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मराठा मुक्तिसंग्राम दिन

मराठा मुक्तिसंग्राम दिन, यही बात रूपाली अपने दिमाग़ में काई बार दोहराती रही. उसे कुच्छ सवालों के जवाब चाहिए थे और भूषण इस हवेली के बारे में सब कुच्छ जानता था. रूपाली ने इससे आगे और कुच्छ ना सोचा. वो उठ खड़ी हुई और तेज़ कदमो से भूषण के कमरे की तरफ बढ़ी. ‘ठीक है अंकल जी, अब जो भी कहना हो लास्ट टाइम बोल दो जल्दी. मेरा कोचिंग का टाइम हो गया, सर जी डांटेंगे अगर लेट हो गई तो!’ वो जल्दी से बोली.

मैं अंडरविअर में था. कहाँ छुपाता ? तभी चूड़ी मेरे पांव से टकराई और मैंने चाची की चूड़ी पकड़ा दी.......वो झुकी और मुझे उनके कसे हुए मम्मे मेरे चेहरे के ठीक ऊपर झूलते हुए दिखे. साली ने खुजली की वजह से पेंटी नहीं पहनी थी मगर ब्रा क्यों नहीं पहनी ये मेरी समझ से बाहर था.... कोमल भाभी बोली, अरे वो मिश्रा आंटी यह भी कह रही थी की वो जैन साहब की बहु का केरेक्टर ठीक नहीं है......शादी के पहले भी उसका तीन चार लड़कों के साथ चक्कर था....और तो और वो एक बार नेहरु पार्क में किसी लड़के के साथ पकड़ा भी गयी थी.......बिना कपड़ो के......हाय राम.....कितनी बेशरम है.......

रूपाली का दिल किया के उसको बताए के जिसे वो ज़रा सी बच्ची कह रही है उसके जिस्म में माँ से भी ज़्यादा आग है और एक लंड ले भी चुकी है. मराठा मुक्तिसंग्राम दिन वो बोली, अरे हाँ वो.......अब तो ठीक है......कभी कभी हो जाती है........तो क्या करू ...? ट्यूब लगा लूँ ना........

अंतर्वासना हिंदी सेक्सी कहानियां

  1. मुझे चाची का पल पल रूप बदलना समझ नही आता था. कभी बात बात मे ज्ञान देना और कभी बाबूराव को चूस चूस के चुस्की बना देना.......
  2. कोमल भाभी समझी की चाची ने उनको रुकने के लिए बोल दिया है.......वो वही की वही अपनी गर्दन ऊँची किये अपनी सहेली को ठुकवाते हुए देखने लगी. பிபி செஸ் வீடியோ
  3. मेरी उंगलिया उनकी गरमा गरम चूत तक पहुँचने ही वाली थी........मैंने अपनी उंगलियों को और नीचे किया और उनको जन्नत मिल गयी. वो रिवॉलव 10 साल पहले खो गयी थी. मैं शिकार पर गया था और वहीं जंगल में कहीं गिर गयी थी इंदर ने जवाब दिया
  4. मराठा मुक्तिसंग्राम दिन...जलपान के बाद शालिनी मुझे अपने रूम में ले गई, उसका रूम तीसरी मंजिल पर था. एक अच्छा ख़ासा बड़ा कमरा था साथ में अटैच्ड वाशरूम था, आगे खुली छत थी जिसके नीचे झाँकने पर बाजार की चहल पहल दिखती थी. मन में तो आया की मैडम जी जहाँ तक आप पास में बैठी हो.......भले ही बस नॉनस्टाप कश्मीर से कन्याकुमारी जा रही हो.
  5. मेरे सामने ही देख. सारे के सारे तुझे थोड़े दे दूँगी. मुफ़्त का माल है क्या. दो तीन पहनके देख ले और जो सही आते हैं वो रख लेना. कुच्छ अपनी माँ के लिए भी निकाल लेना रूपाली ने कहा जैसा कि शालिनी ने उसके हुस्न के बारे में बताया था वो उससे बढ़ कर निकली. कोई साढ़े पांच फुट कद, गोरी गुलाबी रंगत, चित्ताकर्षक नयन नख्श, चेहरे पर सौम्य मुस्कान और हंसती हुई आँखें… भरा भरा निचला होंठ जिससे रस जैसे टपकने को ही था, उमर कोई ख़ास नहीं, तेईस चौबीस साल की ही लगी मुझे वो…

சித்ரா செக்ஸ்படம்

मुझे लगा ही था के आप इस बारे में ही बात करेंगी.देवधर मुस्कुराते हुए बोला असल में वसीयत ठाकुर साहब की नही आपके पति की है, ठाकुर पुरुषोत्तम सिंग की

तेज हमें आपसे कुच्छ बात करनी है. आप हमारे कमरे में आ जाइए रूपाली ने तेज से कहा और उसके जवाब का इंतेज़ार किए बिना ही अपने कमरे में चली आई झूठ थी. शादी के बाद मैने हार नही मानी. मैं सरिता के बिना ज़िंदा नही रह सकता था इसलिए यहाँ चला आया. पड़ा रहा एक नौकर बनके क्यूंकी यहाँ मुझे वो रोज़ नज़र आ जाती थी भूषण ने कहा

मराठा मुक्तिसंग्राम दिन,जी.....ज.....म.....मैं.......वो......नहीं......हाँ......म.......म.....मेरा मतलब है की.....नहीं.....हाँ.....ये....

अरे लल्ला, कुछ भी करवा सकती है औरत.....आदमी को ज़रा सा इशारा करते है उसके दिमाग का सारा खून वहां से, नीचे चला जाता है, औरत की बातों के आगे अच्छे अच्छे हर मान लेते है, चाची ने गुगली मारी.

भाभी क्या बोल रही थी और क्या बोलना चाह रही थी अपने भेजे में समझ आ नहीं रहा था.....अब स्थिति ये थी की मेरा बाबूराव फुल अटेंशन में मेरे शॉर्ट्स में तम्बू बना चूका था और मैं ऐसी हालत में पलट नहीं सकता था......मैंने एक ठंडी सांस ली और प्लग को अंदर दबाते हुए बिजली का स्विच ऑन कर दिया.....அம்மா மகன் கவிதைகள்

मन मसोसकर मैंने इधर उधर देखा साइड में एक नल था वहां जाकर अपने जीन्स को ऊपर चढ़ाया और हाथ मुंह धोने लगा मगर मेरी नज़ारे चाची के मम्मो से नहीं हट पा रही थी. ठीक ऐसे मानो अकाल का भूखा जिसने रोटी नहीं देखी हो उसके सामने रस मलाई आ जाये. चाची ने मेरी जींस मेरे पैरो से निकल कर साइड में रख दी. और मेरे घावों का मुआयना करने लगी.....और मैं तो उनके मम्मो का मुआयना कर ही रहा था.......

तेरे पास कामिनी के कमरे की चाभी कहाँ से आई? रूपाली को अचानक याद आया के इंदर बड़ी आसानी से कमरा खोलकर अंदर चला गया था

ये ठीक लग रही है कहते हुए उसने सलवार एक तरफ रखी और ऐसे ही दो तीन कपड़े निकालकर पायल की जिस्म पर लगा लगाकर देखने लगी. पायल ने फिर आँखें बंद कर ली थी.,मराठा मुक्तिसंग्राम दिन कोमल भाभी के चेहरे पर शरारत के भाव तैर गए.....वो ऑंखें नचा कर बोली, ओ नीलू चाची.........अब तो मैं पूरा मेच देख कर ही जाउंगी......ही ही ही.....

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