाई लिखाई में कुछ नहीं बचा है, अरे हमने पढ़-लिखकर कौन सा तीर मार लिया जो नवाब साहब पढ़ाई लिखाई कर के तीर मारेंगे, एक छोटा सा हिसाब तो तुमसे मिलता नहीं, घर का कोई काम होता नहींडाबर लाल तेल गर्म है या ठंडा

फिलहाल के लिए इतना जान लीजिए के मैं ये इसलिए नही कर रहा क्यूंकी ये मेरा काम है. और भी बहुत केस पड़े हैं जिनपर मैं अपना दिमाग़ खपा सकता हूँ. यूँ समझ लीजिए के आपके पति का एक एहसान था मुझपर जो मैं अब उतारने की कोशिश कर रहा हूँ ज़ुबान खुले तो कटवा दीजिएगा बहूरानी. आप भरोसा रखिए ...... भूषण फिर दोबारा अपनी बात पूरी ना कर सका. वजह थी उसके पाजामे पे रखा रूपाली का हाथ.

राज ने उसे समझाया कि कई बार जल्दबाजी में लिए हुए निर्णय बाद में पछतावे का कारण बन जाते हैं इस लिए अच्छे से सोच लो।

आखिर लड़की थी बोलती भी क्या. इतना तो मैं समझ गया था कि अब ये बहुत जल्दी चुद जायेगी मुझसे लेकिन मुझे हर कदम फूंक फूंक कर रखना था. वो अभी कमसिन कच्ची कली थी. ऊपर से अपने ही मोहल्ले की थी. अपनी इज्जत के साथ साथ मुझे उसकी इज्जत, मान सम्मान का भी पूरा पूरा ध्यान रखना था.,लड़की की चूत में मेरी गांड भी फटी, की साली भेन्चोद नाराज़ हो गयी या नाटक चोदने लगी तो बॉस अपनी तो पक्की KLPD हो जाएगी......

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