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आंतरराष्ट्रीय चहा दिन

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बापू भी मुझे आता हुआ देख चुके थे और जैसे ही मैं उन लोगों के पास जाकर बैठा बापू ने मुझसे कहा- हाँ भाई आलोक, कैसी गुजर रही है? फिर मैंने उसकी टॉप में हाथ डालकर ब्रा का हुक खोला और दोनों हाथ अंदर करके उसके चूचुक सहलाये। मदमस्त मम्मे थे, बड़े बड़े संतरों की भांति।

मैंने साहस करके कहा सर मजा ले लेकर मारता हूं, सहलाता हूं अपने लंड को प्यार से, मैडम का खूबसूरत बदन आंखों के आगे लाता हूं, फ़िर जब नहीं रहा जाता तो ... आंतरराष्ट्रीय चहा दिन ये तुम्हारा कालेज नहीं है कर्नल… उसके सुपाड़े पर अपनी जीभ फिराती हुई कोमल बोली। लण्ड को चूसते हुए कोमल के लाल नेल-पालिश लगे नाखून कर्नल के टट्टों के नीचे प्यार से खरोंच रहे थे।

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  3. दोपहर तक तीनो तय्यार थे. ज़रूरत का सारा समान ले लिया था उन्होने. अर्जुन ने अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी निकाली और जेब मे अपने बिना लाइसेन्स वाले दो देसी कट्टे (रेवोल्वेर/पिस्टल) रख लिए कि पता नही कब उनकी ज़रूरत पड़ जाए. वो तीनो सफ़र पर निकल पड़े. दीप्ति खजुराहों की किसी सुन्दर मूर्ति के जैसी बिस्तर पर बेटे और देवरानी के बीच पसरी पड़ी थी. एक हाथ पीछे ले जाकर अजय के सिर को अपने चेहरे पर झुका रखा था. दुसरे से शोभा का सिर पकड़ उसे अपनी जांघों की गहराई में दबा रखा था. गोरा गदराया शरीर अजय के धक्कों के साथ बिस्तर पर उछल रहा था.
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दीदी, दीदी..देखो, शोभा उत्तेजना के मारे चीख सी रही थी. आपके बेटे ने....आह.. आह...मेरे साथ क्या किया.. आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह. मर गईईईईईईईईईई, शोभा का पूरा शरीर कांप रहा था.

सजल का चेहरा तो जैसे ज्वालामुखी में समाया हुआ था। कोमल ने अपनी जांघों में उसे ऐसे कसा हुआ था कि उसकी सांस रुकी जा रही थी। पर वो कुछ नहीं कर सकता था। हाँ वो उस स्वादिष्ट पेय को जी भरकर पी सकता था, सो वही कर रहा था। ‘अरे तेरी चूचुक हैं या अन्नपूर्णा गाय के थन? दूध ख़त्म ही नहीं होता ! अभी अभी तो पूरा दूध चूसा था। तो घबराती क्यों है, अभी दस मिनटों में दूध पूरा भर जायेगा।’ इतना कह के मैंने लुंगी के सिरे खोल दिये और चंदा रानी को कस के भींच लिया।

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सर ने लीना के चूतड़ खोले और उसके जरा से छेद में अपना सेब जैसा सुपाड़ा फ़ंसा दिया. फ़िर पेलने लगे. दीदी का बदन कपकपाने लगा.हम साथ साथ हैं मूवी डाउनलोड hd

सर मुझे चूम कर मेरी गांड में लंड पेलते हुए बोले हां अनू रानी, मैं तुझे प्यार करता हूं. बहुत प्यारी है तू. तूने मुझे बहुत सुख दिया है. अब आगे देखना कि किस तरह से मैं तुझे और तेरी दीदी को चोदूंगा. शादी के बाद मैं मायके से विदा होकर ससुराल में आ गई। मन में अनेक प्रकार की खुशियाँ घर करने लगी थी। आशीष को पाकर को मैं जैसे धन्‍य ही हो गई थी। एक पल के लिये भी मुझे अपने 23 साल पुराने घर को छोड़ने का मलाल नहीं था।

कुछ सोच कर रीटा ने बहादुर को अपने जुराबे और हील वाले सेन्डील डालने को कहा। बहादुर ने रीटा के सामने बैठा, तो शरारती रीटा ने अपना अपने नन्हे नन्हे सुडौल और सुन्दर पैर बहादुर की गौदी मे रख दिये। बहादुर के रीटा की मरमरी पिडंली पकड कर सेन्डील पहनाने लगा।

हां दीदी. बहुत मजा आयेगा दीदी, आज तो सर पहले डांट रहे थे इसलिये मैं घबरा गया था, बाद में कितना प्यार किया उन्होंने, है ना दीदी? मैं खुद को समझाता हुआ बोला, कल के बारे में सोच सोच कर मेरा लंड फ़िर से खड़ा हो रहा था.,आंतरराष्ट्रीय चहा दिन नीलम रानी अब मस्तानी होकर चुदाये जा रही थी और साथ में सीत्कार भी भरती जाती थी, कामुकता के नशे में चूर होकर उसकी आँखें मुंद गई थीं, मुँह

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