इंडियन ओल्ड मैन

काय घडलं त्या रात्री कलाकार

काय घडलं त्या रात्री कलाकार, आज भी मैं थोड़ा जल्दी उठ गया था। मधुर ने बेडरूम में ही चाय पकड़ा दी थी। आज मैंने कई दिनों बाद पप्पू का मुंडन किया था और तेल लगाकर मालिश भी की थी। बाथरूम से फारिग होकर जब तक मैं बाहर आया तब तक मधुर स्कूल जा चुकी थी। मैंने कहा- पागल, मैं सिर्फ तेरी चूत की खुशबू देख रहा था... और मैंने बो उंगली अपने मुँह में रख ली। कसम से उसकी चूत का पानी जो मेरी उंगली में लगा था जरा सा, उसका टेस्ट बड़ा मस्त था।

छाने लगी तो वो अपनी गाण्ड को उछाल रही थी। मैं तो उसको अभी और तड़पाने वाला था, इसलिए मैंने उसी जगह पर जीभ फिरानी शुरू कर दी। हल्के से ऊपर तक ले जाता, पर जैसे ही अन् को लगता में उसकी चूत पर अपनी जीभ लगाने वाला हैं में नीचे हो जाता। भाभी इस बक़्त मुझे बड़ी सेक्सी लग रही थी। उनके मम्म कमीज में कसे हये थे। में बार-बार उनके मम्में देखकर अपनी आँखों की प्यास बुझा रहा था। मेरा दिल कर रहा था भाभी के नंगे मम्मे देखू। लेकिन ऐसा मुमकिन नजर नहीं आ रहा था।

बस में सबसे आखिर में थी हमारी सीटें। हम तीनों वहां जाकर बैठ गये। एक सीट खाली थी वहां अभी कोई नहीं बैठा था। मैं बीच में बैठा था जानबूझ कर। बायें साइड खिड़की के साथ लुबना बैठ गई साथ में फिर खाला बैठ गई। काय घडलं त्या रात्री कलाकार उर्मिला पायल को बाबूजी के सामने खड़ा कर देती है. पायल अब भी नज़रे झुकाए खड़ी है और धीरे-धीरे मुस्कुरा रही है. रमेश भी पायल को मुस्कुरा कर देखते है फिर अपने हाथ से उसकी ठोड़ी पकड़ के ऊपर करते हुए कहते है.

सूर्यनमस्काराचे फायदे

  1. पता नहीं मामा कितनी देर से मामी की गांड मार रहे थे। फ़िर मामा मामी से जोर से चिपक गए। मामी थोड़ी सी ऊपर उठी। उनके पपीते जैसे स्तन नीचे लटके झूल रहे थे। उनकी आँखें बंद थी और वह सीत्कार किये जा रही थी- जियो मेरे राजा मज़ा आ गया !’
  2. पायल की बात सुनते ही रमेश उच्छल के बिस्तर से कूद पड़ते है. खिड़की से बाहर देखते ही रमेश की हवा खराब हो जाती है. मुनमुन दत्ता की सेक्सी
  3. अरे बुद्धू! हम जब नहाते हैं तो सारे कपड़े उतार देते हैं ना? इससे निर्वस्त्र होने से पाप लगता है। अगर यह काला धागा बाँध लो तो फिर निर्वस्त्र होकर नहाने से कोई पाप नहीं लगता। अब समझी? पायल गाना गुनगुनाते हुए दरवाज़ा लगा कर बाहर चली जाती है. बाहर जाते ही वो चुपके से दरवाज़े के की-होल से अन्दर देखने लगती है की सोनू क्या कर रहा है.
  4. काय घडलं त्या रात्री कलाकार...अब मैं सोच रहा था जब लंड चूत में जाता है तब भी तो यही होता है। दोनों शरीर और आत्मा एक हो जाते हैं। अब बकोल मधुर आप इसे प्रेम मिलन कहें, सम्भोग कहें या फिर चुदाई या प्रेम गली? क्या फर्क पड़ता है? उर्मिला की बात सुन कर पायल को अपनी कॉलेज की लाइफ बहुत ही नीरस सी लगने लगती है. उसका दिल करता है की काश वो भी भाभी के उस ग्रुप का हिस्सा होती.
  5. मैने अनु को प्यार से कहा- अनु तुम मुझे गलत मत समझा। मेरे लिए जो तुम हो, वो कोई नहीं हो सकता। मुझे जब कभी ऐसा लगेगा की कोई तुम्हें डामिनेट कर रहा है, तब मैं तुम्हारा ही साथ दूंगा.. कहते हए मैंने एक कौर अनु के मुह में डाल दिया। पायल : पापा ये नाईटी भाभी की है. भाभी तो मुझे उस दिन ही ये पहनने कह रही थी पर मुझे शर्म आ रही थी इसलिए नहीं पहनी.

पढ़ने वाली सेक्सी कहानी

और फिर वो अपने घुटनों के बल हो गई। हमने यह ध्यान जरुर रखा कि लण्ड चूत से बाहर ना निकले। अब मैंने उसकी कमर पकड़ ली और जोर जोर से धक्के लगाने लगा।

अब तो वो पूरी मास्टरनी लग रही थी। मैंने किसी आज्ञाकारी बालक की तरह उसके उरोजों को चूसना चालू कर दिया। वो आह… ओह्ह . करती जा रही थी। उसकी चूत तो अन्दर से इस प्रकार संकोचन कर रही थी कि मुझे लगा जैसे यह अन्दर ही अन्दर मेरे लण्ड को निचोड़ रही है। फिर खाला मेरे पास आई और नीचे बैठकर लण्ड को जड़ से पकड़ लिया। फिर अपनी जुबान बाहर निकली और लण्ड को गीला करने लगी। खाला की नरम जुबान लण्ड में लगने की देर थी। मजे की एक लहर मेरे जिश्म में दौड़ गई।

काय घडलं त्या रात्री कलाकार,आम हालात में यह शर्त भले जलील करने वाली लगती लेकिन फिलहाल तो मैं इतना तड़पी तरसी और भूखी थी कि उसके दोनों पार्टनर्स और भी होते और वे भी हिस्सेदारी मांगते तो भी मैं इन्कार न करती, उल्टे यही कहती कि सब मिल कर मुझ पर टूट पड़ो और मेरी इज्जत की बखिया उधेड़ कर रख दो।

आज भी मैं थोड़ा जल्दी उठ गया था। मधुर ने बेडरूम में ही चाय पकड़ा दी थी। आज मैंने कई दिनों बाद पप्पू का मुंडन किया था और तेल लगाकर मालिश भी की थी। बाथरूम से फारिग होकर जब तक मैं बाहर आया तब तक मधुर स्कूल जा चुकी थी।

रमेश : बहुत मजा दे रही है बेटी तेरी बूर. अपनी बेटी की कसी हुई बूर में लंड पेलने का मजा और किसी बूर में नहीं है.भाई बहन की चुदाई बीएफ सेक्सी

तो उन पांवो के निशान को देखते देखते हम लोग आगे बढ़ चले पर जल्दी ही वो निशान धुंधले होने लगे और हम जंगल के मुहाने तक आ पहुचे थे ओह… उसका चेहरा रोने जैसा हो गया था। उसकी कनपटियों और माथे पर हल्का पसीना सा आने लगा था। उसके साँसें भी बहुत तेज हो चली थी और छाती का ऊपर नीचे होता उभार किसी नदी में हिचकोले खाती नाव की तरह हो रहा था।

मैं- रे पगली, तेरे घरवाले मेरे भी घरवाले है कुछ बोल देंगे तो क्या आफत आ जानी है हम किसी गैर के घर नहीं आये है हम अपनों के घर आये है

उर्मिला : अरे नहीं मम्मी जी. बस वो कुछ कपडे लेने थे बाथरूम से... कोई बात नहीं. मैं उसके निकलने के बाद ले लुंगी.,काय घडलं त्या रात्री कलाकार उर्मिला : ये हुई ना बात. अच्छा अब दोनों मेरी बात ध्यान से सुनो. मैंने शाम के लिए कुछ सोचा है पर मुझे पहले कम्मो से बात करनी है. कम्मो से बात करके जब मैं तुम दोनों को आवाज़ दूंगी तो चले आना. और हाँ अपना ज्यादा दिमाग लगाने की कोई जरुरत नहीं है. बस मेरे इशारों पर ध्यान देना. समझ गए?

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