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मैत्री दिनाच्या हार्दिक शुभेच्छा

मैत्री दिनाच्या हार्दिक शुभेच्छा, राणाजी ने माला को दरवाजे पर खड़ा देखा तो थोड़े हिल गये लेकिन यह सब तो उन्हें करना ही था. माला के हाथ में लग रहे बैग में बहुत कम कपड़े थे. राणाजी ने अधीर हो माला से पूछा, माला कितनी साड़ियाँ रखी तुमने इस बैग में? ___ प्रिया की आवाज़ कानों में पड़ते ही वो वहीं रुक गया, मुड़कर पीछे देखा तो वो उसके पीछे दौड़ी चली आ रही थी, शंकर की नज़र उसकी हिलती हुई चुचियों पर जम गयी…!

रंगीली ने दरवाजे की ओट से दोनो की बातें सुनी थी, लाला जी की बातें सुनकर वो बहुत खुश हुई, और सोचने लगी कि लाला जी कितना मान रखते हैं उसकी बात का.. राणाजी ने माला को चुप रहने का इशारा किया और धीरे से बोले, अरे हमारे यहाँ ये सब नही बनता है. माताजी के सामने इन सब चीजों का नाम भी मत लेना. वो शाकाहारी हैं. शाकाहारी समझती हो न? जो मॉस मछली नहीं खाते. क्या तुम्हें इस सब के अलावा कुछ और बनाना आता है?

माला ने देखा कि कमरे में कोई नहीं है. उसने झट से चाय का कप उठाया और मुंह से लगा लिया. चाय काफी गर्म थी. मुंह तो जला लेकिन स्वाद भी खूब आया. माला ने इतनी बढिया चाय अपने जीवन में कभी नही पी थी. मैत्री दिनाच्या हार्दिक शुभेच्छा वो लोग लड़कियों को शादी के लिए ले जाते थे और बदले में लोगों को पैसा दे जाते. मेरी बड़ी बहनों के साथ भी ऐसा ही हुआ. तीनों बड़ी बहनों को बापू ने पैसा ले ले कर लोगों के साथ शादी कर दी. उनमें से एक बहिन की तो तुम्हारे गाँव के गुल्लन ने ही शादी करवाई थी और मेरी भी शादी इन्होने ही करवाई है.

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  1. रंगीली अपने घुटनों पर होकर ताल से ताल मिलाती हुई उनका साथ दे रही थी, दोनो की ट्यूनिंग अपने आप मॅच हो गयी, लाला की कमर का उपर होना, सेम टाइम रंगीली की गान्ड का नीचे आना…,
  2. भोला – क्या तू भी खाएगी ? चल कोई ना छोड़ दूँगा तेरे लिए भी, इतना कहकर उसने रबड़ी की धार उसकी पीठ से लेकर उसकी गान्ड तक फैला दी, और उसे उपर से लेकर नीचे तक चाट’ता चला गया…! सेक्स वीडियो हिंदी ब्लू फिल्म
  3. मैं..... पहले तो मैं मांफी चाहूंगा कि मेरी वजह से तुम्हे परेशानी उठानी पड़ी । अब जब तुम सब जान चुकी हो और देख चुकी हो तो फैसला मैं तुम पर छोरता हू । पर एक बात मैं बोलना चाहूंगा कि तुम्हारा जो भी फैसला होगा वो मुझे दिल से स्वीकार होगा। जब उससे नही रहा गया तो वो अपनी माँ के बिस्तर पर आकर पीछे से उसकी गान्ड की दरार में अपना मूसल अटका कर चिपक गया…!
  4. मैत्री दिनाच्या हार्दिक शुभेच्छा...ये देखकर सलौनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी, वहीं शंकर सुषमा के कुल्हों पर हाथ फेर्कर उसे शांत करा रहा था.., की हम दोनों कुछ ही दिन के छोटे बड़े है तो हम उम्र के कारण हमारा आपस मैं कभी नहीं बनी, एक्साम्स में मेरे रिजल्ट हमेसा अच्छे होते और सुनैना किसी तरह पास तो उसको ये भी चिढ थी , फिर जब भी मैं मासी के यंहा आता तो मेरा उद्धरण देकर हमेसा उसको डांट पड़ती ये बातें उसके दिल मैं नफरत का बीज बोती राहि।
  5. उत्तेजना पल-प्रतिपल अपनी चरम सीमा को पार करती जा रही थी, वो भी अनायास ही अपनी गान्ड को नीचे से उठाकर उसकी सुरंग की था लेने निकल पड़ा… बदलू झट से अंदर चले गये. यहाँ के लोग किसी भी मेहमान को अपना दुश्मन मानते थे. क्योंकि जब खुद खाने को नहीं था तो उन्हें कहाँ से खिलाते?

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हमारी क़रीब 15 मिन की बात हुए बात के दौरान हमारा प्रोग्राम कुछ यूँ तय हुआ की परिधि को मैं 5 बजे पिक करूण। वंहा से हम दिल्ली डेंजरस ग्रुप से मिले, फिर 7 बजे हम इंगेजमेंट पार्टी के लिए जाए और इन सब बातों पर मैंने हामी भर दी ।

गाओं से बाहर निकलते ही सुषमा ने अपना आँचल ढालका लिया जिससे उसके ब्लाउस में कसे हुए दूधिया उभारों के बीच की गहरी खाई पूरी तरह से नुमाया हो रही थी…! उसका रोना मुझे बर्दास्त न हुआ मैं उसे चुप होने को कहा वो चुप हो गायी, पर कुछ बात नहीं कर रही थी बस सिसकियां ले रही थी। मैंने उसे पहले बाहर चलने को कहा, वो चुपचाप किसी परछाई की तरह मेरे पीछे आ गई ।

मैत्री दिनाच्या हार्दिक शुभेच्छा,शंकर की लाल –लाल आँखों में उसे वासना के अलावा और कुछ नही दिखा, वो समझ गयी, कि अब अगर इसको रोका, तो हो सकता है ये उसे ज़बरदस्ती चोद डाले,

एग्ज़ॅम का रिज़ल्ट आने में अभी समय था, उससे पहले वो दूसरी परीक्षा में अब्बल नंबरों से पास हो गया…, सुषमा गर्भवती हो गयी…!

लाजो ने शर्म से अपना सिर झुका लिया और मुस्कराते हुए उसने रंगीली को सारी बातें कह सुनाई, जिन्हें वो पहले से ही जानती थी…..!वीडियो प्लेयर सेक्सी

अब दूसरे तरफ से गुंजन दीदी कान पकरते हुए.... तु तो बड़ी बड़ी बातें कर रहा है पैसे भी कमाने लगा है कह तो तेरी भी इंगेजमेंट करवा दूँ। मैंने इस बात पर हल्की मुस्कान दी और मुझे ऐसा एक्सप्रेशन देते देख दोनों हसने लाग। मैन तो बस हैरान रह गया साथ ही साथ बहुत अजीब भी लग रहा था क्योंकि ग्राउंड में वो मेरे गले लगी थी, हर एक आदमी हमें ही देख रहा था,मैंने रूही को अपने से अलग करते हुए.....

शंकर ने वहीं उसे बिच्छावन पर लिटा दिया, और उसके ब्लाउस को उसके बदन से अलग करके, छोटी सी ब्रा में क़ैद उसके 32 के गोल-गोल उरोजो को अपनी मुत्ठियों में भरकर मसल डाला…!

जब कुछ देर उसने कोई रिक्षन नही दिया, तो शंकर ने उसके कंधे को पकड़ कर हिलाया…माँ… क्या हुआ, कहाँ खो गयी…?,मैत्री दिनाच्या हार्दिक शुभेच्छा उसकी सोचों पर विराम तब लगा, जब शंकर ने अपने मुँह का दबाब उसके उभारों पर बढ़ा दिया, वो भी उत्तेजना से भरने लगी, और धीरे-धीरे उसका हाथ अपने बेटे के फुल खड़े लंड पर पहुँच गया…

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